
केरेला
के मल्लापुरम की वलियांगाड़ी जुमाम मस्जिद तीन शताब्दियों से क़ौमी एकता का
स्तंभ बन कर खड़ी हुई है. यहां की एक लोक कथा के अनुसार 290 साल पहले
कोहज़ीकोड़े के एक मंत्री के साथ युद्ध में कुनहेलु की मृत्यु हो गयी थी और
उनको वलियांगाड़ी जुमाम मस्जिद में दफ़नाया गया था. आज तक कुनहेलु को स्थानीय
हीरो के रूप में देखा जाता है और उनके लिए दुआएं पढ़ी जाती हैं.
इस लोक कथा में बताया गया है कि उस युद्ध में 44 सैनिकों की मृत्यु हुई
थी, जिसमें से 'ठट्टन' समुदाय के सिर्फ़ कुनहेलु थे जो 43 मुसलमान के साथ
लड़े थे.
मंत्री वरक्कल पारा नंबी ने टैक्स के विवाद के चलते इस मस्जिद में आग
लगा दी थी जिसके बाद इस क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिम परिवार गांव छोड़ कर
चले गए थे. लेकिन आखिरकार, ये मसला हल हो गया और नंबी ने मस्जिद फिर से
बनवायी और मुस्लिम परिवारों को वापस बुला लिया.
Source: TOI
सालों से इस मस्जिद में कुनहेलु के वंशजों को बुलाया जा रहा है और
कुनहेलु की याद में कलमें पढ़े जाते हैं. मल्लापुरम के क़ाज़ी का कहना है कि
ये प्रथा हिन्दू-मुस्लिम एकता को दर्शाती है.
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