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माउंट आबू में है दुनिया का इकलौता मंदिर जहां होती है शिव के अंगूठे की पूजा

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Source: हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान शिव एकलौते ऐसे भगवान है जिनके लिंग की पूजा को सर्वोपरी समझा जाता है. पर आज हम आपको भगवान शिव के एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां लिंग को पूजने की बजाये उनके अंगूठे को पूजा जाता है. राजस्थान का माउंट आबू कई जैन मंदिरों के अलावा भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिरों का घर भी है. source:  makemy  माउंट आबू के बारे में लोगों का कहना है कि जैसे बनारस को शिव की नगरी कहा जाता है, वैसे ही माउंट आबू को शिव का उपनगर कहते हैं. इसका उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है. यही से करीब 11 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा की तरफ अचलगढ़ की पहाड़ियों पर किले के पास स्थित है अचलेश्वर माहदेव मंदिर, जहां पर शिव जी के पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है दाहिने पैर के इस अंगूठे पर शिव ने माउंट आबू पहाड़ को थाम रखा है और जिस दिन ये अंगूठे का निशान गायब हो जाएगा तब माउंट आबू का ये पहाड़ भी ख़त्म हो जाएगा. Source: jagran इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही पंच धातु की बनी नंदी की एक विशाल प्रतिमा है, जिसका वजन लगभग चार टन हैं. मंदिर के गर्भगृह पह...

विश्व की 12 अनोखी जगहें हैं इस बात का सबूत कि हिन्दू सभ्यता यहां सदियों पहले भी मौजूद थी

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हिन्दू धर्म में मंदिरों का बड़ा ही महत्व है, इन मंदिरों में लोग अपने-अपने देवताओं की उपासना करते हैं. पर ऐसा नहीं है कि ये मंदिर केवल भारत, नेपाल आदि तक ही फैले हैं, बल्कि देश के बाहर भी इन मंदिरों का इतिहास फैला हुआ है. किसी समय हिन्दू धर्म ने अपनी जड़ें यूरोप से लेकर एशिया तक फ़ैला रखी थी, जिसके प्रमाण आज भी मिलते हैं. आज हम आपको विश्व की ऐसी ही जगहों के बारे में बता रहे हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि यहां कभी हिन्दू मंदिर हुआ करते थे. 1. वेटिकेन में कभी शिव मंदिर हुआ करता था? सभी धर्म एक ही धर्म का हिस्सा हैं, जिसका प्रमुख वैदिक धर्म है. इतिहासकार पी.एन.ओक इसे समझाते हुए कहते है कि वेटिकेन शब्द संस्कृत के वाटिका से लिया गया है, और "Christianity" शब्द कृष्ण नीति से. और आगे वो कहते हैं कि अब्राहिम भी ब्रह्मा का ही एक विकसित रूप है. उदाहरण के लिए खुद ही इस फोटो को गौर से देखिये जिसमे आपको चर्च का एरिया एक शिव लिंग की तरह नज़र आएगा. 2. क्या वेटिकेन सच में शिव मंदिर था. इन फोटोज़ को देखने पर एक tripod सा नज़र आता है जो की शिव के माथे के ...

भगवान शिव ने अपने खड्ग से काटा था ब्रह्मा का सर, लेकिन क्यों?

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अब बात ज़रा आगे बढ़ाते हैं. कुछ सवाल हैं जिनके जवाब तलाशने होंगे. सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का पांचवा शीश भगवान शिवजी ने क्यों काटा? हम जानते हैं कि धर्मग्रंथों में बहुत से मत मिलते हैं, जिनको तो नहीं जोड़ा जा सकता, लेकिन निषकर्ष निकालने के लिए कई मतों का होना भी ज़रूरी है. भगवान भैरव ने काटा था शीश धर्म ग्रंथों के अनुसार भैरव भगवान शिव का ही एक अवतार हैं. भैरव के स्वभाव में क्रोध है, तामसिक भाव है. इस अवतार का मूल उद्देश्य सारी बुराईयों को समावेश करने के पश्चात भी अपने अंदर धर्म को स्थापित करना है. शिव पुराण में भगवान शंकर के इस रूप के संदर्भ में लिखा गया है कि एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु स्वयं को शकंर जी से श्रेष्ठ मानने लगे थे. इस विषय पर जब साधु-संतों से पूछा गया तो उन्होंने भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु की बात को नकार दिया. उसी वक़्त वहां भगवान शंकर प्रकट हुए और ब्रह्मा जी ने कहा कि “तुम मेरे पुत्र हो चद्रशेखर”, मेरी शरण में आओ. इतनी बात सुनने के बाद भगवान शंकर को क्रोध आ गया और उन्होंने वहीं कालभैरव का रूप धारण कर अपनी उंगली के नाख़ून से ब्रह्मा का स...

जानते हैं, बरसाना के श्रीजी मंदिर में रखा है भगवान श्रीकृष्ण का खज़ाना

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यूं तो पूरे ब्रज की पहचान कान्हा के नाम से है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि बरसाना के श्रीजी मंदिर में उनका खज़ाना है. यहां उनके बेशकीमती हीरे-जवाहरात, सोना-चांदी, कपड़े और खाने-पीने के बर्तन रखे हुए हैं. इस कमरे का ताला पिछले 150 सालों से नहीं खोला गया है. इसलिए ख़ज़ाने को अभी तक किसी ने नहीं देखा है. Source:  Iskcondesiretree इसकी कुल क़ीमत के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है. एक अनुमान है कि इस कमरे में जितना खज़ाना रखा है, उसकी कीमत कई हजार करोड़ रुपए होगी. Source:  Wallconvert.com श्रीजी मंदिर के जानकारों की मानें तो इस कमरे को ख़ास तरीके से बनाया गया है. दान-पात्र के रूप में यहां एक झीरी बनाई गई है, जहां से भक्त दान के रूप में सोना-चांदी वगैरह डाल देते हैं. इस तरह कमरे में खज़ाना जमा होता रहता है. Source:  Harekrishnagroup इस मंदिर का निर्माण राजा टोडरमल ने करवाया था. उन्होंने इसमें एक कोषागार भी बनवाया था. इसके बाद भरतपुर रियासत के राजाओं ने मंदिर में गर्भगृह का निर्माण करवाया. इस दौरान उन्होंने यहां हीरे-जवाहरात रखवा दिए थे. इस कमरे में ...

धौलपुर का ये शिवलिंग दिन में तीन बार बदलता है रंग

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धर्म हमारे देश का एक ऐसा मुद्दा है, जिसमें ऐरा-गैरा नत्थूखेरा भी अपने आप को विद्वान समझता है. अपनी ज़िंदगी में चल रही दिक्कतों के बारे चाहे कोई अनजान हो, लेकिन वो तमाम ईश्वरों को किन-किन दिक्कतों का सामना करना पड़ा था, वो सब जान होगा. बसों से लेकर रेल में सफ़र करने पर आपको राजनीति और धर्म की बातें करने वाले बहुत मिलेंगे. ऐसे कथित बुद्धिजीवि समाज में केवल इसीलिए हैं, क्योंकि धर्म को हमारे यहां एक व्याप्क नज़र से देखा जाता है. भारत में अलग-अलग मान्यताएं हैं नहीं बल्कि इन्हीं कथित बुद्धिजीवियों द्वारा अपने ख्याली दिमाग से बनाई गई हैं. हो सकता है लेखक का भी ये विचार मात्र एक ख्याली पुलाव ही हो. लेकिन राजस्थान के धौलपुर से आ रही ये खबर सच है कि वहां एक शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है. धौलपुर के पास है शिवलिंग राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर बसा है धौलपुर. यहां से चंबल की घाटी पास में ही है. अचलेश्वर महादेव नाम से यहां एक शिवलिंग है. इस शिवलिंग की लोग इस वजह से पूजा करने लगे क्योंकि सुबह, दोपहर और शाम को इसका रंग अपने आप बदल जाता है. Source:  dholpuronline...

क्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िए

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क्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िए

शरीर पर 'राम' का नाम टैटू करवा कर जातीय भेदभाव को सालों से चुनौती दे रहे हैं रामनामी

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छत्तीसगढ़ भारत के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक है. यहां जातीय भेदभाव की घटनाएं आये दिन सुनने को मिलती हैं, लेकिन एक संप्रदाय के लोग करीब 100 सालों से इस भेदभाव के खिलाफ़ लड़ते आ रहे हैं. और इनका विरोध का तरीका बहुत ही अनूठा है. मैं बात कर रहा हूं छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की, जो अपने पूरे शरीर पर राम के नाम का टैटू बनवा कर सदा के लिए भगवान श्री राम के अनुयायी बन जाते हैं.

भारत के 10 ऐसे मन्दिर जिनके अजीबों-गरीब रस्मों-रिवाज श्रृध्दालुओं को अपनी ओर खींच लाते हैं

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हमारे देश को आस्था व संस्कृति के लिये पूरे विश्व में जाना जाता है, यहां हर धर्मों के लोग अपनी आस्था के हिसाब से अपने-अपने ईश्वर को याद करते हैं. जहां हिंदू लोग मन्दिर जाते हैं वहीं मुस्लिम लोग मस्जिद में जाकर अपना सज़दा करते हैं. लेकिन हमारे यहां और भी ऐसे अनूठे मन्दिर व तरीके हैं, जिसके माध्यम से लोग अपने ईश्वर को याद करके अपनी मन्नतें मांगते हैं.

एक ऐसी ऐतिहासिक जगह जहां नदी से निकलते हैं शिवलिंग

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हमारे भारत में धर्म को बहुतेरे लोग मानते हैं. आस्था का ये पुल सदियों से बरकरार है. सावन के महीने में लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं. कहते हैं कि भगवान शिव सावन के महीने में मस्त-मलंग रहते हैं, वैसे ही उनके भक्तों को रहना चाहिए. आपने भगवान शिव से संबंधी देश भर में 12 शिवलिंगों के बारे में सुना होगा लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहां हैं हज़ारों शिवलिंग.

>> कितनी बातें जानते हैं आप भारत के अनूठे कामाख्या मंदिर के बारे में?

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कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर से 7 किलोमीटर दूर कामाख्या मे है. कामाख्या से भी 10 किलोमीटर दूर नीलाचंल पर्वत पर स्थित है. यह मंदिर शक्ति की देवी सती का है और इसका तांत्रिक महत्व भी है. हम इस मंदिर में पूजा करने तो जाते हैं लेकिन यहां के बारे में कई ऐसी बाते हैं, जिनसे हम आज तक अंजान हैं. आईए आपको उन तथ्यों से रूबरू करवाते हैं.

>> ये 7 तथ्य बताते हैं कि पवनसुत हनुमान का वास कलयुग में भी है

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रामायण सहित वैदिक काल की कहानियों में ऐसा ज़िक्र मिलता है कि हनुमान को भगवान राम द्वारा अमरत्व का वरदान दिया गया था. आज हम आपको कुछ ऐसे तथ्यों के बारे में बता रहे हैं, जिनके अनुसार कलयुग में भी राम भक्त हनुमान हम सब के बीच मौजूद हैं.

>> क्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िए

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क्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िएक्या आप भारत के इन सबसे अमीर मंदिरों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो यहां पढ़िए

>> ऑस्ट्रेलिया में 5 सालों से चल रहे दुर्गा मंदिर का निर्माण कार्य हुआ पूरा

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ऑस्ट्रेलिया में हिन्दुओं की बढ़ती आबादी को देखते हुए यहां एक दुर्गा मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। यह दुर्गा मंदिर ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के रॉकबैक उपनगर में बनाया गया है। यह मंदिर ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। इस मंदिर के निर्माण का कार्य पिछले 5 साल से चल रहा था जो अब जा कर पूरा हो गया है। सुनने में आया है कि 30 नवंबर को इस मंदिर के कपाट हमेशा के लिए खोल दिए जाएंगे।

>> श्री राम ने किया था पाकिस्तान के दो शहरों का निर्माण

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आप सब जानते हैं कि हमारे देश का इतिहास बहुत ही पौराणिक होने के साथ-साथ काफी विशाल भी रहा है। इतिहास के पन्ने यदि खोले जाएं तो यह पता चलता है कि हमारे देश का विस्तार बहुत दूर-दूर तक था। बहुत से युद्ध लड़े गए और बहुत से नए राज्य व शहरों का निर्माण किया गया। इसी कड़ी में श्री राम के समय की भी एक घटना का वर्णन मिलता है, जिसमें दो नए शहरों के निर्माण का जिक्र आता है।

>> ये 10 प्रमाण बताते हैं कि शिव की पूजा सिर्फ़ भारत में ही नहीं, आदि काल से पूरी दुनिया में होती आई है

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हिन्दु धर्म में भगवान शिव का सबसे बड़ा स्थान है. इन्हें कई नामों से लोग पुकारते हैं. कोई इन्हें भोले नाथ कहता है, तो कोई देवों के देव महादेव कहता है. शिव एक ऐसे भगवान हैं जिनके लिंग की भी पूजा की जाती है और इसे सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पूजा जाता है. दुनिया के अलग-अलग हिस्सो में मिलने वाले शिव लिंग इस बात को प्रमाणित भी करते हैं.

>> 15 ऐसी धांसू बातें जो बनारस को दुनिया का सबसे 'अद्भुतास' शहर साबित करती हैं...

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“बनारस” हां रजा बनारस. इस एक शब्द में ही इतनी आत्मीयता और मिठास है कि उसके बाद कुछ कहने को नहीं रह जाता. बनारस जिसे अलग-अलग समय पर बेनारस, वाराणसी और काशी के अलावा कई नामों से पुकारा जाता रहा मगर इस सभी के बीच जिसने उसकी आत्मा और स्व को बचाये रखा. जिसने उसकी अल्हड़ता और खिलंदड़पने से कोई समझौता नहीं किया. जहां गालियों का कोई बुरा नहीं मानता बल्कि उन्हें अभिवादन माना जाता है.

>> भारत के देवी-देवताओं को जापानी भी पूजते हैं. विश्वास न हो तो ये तस्वीरें देखिए

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जापान और भारत में काफ़ी असमानताएं हैं. भौगोलिक रूप से, राजनीतिक रूप से, आर्थिक रूप से और भाषाई रूप से ये दोनो देश एक-दूसरे से बहुत ही अलग हैं. लेकिन एक बात कम ही लोगों को मालूम होगी कि जापान में कई हिन्दू देवी-देवताओं जैसे ब्रह्मा, गणेश, गरुड़, वायु, वरुण आदि की पूजा आज भी की जाती है. भारतीय सभ्यता के रंग जापान में देखने को मिलते हैं. हाल में ही फ़ोटोग्राफ़र बेनोय के. बहल के फोटोग्राफ़्स की एक प्रदर्शनी दिल्ली में हुई थी, जिसमें जापानी देवी-देवताओं की झलक दिखती है. बेनोय कहते हैं कि जापानी देवी-देवता बिल्कुल भारतीय देवी-देवता की तरह दिखते हैं...तो हम चाहेंगे कि आप भी इन तस्वीरों को देखें.

>> आस्था का महापर्व 'छठ' क्यों हैं हिन्दुस्तानियों के दिल के करीब...

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छठ पर्व वैसे तो एक ऐसा त्यौहार है जो मुख्यत: बिहार प्रदेश और उत्तर प्रदेश के भोजपुरी बोले जाने वाले इलाके में प्रचलित है. मगर जैसे-जैसे भोजपुरी-मैथिला-वज्जिका बोलने वाले और बिहार, उत्तर प्रदेश के लोग दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचने लगे वैसे-वैसे यह आस्था का महापर्व भी देशों की सीमाएं लांघ कर आज एक वैश्विक त्यौहार

>> यहां पूजे जाते हैं दिवाली पर कुत्ते।

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पड़ोसी देश नेपाल में वैसे बहुत सी प्रथाओं और त्योहारों को हमारे ही देश के मुताबिक ही मनाया जाता है। इसका कारण दोनों देशों का पास में होना और दोनों के वातावरण में समानता होना है। लेकिन नेपाल में बहुत ही ऐसी प्रथाए हैं, जिनको जानकार आप आश्चर्य में पड़ जाएंगे। ऐसी ही एक “कुकुर पूजा” नाम की प्रथा के बारे में हम आपको यहां जानकारी दे रहे हैं।

>> जानिये ऐसी 20 बातें जो बताती हैं कि हमारी संस्कृति विज्ञान से जुड़ी है

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ऐसी बहुत सी चीजें है जो हम सदियों से करते चले आ रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हाथ जोड़ कर नमस्कार करना, बड़ों के पैर छूना, मंदिर की घंटी बजाना, आदि हम सिर्फ संस्कृति के हिसाब से ही नहीं करते, बल्कि इनके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं. तो आइये जानें इन रीति-रिवाजों से जुड़े कुछ ऐसे वैज्ञानिक कारण जो आपको हैरान कर देंगे.