
साल
2015 अपने अंत के करीब है, बॉलीवुड के लिहाज से ये साल काफी उतार-चढ़ाव
वाला रहा. बॉक्स ऑफिस पर कई फिल्मों ने अच्छी-खासी रकम बटोरी तो कुछ ऐसी
थीं, जो 'अता पता लापता' की तरह गायब हो गईं. पर इन सब के बीच कुछ ऐसी भी
फिल्में थीं, जिन्हें देखने के लिए घरवालों से बहाना बनाना पड़ा था. आज हम
आपको कुछ ऐसी ही फिल्मों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें लोगों ने
घरवालों से बच कर ही देखने में अपनी भलाई समझी.
डर्टी पॉलिटिक्स
तिरंगे में लिपटी मल्लिका शेरावत वाले फिल्म के पोस्टर से ही आप समझ गए होंगे कि डर्टी पॉलिटिक्स किस हद तक डर्टी है.
हंटर
हंटर के वासु को माता-पिता के साथ देखना दुनिया का सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण
काम है. इस काम को करने की हिम्मत जिसमें भी है, वो ही असल में दुनिया का
सबसे बड़ा सिकंदर है.
एक पहेली लीला
'ग्लैमरस अंखियां' में सनी का ग्लैमरस अवतार ही इस फिल्म की कहानी बताने
के लिए काफ़ी था कि ये फ़िल्म आप क्यों मम्मी-पापा के साथ नहीं देख सकते.
कुछ-कुछ लोचा है
इस फिल्म में सनी के साथ सीधे-सादे राम कपूर की हरकतें इतनी नॉटी थीं कि
घरवालों के साथ इस फिल्म को देखने का सवाल ही पैदा नहीं होता.
मैं और चार्ल्स
बिकनी किलर के नाम से प्रसिद्ध चार्ल्स की ज़िंदगी पर बनी फिल्म में
रणदीप हुड्डा ने चार्ल्स को ज़िंदा करने की बखूब कोशिश की थी. तो मसाले से
भरपूर इस फिल्म को घरवालों के साथ कौन देखना चाहेगा.
Angry Indian Goddesses
मस्तमौला और बिंदास रूप में दिखाई गई आधुनिक लड़कियों के जीवन पर आधारित
इस फिल्म में कई ऐसे सीन थे, जो आपके परिवार को विचलित कर सकते थे. इसलिए
इस फिल्म को अकेले ही देखने में भलाई थी.
कैलेंडर गर्ल्स
मधुर भंडारकर द्वारा निर्देशित कैलेंडर गर्ल्स का ट्रेलर देखने के लिए
एकांत चाहिए था, तो फ़िल्म देखने के लिए कैसे घरवालों की दखलंदाज़ी बर्दाश्त
कर सकते थे.