>> केरेला की ये मस्जिद करती है 18वीं शताब्दी के हिन्दू योद्धा का सम्मान

केरेला के मल्लापुरम की वलियांगाड़ी जुमाम मस्जिद तीन शताब्दियों से क़ौमी एकता का स्तंभ बन कर खड़ी हुई है. यहां की एक लोक कथा के अनुसार 290 साल पहले कोहज़ीकोड़े के एक मंत्री के साथ युद्ध में कुनहेलु की मृत्यु हो गयी थी और उनको वलियांगाड़ी जुमाम मस्जिद में दफ़नाया गया था. आज तक कुनहेलु को स्थानीय हीरो के रूप में देखा जाता है और उनके लिए दुआएं पढ़ी जाती हैं.



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इस लोक कथा में बताया गया है कि उस युद्ध में 44 सैनिकों की मृत्यु हुई थी, जिसमें से 'ठट्टन' समुदाय के सिर्फ़ कुनहेलु थे जो 43 मुसलमान के साथ लड़े थे.

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मंत्री वरक्कल पारा नंबी ने टैक्स के विवाद के चलते इस मस्जिद में आग लगा दी थी जिसके बाद इस क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिम परिवार गांव छोड़ कर चले गए थे. लेकिन आखिरकार, ये मसला हल हो गया और नंबी ने मस्जिद फिर से बनवायी और मुस्लिम परिवारों को वापस बुला लिया.

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सालों से इस मस्जिद में कुनहेलु के वंशजों को बुलाया जा रहा है और कुनहेलु की याद में कलमें पढ़े जाते हैं. मल्लापुरम के क़ाज़ी का कहना है कि ये प्रथा हिन्दू-मुस्लिम एकता को दर्शाती है.

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