>> दिल्ली के आसमान में छाया पंजाब से आया गुबार, नासा ने जारी की तस्वीरें
सेहत के लिए है हानिकारक
दरअसल प्रदूषण का स्तर जहां देश में पहले ही बढ़ता जा रहा है, वहीं फसल के बचे अवशेषों को जलाना लोगों की सेहत के लिए काफ़ी खतरनाक साबित हो सकता है. इस धुएं से कैंसर, अस्थमा और अन्य सांस संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ जाता है.

सरकार ने नहीं उठाये सख़्त कदम
हरियाणा सरकार ने तो हालांकि इससे संबंधी कड़े नियम बना रखे हैं, लेकिन
पंजाब की सरकार अभी लाचार नज़र आ रही है. वहां फसल के अवशेषों को जलाने के
अलावा लोग किसी अन्य विकल्प की ओर ध्यान ही नहीं दे पाते. बाक़ी जिन
प्रदेशों में क़ानून हैं, वहां भी किसानों के अवशेष जलाने के मामले सामने
आते रहते हैं.
हरियाणा,
पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में हर साल फसल कटने के बाद दिल्ली के
आकाश में धुंएं का गुबार छा जाता है. वजह एक ही है, फसल के बाद बचे हुए फूस
(अवशेषों) को किसान जला देते हैं, ताकि कई दिक्कतों से बचाव किया जा सके.
जल्दी-जल्दी फसल बोने के चक्कर में ये सब होता है. हाल ही में जिस तरह से
दिल्ली के आसमान में धुआं छाया हुआ है, उसे देखते हुए नासा (National
Aeronoutics Space Administration) ने कुछ तस्वीरें जारी की हैं.
हरियाणा सरकार ने तो हालांकि इससे संबंधी कड़े नियम बना रखे हैं, लेकिन
पंजाब की सरकार अभी लाचार नज़र आ रही है. वहां फसल के अवशेषों को जलाने के
अलावा लोग किसी अन्य विकल्प की ओर ध्यान ही नहीं दे पाते. बाक़ी जिन
प्रदेशों में क़ानून हैं, वहां भी किसानों के अवशेष जलाने के मामले सामने
आते रहते हैं.
ब्राजील देश में एक परंपरा सदियों से चली आ रही है. यहां माना जाता है
कि फसल के बचे अवशेषों को जलाने से ज़मीन के अत्याधिक उपजाऊ होने की
संभावना होती है. दरअसल तर्क ये है कि आग के बाद कार्बन डाइ आक्साइड ज़मीन
में मिलती है एवं इससे ज़मीन के उपजाऊ होने की एक उम्मीद रहती है.

लेकिन याद रहे, जो किसान हमेशा सबके हित की सोचता है, उसके हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए. पंजाब के आर्थिक हालत प्रत्येक किसान से जुड़े हुए हैं. कहीं न कहीं ये हालात भी अवशेष जलाने के कारण बन जाते हैं. किसानों के लोन नहीं उतर रहे, अगर वो अपनी ज़मीन को 2-3 महीने तक सिर्फ़ अवशेषों के गलने के लिए रखेंगे तो कर्ज बढ़ता जायेगा, मध्यम वर्ग का किसान ब्याज भरते-भरते ही मर जायेगा. बातें करना आसान है, सिर्फ़ किसान को दोष देने से ही मसले हल नहीं होंगे. इसके अन्य कारणों पर भी गौर करना होगा, जो व्यक्तिगत होने के साथ-साथ सामाजिक भी हो सकते हैं.
ब्राजील देश में एक परंपरा सदियों से चली आ रही है. यहां माना जाता है
कि फसल के बचे अवशेषों को जलाने से ज़मीन के अत्याधिक उपजाऊ होने की
संभावना होती है. दरअसल तर्क ये है कि आग के बाद कार्बन डाइ आक्साइड ज़मीन
में मिलती है एवं इससे ज़मीन के उपजाऊ होने की एक उम्मीद रहती है.सेहत के लिए है हानिकारक
दरअसल प्रदूषण का स्तर जहां देश में पहले ही बढ़ता जा रहा है, वहीं फसल के बचे अवशेषों को जलाना लोगों की सेहत के लिए काफ़ी खतरनाक साबित हो सकता है. इस धुएं से कैंसर, अस्थमा और अन्य सांस संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ जाता है.

सरकार ने नहीं उठाये सख़्त कदम
हरियाणा सरकार ने तो हालांकि इससे संबंधी कड़े नियम बना रखे हैं, लेकिन
पंजाब की सरकार अभी लाचार नज़र आ रही है. वहां फसल के अवशेषों को जलाने के
अलावा लोग किसी अन्य विकल्प की ओर ध्यान ही नहीं दे पाते. बाक़ी जिन
प्रदेशों में क़ानून हैं, वहां भी किसानों के अवशेष जलाने के मामले सामने
आते रहते हैं.

अवशेष जलाने से उपजाऊ होती है ज़मीन
ब्राजील देश में एक परंपरा सदियों से चली आ रही है. यहां माना जाता है
कि फसल के बचे अवशेषों को जलाने से ज़मीन के अत्याधिक उपजाऊ होने की
संभावना होती है. दरअसल तर्क ये है कि आग के बाद कार्बन डाइ आक्साइड ज़मीन
में मिलती है एवं इससे ज़मीन के उपजाऊ होने की एक उम्मीद रहती है.लेकिन याद रहे, जो किसान हमेशा सबके हित की सोचता है, उसके हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए. पंजाब के आर्थिक हालत प्रत्येक किसान से जुड़े हुए हैं. कहीं न कहीं ये हालात भी अवशेष जलाने के कारण बन जाते हैं. किसानों के लोन नहीं उतर रहे, अगर वो अपनी ज़मीन को 2-3 महीने तक सिर्फ़ अवशेषों के गलने के लिए रखेंगे तो कर्ज बढ़ता जायेगा, मध्यम वर्ग का किसान ब्याज भरते-भरते ही मर जायेगा. बातें करना आसान है, सिर्फ़ किसान को दोष देने से ही मसले हल नहीं होंगे. इसके अन्य कारणों पर भी गौर करना होगा, जो व्यक्तिगत होने के साथ-साथ सामाजिक भी हो सकते हैं.
Source: punjabkesari
लेकिन याद रहे, जो किसान हमेशा सबके हित की सोचता है, उसके हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए. पंजाब के आर्थिक हालत प्रत्येक किसान से जुड़े हुए हैं. कहीं न कहीं ये हालात भी अवशेष जलाने के कारण बन जाते हैं. किसानों के लोन नहीं उतर रहे, अगर वो अपनी ज़मीन को 2-3 महीने तक सिर्फ़ अवशेषों के गलने के लिए रखेंगे तो कर्ज बढ़ता जायेगा, मध्यम वर्ग का किसान ब्याज भरते-भरते ही मर जायेगा. बातें करना आसान है, सिर्फ़ किसान को दोष देने से ही मसले हल नहीं होंगे. इसके अन्य कारणों पर भी गौर करना होगा, जो व्यक्तिगत होने के साथ-साथ सामाजिक भी हो सकते हैं.