
आप सब जानते हैं कि हमारे देश का इतिहास बहुत ही पौराणिक होने के
साथ-साथ काफी विशाल भी रहा है। इतिहास के पन्ने यदि खोले जाएं तो यह पता
चलता है कि हमारे देश का विस्तार बहुत दूर-दूर तक था। बहुत से युद्ध लड़े गए
और बहुत से नए राज्य व शहरों का निर्माण किया गया। इसी कड़ी में श्री राम
के समय की भी एक घटना का वर्णन मिलता है, जिसमें दो नए शहरों के निर्माण का
जिक्र आता है।
असल में जब त्रेतायुग में श्री राम रावण का वध करके अयोध्या के राजा बने
तब उनके भाई भरत ने सिंधु नदी के तट पर बसे गन्धर्वों के साथ युद्ध कर
विजय प्राप्त की थी। इस बात के प्रमाण उत्तरकाण्ड के 100वें सर्ग में मिलते
हैं। यदि विस्तार से जानें तो इन सभी युद्धों में भरत के मामा ने विशेष
भूमिका निभाई थी। उनका नाम युधाजित था।
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उत्तरकांड में यह उल्लेख मिलता है कि कालक्रम में श्रीराम ने जब अपनी जीवनलीला समाप्त की तो भरत भी उनके साथ ही स्वधाम चले गए।