
भारत
राजा, महाराजाओं का देश रहा है. हमारा इतिहास इस बात का गवाह है कि ये देश
कभी सोने की चिड़िया हुआ करता था. राजाओं के खजाने सोने और पैसों से भरे
थे, लेकिन उस वक़्त उनकी विलासता और अय्याशी ने आज उन राजा महाराजाओं के
परिवार वालों की स्थिति बद-से-बदत्तर कर दी है. कभी नौकरों की भीड़ से घिरे
रहने वाले लोगों को आज खुद नौकरों की जिंदगी जीनी पड़ रही है या वो ऐसी
जिंदगी को जीते-जीते मौत के आगोश में सो गए. ऐसे ही 8 राजशाही परिवार से हम
आपको रूबरू करवाते हैं जिनकी शान तो गई साथ ही शोहरत भी नहीं रही.
1. ओसम अली ख़ां
हैदराबाद के आखिरी निज़ाम ओसम अली ख़ां थे. इनकी विलासिता के किस्से
पूरी दुनिया में आज भी फ़ैले हैं. 20वीं सदी की शुरुआत में दुनिया के सबसे
अमीर व्यक्ति ओसम के पास 100 मिलियन की कीमत के सोने और चांदी, 400 मिलियन
के गहने और 200 मिलियन के हीरे थे. उनकी 86 प्रेमिका और 100 से ज़्यादा
बच्चों में जब इन पैसों को बांटा गया, तो सब के हिस्से में बहुत ही कम पैसे
आए. आज उनके घर वालों की हालत काफ़ी बुरी है, और एक वक़्त का सबसे अमीर
खानदान आज गरीबों की जिंदगी जीने पर मज़बूर है.
2. राजा ब्रजराज
राजा ब्रजराज ओडिशा के आखिरी राजा थे. एक वक़्त जब लोग साईकल के सपने
देखते थे, उस वक़्त इनके पास 25 गाड़ियां हुआ करती थीं. आजादी के बाद इनका
राज-पाठ छीन लिया गया और 1960 में घर वालों के दबाव में राजा ब्रजराज को
अपना महल मात्र 67 लाख रुपये में बेचना पड़ा. 1975 में सरकार ने भी राजाओं
को मिलने वाली सुख-सुविधा हटा ली, जिसके बाद राजा ब्रजराज ने अपनी बची
जिंदगी झोपड़ी में काटी.
3. सुल्ताना बेगम
मुगल शासकों के खानदान की सुल्ताना बेगम आखरी शहंशाह बहादुर शाह ज़फ़र
के परपोते की बहू हैं. देश पर राज करने वाले इस खानदान की बहू आज घर-घर
जाकर जूठे बर्तन साफ़ करती हैं. अपने 5 बच्चों के पालन-पोषण के लिए ज़मीन
पर कभी पैर नहीं रखने वाली इस महारानी को आज रोड पर झाड़ू लगानी पड़ रही
है.
4. ग्वालियर महाराज
तोमर राजाओं द्वारा बनाए गए ग्वालियर किले को मुगलों ने जेल की तरह
इस्तेमाल किया था. 1857 में अंग्रेजों ने इस किले को जीत कर इसे ग्वालियर
महाराज को सौंप दिया. कहा जाता है कि ग्वालियर के इस राजशाही खानदान के पास
गुप्त खजाना था, जिसे 'गंगाजली' कहते थे. इसकी जानकारी सिर्फ़ महाराजा को
होती थी. लेकिन आखिरी महाराज जियाजी राव की अचानक मृत्यु के बाद इस खजाने
का पता किसी को नहीं था. जियाजी राव की मौत के बाद सिंधिया खानदान को पैसों
की काफ़ी कमी झेलनी पड़ी. जियाजी राव के बेटे और इस खजाने के वारिस माधव
राव ने इस खजाने को खोजने में दिन-रात एक कर दिए और उन्हें इस काम में
सफ़लता भी हाथ लगी.
5. ज़ियाऊदीन ट्यूसी
आखिरी मुगल शासक बहादुर शाह ज़फ़र की छठी पीढ़ी के ज़ियाऊदीन की हालत
किसी रंक जैसी है. किराये के मकान में रहने वाले ज़ियाऊदीन को दो वक़्त की
रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है. ज़ियाऊदीन को अपने दादा-परदादाओं की
संपत्ति को वापिस पाने की आस आज भी है. भारत सरकार द्वारा 8000 रुपये के
अनुदान से ज़ियाऊदीन अपना घर चलाते हैं.
6. Uthradam Thirunal Marthanda Varma
1750 से दशक में Travancore एक सम्पन्न राज हुआ करता था. वहां के राजा
ने अपनी सारी संपत्ति Sree Padmanabha Swamy मंदिर को दान कर एक ऐतिहासिक
कदम उठाया था. करीब दो दशकों बाद अंग्रेजों ने इस मंदिर के खजाने को लूट
लिया. लेकिन वहां के महाराज ने अपनी शक्ति के दम पर उस पूरे खजाने को वापिस
हासिल किया. 2011 में भारत सरकार ने इस खजाने को देश की संपत्ति बताते हुए
उस मंदिर के तहखाने को खुलवाने के आदेश दिए. लेकिन तत्कालिन राजा Uthradam
Thirunal Marthanda Varma ने भारत सरकार से बात साफ़ कर दी, कि वो खजाना न
तो सरकार का है, न ही उनका. उस खजाने पर सिर्फ़ भगवान का हक है.
7. टीपू सुल्तान
टाईगर ऑफ़ मैसूर नाम से जाने जाने वाले टीपू सुल्तान का परिवार आज
मुफ़लिसी में जी रहा है. छोटे-मोटे काम कर के इस शहंशाह का खानदान आज अपनी
गुज़र-बसर कर पाता है. 12 बच्चों में से टीपू सुल्तान के सिर्फ़ दो बच्चों
के बारे में पता चल पाया है, जबकि 10 बच्चों की जानकारी आज भी किसी के पास
नहीं है.
8. सकीना महल
दिल्ली की आबादी से दूर मालचा महल में रहने वाले अवध के दो चिरागों की
हालत काफ़ी गम्भीर है. सकीना अपने भाई रियाज़ के साथ रहती हैं. राज पाठ
छिनने के बाद सकीना की मां विलायत महल अपने दोनों बच्चों के साथ दिल्ली आ
गई थीं. करीब 9 सालों तक दिल्ली रेलवे स्टेशन के एक कमरे रहने के बाद
तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें मालचा महल में रहने की जगह
दी. विलायत महल ने 1993 में गरीबी से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी. लेकिन
उनके बच्चे आज भी उस वीरान महल में अकेले रह रहें हैं.
