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इंजीनियरिंग छोड़ कर इन दोनों दोस्तों ने खोली चाय की दुकान, आज करोड़ों कमा रहे हैं

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भाई एक कप चाय देना...अरे नहीं, तीन कप कर देना यार!' चाय की दुकान में घुसते ही हम कुछ इसी तरह से ऑर्डर देते हैं. देखा जाए तो भारत की 90 फीसदी जनता चाय पीती है. इस कारण यहां हर मोड़ पर, हर गली में, हर चौराहे पर चाय की दुकान मिलजाएगी. सड़क पर मिलने वाली ज़्यादातर चाय की दुकानें, किसी न किसी मजबूरी में खुली होती हैं. बेरोजगारी का आलम ऐसा है कि लोग ज़िंदगी जीने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. लेकिन कुछ ऐसे नौजवान हैं, जो इंजीनियरिंग के पेशे को छोड़ कर चाय की दुकान चला रहे हैं और लाखों कमा भी रहे हैं. इनकी कहानी सुन कर आप भी इनसे ज़रूर प्रेरित होंगे.   इंजीनियर से 'चायवाला' बने दो दोस्त अभिनव टंडन और प्रमीत शर्मा यूपी के रहने वाले हैं. आस-पास के लोग इन्हें कभी इंजीनियर साहब बुलाया करते थे, लेकिन आज 'चायवाला' कहते हैं. अपनी नौकरी छोड़ इन दोनों ने चाय की दुकान खोली, जो काफ़ी सफ़ल रही. चाय की होम डिलीवरी करते हैं इंजीनियर्स का दिमाग वास्तव में ख़तरनाक होता है. ये बात इन दोनों युवाओं ने साबित भी कर दी. चाय की होम डिलीवरी कर लोगों को अपना दीवाना ...

दुनिया की सबसे बड़ी फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता में चमके भारतीय फ़ोटोग्राफ़र्स

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Source: दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता, Sony World Photography Awards 2016 के लिए एंट्रीज़ शॉर्टलिस्ट हो गयी हैं. इस प्रतियोगिता के लिए 186 देशों से करीब 2,30,000 तस्वीरें भेजी गयी थीं. इस प्रतियोगिता में मुख्यतः 3 कैटेगरीज़ थीं- प्रोफेशनल, ओपन और यूथ. इस शॉर्टलिस्टिंग के बाद अब लोगों की निगाहें हैं उस इंसान पर जिसे मिलेगा 'फ़ोटोग्राफ़र ऑफ़ द ईयर' का ख़िताब और 25,000 डॉलर भी. पहले नज़र डालते हैं उन एंट्रीज़ पर जिन्हें भेजा गया है भारत से... 1. All Souls Day, संघमित्रा सरकार Source: WorldPhoto 2. Bird Hunter, निकुंज राठोड़ Source: WorldPhoto 3. Bryce Amphitheater at Golden Hour, अनसुइया मंडल Source: WorldPhoto 4. Joys of Learning, जयदीप भट्टाचार्य Source: WorldPhoto 5. Gangasagar Fair, अभिजीत बनर्जी Source: WorldPhoto 6. The Silence, प्रकाश सिंह Source: WorldPhoto साथ ही कुछ अंतर्राष्ट्रीय एंट्रीज़ भी हैं जो बहुत ही उम्दा हैं. उन्हें भी देखते हैं... 7. मोहम्मद यूसुफ़, कुवैत Source: Copyright: © Mohammed Yousef 8. एलेग्ज़ेंडर सेमेनोव, ...

इनकी कौम इस्लाम है, ईमान पाक है, हाथों में तिरंगा है, और होंठों पर अपने मुल्क के लिए दुआ है!

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मुझे तन चाहिए , ना धन चाहिए बस अमन से भरा यह वतन चाहिए जब तक ज़िन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए और जब मरूं तो तिरंगा कफ़न चाहिए  (अज्ञात) भारत में रहने वाले सभी देशवासियों की ख़्वाहिश कुछ इसी तरह की है. देश में बहुत से ऐसे लोग हैं जो ज़रूरत पड़ने पर देश के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं और किसी की जान ले भी सकते हैं. इस आर्टिकल को लिखने का मक़सद आपको अहसास करवाना है कि देश में रहने वाले सभी धर्म, संप्रदाय, समुदाय, समाज के लोग अपने देश से मोहब्बत करते हैं. लेकिन कई मौकों पर हम उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाते रहते हैं. हम ख़ुद ही तय कर लेते हैं कि कौन सबसे बड़ा देशभक्त है और कौन गद्दार? हमारा देश लोकतांत्रिक है, और यहां रह रहे सभी लोगों को समान अधिकार दिया गया है. उम्मीद है कि इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपकी सोच में थोड़ा बदलाव ज़रूर आएगा. जब फहराया था मक्का में तिरंगा इनकी कौम इस्लाम है, इनका ईमान पाक है, हाथों में तिरंगा है और होंठों पर देशवासियों के लिए दुआ है. इन्होंने अपने प्रयास से देश का नाम रौशन किया. विश्व के पवित्र शहर मक्का में शान से तिरंगा फहरा कर साबित कर ...

ये हैं फ्लाइट अटेंडेंट बनने से पहले नीरजा भनोट की कुछ दुर्लभ तस्वीरें

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अभी हाल ही में रिलीज़ हुई सोनम कपूर की फ़िल्म 'नीरजा' की हर कोई प्रशंसा कर रहा है. ये कहानी थी फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट की जिन्होंने Pam Am एयरलाइन में फंसे यात्रियों को आतंकवादियों से बचाया. ऐसा करते हुए उनकी जान भी चली गयी, मरणोपरांत अशोक चक्र से नवाज़ी गईं नीरजा भनोट सबसे कम उम्र की भारतीय थीं. फ्लाइट अटेंडेंट के साथ-साथ नीरजा ने कई टीवी कमर्शियल और Ads में काम किया था. आपने बचपन में नीरजा को कई विज्ञापनों में ज़रूर देखा होगा, लेकिन याद नहीं होगा. ये हैं उस समय की तस्वीरें:                                     और ये है अमूल चॉकलेट का वो Ad जिसमें नीरजा थी. इस वीडियो को अभी अमूल इंडिया ने शेयर किया है.    Neerja Bhanot in #Amul #Chocolate Ad in the 80's. #Neerja #NeerjaBhanot pic.twitter.com/dreQzgOc8J — Amul.coop (@Amul_Coop) February 20, 2016 Source: Twitter    

इन अपराधियों के बच्चों ने अच्छी पढ़ाई कर के बदल दी हैं लोगों की धारणायें

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एक रवायत रही है कई समय से, कि डॉक्टर का बेटा डॉक्टर ही बन सकता है, एक इंजीनियर का बेटा या तो प्रशासनिक अधिकारी बनेगा या फ़िर उसी की मानिंद इंजीनियर बनेगा, लेकिन हाल ही में ससंद हमले के दोषी अफज़ल गुरू के बच्चे ने अच्छे अंकों से परीक्षा पास करके इस भ्रम को और लोगों की फूहड़ मान्यता को तोड़ने का काम किया है. हम में से अधिकतर लोग अपना समय दूसरों के बारे में सोचने में बर्बाद करते हैं लेकिन जो 'कुछ करने वाले' होते हैं वो अपने काम को बिना किसी परवाह के करते चले जाते हैं. आतंकवादियों के बारे में यही धारणा रही है कि वो बहुत ही निर्मम होते हैं. ये जानने की कभी किसी की इच्छा ही नहीं होती कि उनका भी एक परिवार होता है, उनके दिलों में भी भावनाएं होती हैं. ये मानना एक टकसाली (स्टिरियोटाइप) बात ही है कि एक आतंकवादी का बेटा भी उसी राह पर चलेगा, जिस पर उसकी उम्र तमाम हुई है. इस लेख में हम आपको ऐसे बच्चों के बारे में बतायेंगे जिनके घर में से कोई न कोई संगीन अपराध से जुड़ा रहा है, पर इन्होंने उस राह को ना थामकर एक मिसाल पैदा की है. नालिनी मुरुगन की बेटी राजीव गांधी की हत...

पहलवानी में 'गामा' का कोई सानी नहीं था. ब्रूस ली भी इन्हें मानते थे अपना गुरु

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हो सकता है कि 'अपराजय ' शब्द गामा पहलवान के लिए ही बना हो. इसका अर्थ होता है कभी नहीं हारने वाला. गामा पहलवान दुनिया के ऐसे पहलवान थे, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में कभी कोई कुश्ती नहीं हारी. जहां भी गए विजेता बने, उनकी इसी बात से ब्रुस ली भी काफ़ी प्रभावित हुए थे और इम्प्रेस होकर बॉडी बनाना सीखा. गामा पहलवान विश्व विजेता थे, जहां जाते अपनी कुश्ती की छाप ज़रूर छोड़ कर आ जाते. आइए आज गामा पहलवान के बारे में आपको बताते हैं. कौन हैं गामा पहलवान? पंजाब के अमृतसर शहर में मशहूर पहलवान मोहम्मद अजीज के घर 1878 में गुलाम मोहम्मद का जन्म हुआ था. प्यार से लोग उन्हें 'गामा' कह कर बुलाते थे. पिता की देख-रेख में गामा पहलवानी करने लगे. 10 साल की उम्र में की पहलवानी जोधपुर में पहलवानी की प्रतियोगिता हुई जिसमें देश भर से हज़ारों पहलवान भाग लेने पहुंचे थे. इस प्रतियोगिता में गामा पहलवान ने भी भाग लिया. 10 साल की उम्र में उन्होंने अपनी कुश्ती से लोगों के दिलों में जगह बना ली. ख़ूब खाते थे और कसरत करते थे गामा पहलवान की ख़ासियत थी कि वे प्रतिदिन व्यायाम करते थे...