>> ये तस्वीरें दर्शाती हैं कि आज के मुकाबले 1970 का ईरान काफ़ी लिबरल था

ईरान में साल 1979 में इस्लामिक क्रांति आई थी. शाह का तख्तापलट कर अयातोल्लाह खुमैनी देश के प्रमुख हो गये थे. हर चीज़ का इस्लामिककरण किया जा रहा था. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब शाह ने देखा कि नाज़ियों का पलड़ा लगातार कमज़ोर होता जा रहा है, तो ब्रिटेन और रूस की बातों में शाह हामी भरने लगा. युद्ध ख़त्म होने के साथ ब्रिटेन ने ईरान पर अपना वर्चस्व जमा लिया. उस दौर में ईरान काफ़ी व्यापक सोच का जनक माना जाता था. ऐसी
नौबत न थी कि जब एक फ़िल्म बनाने के लिए जफ़र पनाही जैसे निर्देशक को नज़रबंद कर दिया जाये. आज के मुक़ाबले 1970 का ईरान काफ़ी लिबरल था. महिलाओं के हालात उस दौर में आज से ज़्यादा दुरुस्त थे. ज़रा देखिए ये तस्वीरें...
























लेकिन वर्तमान ईरान ऐसा नहीं है, वो एक रूढ़िवादी विचार से ग्रसित है, एक तानाशाह का पिंजरा है, कुछ मौन चेहरों का देश है आज का ईरान. सवाल उठाने वाले या तो मारे जाते हैं या फ़िर औरों को मार देते हैं. आज ईरान में महिलाओं पर लगातार पाबंदियां लगाई जा रही हैं. इस्लाम की दुहाई दे कर फ़तवे लगाये जा रहे हैं. ईरानी अभिनेत्रियों को आये दिन कोड़े की सज़ा दी जाती है. कठमुल्लों द्वारा जड़ा गया इस्लाम, पैगम्बर मोहम्मद के इस्लाम से बिलकुल नहीं मिलता. महिलाओं को समान हक़ देने की बात और महिलाओं की हत्या न करने के बारे में पैगंबर मोहम्मद के विचार स्पष्ट थे. वो चाहते थे कि सबका जीवन समान हो, सबको अपने मत पर चलने का अधिकार हो. लेकिन आज ऐसा हो नहीं रहा. अगर आप इस्लाम को अपनी परिस्थितियों द्वारा तोड़ मोड़ कर प्रस्तुत करते हैं तो आपके लिए जहन्नुम की राहें खुली हैं.
Source: boredpanda

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