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इन 12 आदतों को छोड़ पाना भारतीयों के लिए मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है!

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हमारे देश की एक बहुत बड़ी विडम्बना है, कि यहां लोगों को वो करने की आदत है जो उन्हें करने से मना किया जाता है. मैं हर किसी की बात कर रहा हूं ख़ुद अपनी भी. जाने- अनजाने हम सब इन कामों को अंज़ाम देते हैं, और ज़्यादातर हमें बाद में भी एहसास नहीं होता कि हमने कोई गलती की है. हम उसे अपनी शान और रुतबा समझ कर दोस्तों और रिश्तेदारों के सामने शेखी बघारते हैं. 1. हॉस्पिटल ये एक ऐसी जगह है जहां साफ़-साफ़ लिखा होता है कि शांति बनाए रखें. लेकिन क्या ऐसा होता है? नहीं, बिलकुल भी नहीं! हॉस्पिटल में अपनों की देख-रेख और उनकी सहूलियत के चक्कर में हम दूसरों मरीज़ों और उनके रिश्तेदारों के बारे में भूल जाते हैं. लाईन तोड़ते हैं, चिल्लाते हैं और इंतज़ार से बचने के लिए जुगाड़ लगाने की कोशिश करते हैं. Source: canada 2. हेलमेट यातायत पुलिस से बचने के लिए ज़्यादातर लोग हेलमेट लगाते हैं. चालान न हो, इसके लिए कैसा भी सस्ता हेलमेट खरीद लेते हैं. भाई साहब! हेलमेट हमारी सुरक्षा के लिए होता है. हममें से ज़रूर कुछ लोगों ने अपनों को खोया होगा, इस छोटी सी गलती की वजह से. तो इस बार हेलमेट खरीदि...

भारतीय रेल का अजब खेल!, दो महीनों में सिर्फ़ एक बार होती कंबलों की सफ़ाई

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रेल बजट 2016 की घोषणा की जा चुकी है. कई वायदों को पूरा भी किया जा चुका है, कई नई सुपरफास्ट, सेमी बुलेट, बुलेट ट्रेनों की घोषणाएं हो चुकी है. यात्रियों की सुलभता के लिए ट्रेन में उत्तम भोजन, फ्री वाई-फाई, एफएम , एलसीडी जैसी सुविधाओं की व्यवस्था भी की जा चुकी है. लेकिन... बात जब साफ़-सफाई की आ है तो भारतीय रेल 10 साल पीछे चली जाती है. आइए, आपको एक ऐसी जानकारी से रूबरू करवाते हैं जिसे जान कर आप भी कहेंगे- प्रभु कुछ तो करो! वैसे तो भारतीय रेलों में साफ-सफाई के लिए ख़ास इंतजाम किया गया है, इसके लिए अलग से व्यवस्था भी की गई है. लेकिन ट्रेनों में रेल यात्रियों को मिलने वाले चादरों, तकियों और कंबलों से बदबू आने की शिकायत निरंतर आती रहती है. इस पर ना तो सरकार अभी तक कुछ कह रही है और ना ही रेलवे बोर्ड. तकिए के खोल की सफाई रोज होती है रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के अनुसार चादरों, तकियों के खोलों की सफ़ाई प्रतिदिन होती है. इसके लिए एक संस्था है, जो तत्परता के साथ काम करती है. दो महीने में एक बार कंबल की धुलाई होती है संसद में प्रश्न का जवाब देते हुए रेल राज्यमंत्री मनोज स...

इंजीनियरिंग छोड़ कर इन दोनों दोस्तों ने खोली चाय की दुकान, आज करोड़ों कमा रहे हैं

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भाई एक कप चाय देना...अरे नहीं, तीन कप कर देना यार!' चाय की दुकान में घुसते ही हम कुछ इसी तरह से ऑर्डर देते हैं. देखा जाए तो भारत की 90 फीसदी जनता चाय पीती है. इस कारण यहां हर मोड़ पर, हर गली में, हर चौराहे पर चाय की दुकान मिलजाएगी. सड़क पर मिलने वाली ज़्यादातर चाय की दुकानें, किसी न किसी मजबूरी में खुली होती हैं. बेरोजगारी का आलम ऐसा है कि लोग ज़िंदगी जीने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. लेकिन कुछ ऐसे नौजवान हैं, जो इंजीनियरिंग के पेशे को छोड़ कर चाय की दुकान चला रहे हैं और लाखों कमा भी रहे हैं. इनकी कहानी सुन कर आप भी इनसे ज़रूर प्रेरित होंगे.   इंजीनियर से 'चायवाला' बने दो दोस्त अभिनव टंडन और प्रमीत शर्मा यूपी के रहने वाले हैं. आस-पास के लोग इन्हें कभी इंजीनियर साहब बुलाया करते थे, लेकिन आज 'चायवाला' कहते हैं. अपनी नौकरी छोड़ इन दोनों ने चाय की दुकान खोली, जो काफ़ी सफ़ल रही. चाय की होम डिलीवरी करते हैं इंजीनियर्स का दिमाग वास्तव में ख़तरनाक होता है. ये बात इन दोनों युवाओं ने साबित भी कर दी. चाय की होम डिलीवरी कर लोगों को अपना दीवाना ...

10 ऐसे बड़े झूठ जिन्होंने पूरे इंडिया को बेवक़ूफ़ बना दिया

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कहा जाता है कि जंगल की आग से भी तेज़ कोई चीज़ फैलती है तो वो चीज़ अफवाह होती है. और जो बिना किसी सहारे के ही सैकड़ों, हज़ारों मीलों का सफ़र तय कर लेती है. हम हर रोज कोई न कोई नयी ख़बर सुनते हैं, जिनमें से कुछ सच और कुछ झूठ भी हुआ करती हैं. इससे जुड़ी ही एक बहुत पुरानी कहावत है जो हिटलर के प्रचार मंत्री ‘गोएबल्स’ से जुड़ती हैं. गोएबल्स कहता था कि किसी भी झूठ को 100 बार यदि जोर-जोर से बोला जाए तो वह अंतत: सच लगने लगता है. तो पेश हैं इंडिया के वे 10 ऐसे झूठ जिन्हें हम अब तक सच मानते रहे हैं. 1. 1960 रोम ओलम्पिक्स के 400 मीटर रेस के दौरान मिल्खा सिंह ने पीछे मुड़ कर देखा “फ्लाइंग सिक्ख” के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर, मिल्खा सिंह 1960 के रोम ओलम्पिक्स के 400 मीटर रेस में कभी भी सबसे आगे नहीं थे. और न ही उन्होंने उस रेस में कभी पीछे मुड़ कर देखा था. वे इस रेस में पांचवे नंबर पर थे और काफ़ी मेहनत-मशक्कत के बाद चौथा स्थान हासिल कर सके थे. Source: merepix 2. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु विमान दुर्घटना में हुई थी सन् 1999 में आई मुखर्जी रिपोर्ट बताती...

दुनिया की सबसे बड़ी फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता में चमके भारतीय फ़ोटोग्राफ़र्स

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Source: दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता, Sony World Photography Awards 2016 के लिए एंट्रीज़ शॉर्टलिस्ट हो गयी हैं. इस प्रतियोगिता के लिए 186 देशों से करीब 2,30,000 तस्वीरें भेजी गयी थीं. इस प्रतियोगिता में मुख्यतः 3 कैटेगरीज़ थीं- प्रोफेशनल, ओपन और यूथ. इस शॉर्टलिस्टिंग के बाद अब लोगों की निगाहें हैं उस इंसान पर जिसे मिलेगा 'फ़ोटोग्राफ़र ऑफ़ द ईयर' का ख़िताब और 25,000 डॉलर भी. पहले नज़र डालते हैं उन एंट्रीज़ पर जिन्हें भेजा गया है भारत से... 1. All Souls Day, संघमित्रा सरकार Source: WorldPhoto 2. Bird Hunter, निकुंज राठोड़ Source: WorldPhoto 3. Bryce Amphitheater at Golden Hour, अनसुइया मंडल Source: WorldPhoto 4. Joys of Learning, जयदीप भट्टाचार्य Source: WorldPhoto 5. Gangasagar Fair, अभिजीत बनर्जी Source: WorldPhoto 6. The Silence, प्रकाश सिंह Source: WorldPhoto साथ ही कुछ अंतर्राष्ट्रीय एंट्रीज़ भी हैं जो बहुत ही उम्दा हैं. उन्हें भी देखते हैं... 7. मोहम्मद यूसुफ़, कुवैत Source: Copyright: © Mohammed Yousef 8. एलेग्ज़ेंडर सेमेनोव, ...