>> चोरी हुई अमूल्य कलाकृतियों के 'Sherlock Holmes' हैं प्रोफ़ेसर मनकोडी
सांस्कृतिक
विरासतों की चोरी का मसला पिछले कई सालों से भारत सरकार के लिए सर का दर्द
बना हुआ है. सांस्कृतिक विरासतों की कालाबाज़ारी का एक अंतराष्ट्रीय
मार्केट है, जहां चोरी की हुई प्राचीन मूर्तियों और कलाकृतियों की
खरीद-फरोख़्त को अंजाम दिया जाता है. भारतीय पुरातत्व विभाग के अनुसार
पिछले एक दशक में लगभग 10,000 से भी ज़्यादा प्राचीन कलाकृतियां भारत से
लापता हो गई हैं.
एएसआई और इंटरपोल के साथ मिल कर लापता हुई प्राचीन वस्तुओं को खोजने का काम कर रहे प्रोफ़ेसर मनकोडी का कहना है कि "हमारे यहां कई स्मारक शहर से दूर होते हैं, तो कुछ जंगलों के पास हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा करना बहुत मुश्किल हो जाता है, जिससे वो चोरों के लिए आसान शिकार हो जाते हैं. जिन देशों के पास राष्ट्रीय धरोहरों और विरासत की कमी होती हैं, वहां इन कलाकृतियों की बहुत ऊंची क़ीमत लगाई जाती है".

वो आगे कहते हैं कि "थाइलैंड जैसे देशों से होते हुए अंत में ये अमरीका और फ़्रांस के मार्केट में पहुंच जाती हैं".
इन सब चीज़ों से निपटने के लिए प्रोफ़ेसर मनकोडी ने एक वेबसाइट बनाई है, जिसका नाम उन्होंने 'प्लंडर्ड पास्ट' रखा है, जो लापता हुई प्राचीन वस्तुओं की जानकारी एकत्र करती हैं. इस वेबसाइट के ज़रिये प्रोफ़ेसर मनकोडी पिछले दस वर्षों में भारत से लापता हुई कई प्राचीन कलाकृतियों को वापस लाने में सरकार की मदद कर चुके हैं.

एएसआई के अधिकारी एमएस चौहान का कहना है कि "अगर धरोहर की कलाकृतियां एएसआई के पास पंजीकृत हैं तो ही चोरी होने पर कार्रवाई की जा सकती है, पर कर्मचारियों की कमी की वजह से हर स्मारक की सुरक्षा कर पाना सम्भव नहीं है क्योंकि उनकी संख्या बहुत ज़्यादा है".

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं और वेबसाइट्स के द्वारा चोरी की जानकारी एकत्रत करने वाले प्रोफ़ेसर मनकोडी, एएसआई की मदद से कार्रवाई करना शुरू करते हैं. एक किस्से को साझा करते हुए प्रोफ़ेसर मनकोडी बताते हैं कि "मध्य प्रदेश के एक मंदिर की लापता मूर्ति के बारे में जब वेबसाइट पर लिखा गया तो अमरीका की पुलिस ने उसे ढ़ूंढ निकाला".

फ़िहाल चोरी की 100 से भी ज़्यादा शिकायतें सरकार के पास आई हैं, जिनमें से 15 वस्तुओं के ठिकाने मालूम चल गये हैं, और उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया जारी है.