>> 15 ऐसे लोग जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में अपना सब कुछ खोया और हम इन्हें जानते भी नहीं

आज हम अपनी मन-मर्जी से कहीं भी आ-जा सकते हैं, जो चाहे वो कर सकते हैं. क्योंकि आज हम आज़ाद है और इस आज़ादी को पाने के लिए वीरों ने अपने बलिदान की आहुति दी है. पर जब स्वतन्त्रता सेनानियों के नाम बताने की बारी आती है तो हम केवल गिने-चुने नाम ही बता पाते हैं. जबकि हकीकत हम सब जानते हैं कि आज़ादी सिर्फ़ कुछ लोगों के बलिदान से ही नहीं मिली बल्कि इसके लिए बहुत लोगों ने इस मिट्टी को अपने खून से सींचा, जिनमें से बहुत तो गुमनामी की गलियों में खो चुके हैं.
हम आपको ऐसे ही सवतन्त्रता सेनानियों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन आज भूले जा चुके हैं.


1. कनैयालाल मनेकलाल मुंशी

भारत छोड़ो आन्दोलन से जुड़ने वाले कनैयालाल कई बार अंग्रेजी शासन के खिलाफ़ आवाज़ उठाने के आरोप में गिरफ्तार किये जा चुके थे और अंग्रेजो के जुल्मों का शिकार हुए पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हर बार दुगनी ताकत के साथ दुबारा अंग्रेजों से मुकाबला किया.

Source: highcourt

2. मतंगिनी हजरा

असहयोग आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली और भारत छोड़ो आन्दोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने लेने वाली मतंगिनी का खौफ अंग्रेजों में इस कदर छा गया था कि उन्होंने मतंगिनी को गोली मरवा दी.

Source: adaring

3. वीर विनायक दामोदर सावरकर

आज़ादी की लड़ाई को अपनी कलम से लड़ने वाले दामोदर को आज भले ही राजनैतिक फ़ायदे के लिए भुनाने की कोशिश की जा रही हो, पर दामोदर ने न सिर्फ़ आज़ादी की लड़ाई लड़ी बल्कि हिन्दू धर्म में जाति व्यवस्था के खिलाफ़ भी आवाज़ बुलंद की.

Source: savarkar

4. पीर अली खान

1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों की नाक में दम कर देने वाले पीर उन बागियों में से थे, जिन्होंने अंग्रेजो की गुलामी को नहीं स्वीकारा था. और अंग्रेजों के खिलाफ़ हथियार उठाया था.

5. कमला देवी चट्टोपाध्याय

समाज सुधारक कमला ये बात अच्छी तरह से जानती थीं कि अगर भारतीयों का जीवन स्तर सुधरना है तो उनका आज़ाद होना ज़रूरी है. इसीलिए वो अपना सब कुछ छोड़ कर आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़ी.

6. तिरुपुर कुमारन

देश बंधु यूथ एसोसिएशन की स्थापना करने वाले तिरुपुर मरते दम तक तिरंगा अपने हाथों में थामे रहे थे, जब वे अंग्रेजी शासन के खिलाफ़ एक मार्च में हिस्सा लेते वक्त लाठी चार्ज में शहीद हो गये थे.

7. डॉ.लक्ष्मी सहगल

सुभाष चंद्र बोस के साथ इंडियन नेशनल आर्मी का हिस्सा बनी लक्ष्मी ने अंग्रेजो के दांत खट्टे करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, और आज़ादी की मुहीम में हजारों लोगो को अपने साथ जोड़ा.

8. गरिमेल्ला सत्यनारायण

अपने गीतों से लोगो के दिलों में देश प्रेम की भावना जगाने वाले गरिमेल्ला ने लेखन के माध्यम से अंग्रेजों की नींव तक हिला दी थी.

9. तारा रानी श्रीवास्तव

भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान अपने पति को खो देने के बावजूद तारा रानी ने हिम्मत नहीं हारी और तिरंगा लेकर आगे बढ़ती चली गई.

10. अल्लूरी सीता राम राजू

‘Rampa Rebellion’ के नेता सीता राम को 1922-1924 में एक एनकाउंटर में अंग्रेजो ने जंगल मार दिया, क्योंकि सीता राम लोगों के बीच पॉपुलर और अंग्रेजों के लिए खतरा बनते जा रहे थे.

11. N.G. Ranga

गांधी के आदर्शों को मानने वाले रांगा ने किसान आन्दोलन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

12. पोट्टी स्रीरामुल्लू

गांधी के विचारों को फ़ैलाने वाले स्रीरामुल्लू दलितों के बड़े नेता थे और आंध्र प्रदेश में आज़ादी की लड़ाई का बिगुल बजाने का श्रेय इन्हें ही जाता है.

13. Kaneganti Hanumanthu

टैक्स के खिलाफ़ लोगों की आवाज़ बनकर अंग्रेजो की जड़ें हिलाने वाले Hanumanthu कई बार गिरफ्तार हुए और आखिकार 30 साल की उम्र में अंग्रेजो की गोलियों का शिकार हो गये.

14. परबती गिरी

अपने लेखन से अंग्रेजों की सल्तनत हिला देने वाली गिरी ने मदर टेरेसा के साथ भी समाज हित में कार्य किया, पर अंग्रेजों के लिए खतरा बन रहीं. उनकी लेखनी को दबाने के लिए उन्हें 2 साल के कठोर कारावास की सज़ा दे दी गई.

15. अबदी बानो बेगम

अबदी उन मुस्लिम महिलाओं में से थीं जिसने पर्दे से बाहर आकर राजनीति में कदम रखा और अपने भाषणों और तेवरों से अंग्रेजों के खिलाफ़ आग उगली.

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