>> दिल्ली कैबिनेट द्वारा पेश किए गए ‘जनलोकपाल बिल’ की 6 बातें जो हर किसी को जाननी चाहिए

दिल्ली कैबिनेट ने बीते बुधवार को जनलोकपाल बिल पास कर दिया है. ज्ञात हो कि जब से दिल्ली में आम आदमी पार्टी नीत दिल्ली सरकार बनी है तब से ही जनलोकपाल बिल को पास न करने की वजह से उनकी काफ़ी आलोचना हुई, लेकिन उनके इस कदम से आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को ख़ासी राहत मिली है.

अब जब कि यह बिल अगले सप्ताह विधान सभा के पटल पर रखा जाएगा, आइए आपको रूबरू कराते हैं इस विवादास्पद कानून के भीतर की छह प्रमुख बातों से...

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इस बिल का प्रमुख मकसद भ्रष्टाचार पर रोक लगाना है, जिसके तहत उन्होंने ‘लोकपाल’ या ओम्बड्समैन का सृजन किया है. लोकपाल शब्द सबसे पहले आम बहस में समाज सेवी अन्ना हजारे द्वारा चलाए इंडिया अगेन्सट करप्शन के आंदोलन की वजह से आया था.
यह बिल लोकपाल को पूरी ताकत देता है कि वह सारी केन्द्रीय एजेंसियों की निगरानी कर सके, इसमें केन्द्रीय चांज ब्यूरो (सीबीआई) भी शामिल है. इसके भीतर एक कमेटी भी होगी जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री स्वयं करेंगे, जो सीबीआई के डायरेक्टर को चुनने में अहम् भूमिका निभाते हैं. किसी भी चांच को सीबीआई अधिकारियों से प्रभावित होने से रोकने के लिए यह बिल किसी जांच पड़ताल करने वाले अधिकारी की बदली पर रोक लगाता है.
इस बिल को और धार देने की कोशिश में औचक छापामारी और भ्रष्ट अधिकारियों की सारी प्रॉपर्टी का जब्त किया जाना भी शामिल है. यहां ऐसे मामलों में स्पेशल कोर्ट और शुरुआती जांच की भी बात कही गई है जिसे एक तयशुदा समय के भीतर ही कर लिया जाएगा.

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राज्य के कासी-फेडरलिज्म और विकेंद्रीकरण को ध्यान में रखते हुए, हर राज्य को ऐसी हिदायतें दी गई हैं कि वे साल भर के भीतर ‘लोकायुक्त’ का गठन कर लें.
राज्य का मुख्यमंत्री और ग्रुप 4 के अफ़सर भी लोकपाल की जांच और निगरानी के दायरे में आएंगे. इस बिल में व्हिसिलब्लोअर और गवाहों को विशेष सुरक्षा और संरक्षण प्रदान करने के भी प्रावधान हैं.

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