>> भारत में प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाली ये 9 चीजें विदेशों में हैं बैन
चीजों को बैन करना चाहिए था उनके लिए कोई आवाज नहीं उठ पाई। कभी गौमांस, कभी फ़िल्में, तो कभी गाने और मैगी पर लगते बैन के कारण असल मुद्दे नदारद ही रह गये। अपने इस आलेख में हम आपको कुछ ऐसी चीज़ों को बताने जा रहे हैं जो प्रतिदिन भारत में यूज की जाती हैं, पर भारत से बाहर कई देशों ने इनको बैन कर रखा है।
1. Lifebuoy Soap-
इस साबुन को कई देशों में त्वचा के लिए खतरनाक माना जाता है। कई देशों में तो इसे मात्र जानवरों को नहाने वाले साबुन की तरह इस्तेमाल किया जाता है। भारत में तो हर इंसान ज़िंदगी में एक बार इस साबुन से ज़रूर नहाया होगा।
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2. Disprin-आमतौर पर हमारे देश में घरों पर आसानी से उपलब्ध हो जाने वाली Disprinविश्व स्तर पर होने वाली दवाइयों की जांच में फेल हो गई थी। जिसके कारण ये आपको भारत के बाहर कहीं भी नहीं मिलेगी। तबियत ठीक करने वाली दवाएं तबियत खराब भी कर सकती हैं। इसीलिए विदेशों में disprin, D-Cold, Vicks Action 500, Enteroquinol, Analgin, Syspride जैसी दवाओं पर बैन है, लेकिन भारत में कोई बैन नहीं।
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3. समोसा-सोमालिया में समोसा भी बैन कर रखा है। वहां के एक आतंकी संगठन अल-शबाब का मानना है कि ये ईसाइयों द्वारा इजाद किया हुआ है। इसी कारण वो इसे अपने मुल्क़ में नहीं बिकने देते। हद है यार, लड़ाई में कमबख़्त समोसा भी आ गया।
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4. हल्दीराम के स्नैक्स-अमेरिका के FDA डेटा के अनुसार भारत के नामी ब्रांड हल्दीराम के आधे से ज्यादा स्नैक्स पर रोक लगा दी गई। इस ब्रांड के वेफर्स, कुकी और बिस्किट में मिलावट पाई गई। उन्होंने इसे गंदा, सड़ा हुआ और बेकार बताकर बैन कर दिया। वहीं भारत में तो हल्दीराम की नमकीन का बोलबाला है।
5. मारुति सुज़ुकी ऑल्टो 800
सुरक्षा और चलाने के लिहाज से सही न होने के चलते इसे कई देशों में ना ले जाया जा सकता है और ना ही वहां चलाया जा सकता है। पर अपने देश में तो सब चलता है।
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6. D-Cold Total-सर्दियों में एक बार तो हर भारतीय इस दवाई का सेवन ज़रूर करता है, लेकिन कई देशों ने जांच के बाद इसे किडनी के लिए खतरनाक बता कर बेचने से मना कर दिया है।
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7. टाटा नैनो-ग्लोबल राइड के दौरान टाटा नैनो में सुरक्षा को लेकर कई खामियां सामने आई। इसी कारण कई देशों ने सुरक्षा कारणों से इसे बैन कर दिया।
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भारत में इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशकों में से करीब 70 विदेशों में बैन किए जा चुके हैं। इसका कारण बताया जाता है कि ये हानिकारक कैमिकल खाने के साथ हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं और अनेकों स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देते हैं। भारत में इस पर बैन नहीं है। स्वास्थ्य को लेकर सजग लोग दुगने-चौगुने दाम देकर ऑर्गेनिक चीजें खरीदने को मजबूर हैं।
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9. च्यवनप्राश-
हर रोज बच्चों को दिये जाने वाले च्यवनप्राश में भी भारी मात्रा में लेड और मरकरी पाया जाता है। इसीलिए 2005 में कनेडा में इसे बैन कर दिया गया। वहीं, भारत के बच्चों को इससे शक्ति मिलती है।
ये बड़ी कंपनियां इस बात की भी दलील देती हैं कि भारत के मानक और विदेशी
मानक अलग-अलग होते हैं। जबकि इंसान के स्वास्थ को ध्यान में रखकर जो मानक
निर्धारित किए जाते हैं वो भला कैसे अलग हो सकते हैं।हर रोज बच्चों को दिये जाने वाले च्यवनप्राश में भी भारी मात्रा में लेड और मरकरी पाया जाता है। इसीलिए 2005 में कनेडा में इसे बैन कर दिया गया। वहीं, भारत के बच्चों को इससे शक्ति मिलती है।