>> 8 ऐसे लोग जिन्हें खुद का देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा

इस दुनिया में बंदा जिस चीज से सबसे ज़्यादा मोहब्बत करता है, वो है उसका परिवार, उसके दोस्त और उस देश कि मिट्टी जिसमें वो पैदा हुआ, जिसमें वो खेला और बड़ा हुआ. सबसे ज़्यादा दर्द इन्सान को उस टाइम महसूस होता है, जब वह किसी से बिछड़ता है, पर तब क्या हो जब उसे देश की ही मिट्टी में
कदम न रखने दिया जाये. या यूं कहूं की उसे, उस देश से बेदखल कर दिया जाये जिसकी मिट्टी में वो पैदा हुआ और अपने देश की मिट्टी में मिलने का सपना बस सपना ही रह जाये. और रह जाती हैं तो बस यादें अपने देश से जुड़ी, अपने घर से जुड़ी.
आज हम आपको ऐसे ही 10 लोगों के बारे में बता रहे है जो जिस देश में पैदा हुए उस देश के कानून और लोगों ने उन्हें, उनके ही देश से बाहर रहने को मजबूर कर दिया.

1. एम. एफ़. हुसैन

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मशहूर पेंटर और आर्टिस्ट M.F. हुसैन ने कला जगत को कई बहुमूल्य पेंटिंग्स दीं, पर कला का यह पुजारी अपनी पूजा में कुछ इस कदर खो गया कि इसे समाज और साम्प्रदायिक तत्वों का कोई ख्याल नहीं रहा, जिस कारण इस मशहूर पेंटर को अपना देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा.
Source: hussain

2. सलमान रश्दी

2 बार बुकर प्राइज़ विजेता, अपनी किताबों में भारतीय किरदारों को गढ़ दुनिया के सबसे प्रभावशाली लेखकों में से एक, रश्दी को खुद उनके ही देश में आने की इजाज़त नहीं. क्योंकि धर्म आधारित राजनीति की आग में हर कोई अपनी रोटी सेंकना चाहता है.

Source: node

3. तसलीमा नसरीन

तसलीमा एक ऐसा नाम है जिसे किसी पहचान की जरूरत नहीं है. अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों की लम्बी लिस्ट उनके प्रभाव को दर्शाने के लिए काफी है, पर इस्लाम के खिलाफ़ बेबाक लिखने की वजह से उन्हें, उनके ही देश, बांग्लादेश से बाहर निकाल दिया गया.

Source: kolkatapost

4. शहीन नजफ़ी

संगीतकार, गीतकार और ईरानी रैपर, शहीन नजफ़ी खुलकर इस्लाम के नाम पर मौलानाओं की ज्यादतियों को लिखते और गाते थे, जिसकी वजह से उन्हें देश से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और जान से मारने के कई फतवे भी जारी किये गये.

Source: najafi

5. फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अपनी कलम से लाल का परचम लहराने वाले फ़ैज़ की कलम पाकिस्तान के लोगों और सियासतदां को इतनी नागवार गुजरी की उन्हें अपना ही देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा.

Source: urdu

6. बेनजीर अली भुट्टो

किसी इस्लामिक देश की पहली प्रधानमंत्री होने का गौरव बेनजीर के सर जाता है. इस्लामिक देश में महिला अधिकारों को उठाने वाली बेनजीर पर भ्रष्टाचार के आरोप और मौलानाओ के फतवों के कारण देश छोड़ना पड़ा.

Source: pakistan

7. आन सां की सू

दुनिया की शक्तिशाली महिलाओं में से एक नोबल प्राइज विजेता मयंमार की ‘आन सां की सू’ को देश में लोकतंत्र बहाल करने की लड़ाई इतनी महंगी साबित हुई कि उन्हें खुद के देश में ही नजरबंद कर दिया गया. 1996 में 200 लोगों ने जब उनके दस्ते पर हमला किया तो उसके बाद उन्होंने देश छोड़ने में ही भलाई समझी.

Source: speak

8. परवेज़ मुशर्रफ़

पाकिस्तान की राजनीति में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले परवेज़ मुशर्रफ़ पर भ्रष्टाचार और पाकिस्तान के लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करने के आरोपों के चक्कर में जनाब ने देश छोड़ लंदन जाकर बसने में ही भलाई समझी.

Source: guardian

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