>> इस भारतीय जोड़े ने नौकरी छोड़ सिर्फ़ 500 रुपये रोज़ पर की भारत की यात्रा

हममें से अधिकतर लोग किसी भी ट्रिप पर जाने से पहले उसका बजट निर्धारित करने बैठ जाते हैं, और जब बजट हमारी जेब पर भारी पड़ने लगता है, तो हम बजट कम करने कि जगह उस प्लान को ही कैंसल करना मुनासिब समझते हैं. लेकिन जिनके बारे में मैं आपको बताने जा रहा हूं, उन्होंने अपने प्लान को सफ़ल बनाने के लिए बजट के साथ-साथ अपनी नौकरी की चिंता भी छोड़ दी थी. अगर आप सही मायने में घूमने-फिरने के शौक़ीन हैं तो आपको इस जोड़े की कहानी ज़रूर पसंद आएगी.


मिलिए देवप्रिया रॉय और सौरव झा से, जिन्होंने अपनी 9 से 5 की नौकरी शुदा ज़िंदगी से तंग आकर उसे छोड़ दिया. नौकरी छोड़ने के बाद इस जोड़े ने भारत की खोज अपने हिसाब से शुरू की. दोनों ने यह निर्णय लिया कि चाहे जो भी हो जाए, वे भ्रमण के दौरान हर दिन सिर्फ़ 500 रुपये ही खर्च करेंगे.

इस जोड़े ने उन लोगों के लिए मिसाल कायम की है जो कहीं भी जाने से पहले उसके बजट की चिंता करने लगते हैं. इन दोनों ने अपने अनुभवों को सबके साथ साझा करने के लिए The Heat and Dust Project: The Broke Couple's Guide To Bharat नाम से एक किताब भी लिखी है. इसमें उन्होंने अपने उन सभी रोमांच और परिस्थितयों का ज़िक्र किया है. उनकी यह किताब आपको किसी भी ऑनलाइन साइट पर आसानी से मिल जाएगी.

यकीन मानिए इस जोड़े के अनुभवों को जानने के बाद आपका भी मन एक ऐसी ही रोमांच भरी ट्रिप पर जाने का करेगा!
नौकरी शुदा इंसान एक ही तरह का काम करते-करते थक जाता है. ऐसा ही कुछ हुआ रॉय और झा के साथ जो अपनी 9 से 5 की नौकरी से पक चुके थे. दोनों ने भारत को जानने के लिए हिमालय से कन्याकुमारी की यात्रा करने का निर्णय किया, जिसे ‘भारत की खोज’ कहना गलत नहीं होगा. महात्मा गांधी ने भी भारत को जानने के लिए एक ऐसी ही यात्रा उस दौरान कि थी, जब भारत एक गुलाम देश था. गांधी ने अपनी यात्रा के बाद कहा था कि ‘असली भारत उन 70,000 गांवो में बसता है जिसे हम पहचानते या जानते ही नहीं'.

देवप्रिया और सौरव ने पहले धर्मशाला, मैकलोड़गंज और कांगरा का भ्रमण किया, इसके बाद उन्होंने जयपुर, अजमेर, पुशकर और जोधपुर की ओर रुख किया. बाद में वे जैसलमेर, बारमेर और संचोर की ओर बढ़े. इन जगहों को धूमने के बाद वे गुजरात पहुंचे और वहां से नई दिल्ली.

HolidayIQ से बातचीत के दौरान सौरव ने कहा कि “हमने अपना बजट इसलिए इतना कम रखा था क्योंकि नौकरी करते हुए हम बहुत ज़्यादा राशि नहीं जमा कर पाए थे. रोज़ की तरह मॉल में या आफ़िस के दोस्तों के साथ इधर-उधर जाना फास्टफूड खाना, ये आम दिनचर्या का हिस्सा बन गया था, जिससे हम ऊब चुके थे. इसीलिए हमने स्वतंत्र होकर घूमने का फैसला किया”.

यह किताब पूरी तरह से हमारी शानदार प्लानिंग पर आधारित नहीं है, बल्कि यह एक आम व्यक्ति की निराली कहानी जैसी है. यह किताब आपको ये भी बताएगी कि एक साथ यात्रा करना कैसे एक संबंध की परीक्षा भी है!
All images sourced from The Heat and Dust Project.

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