>> यहां पर करोड़पति कर रहे हैं मजदूरों वाली नौकरी

Ahmedabad_Sanand1अगर हम आपको यह बताएं कि अपने देश भारत में एक ऐसी जगह है जहां फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर, चपरासी, सिक्योरिटी गार्ड्स तक करोड़पति हैं तो क्या आप यकीन करेंगे। आप इस बात पर भरोसा नहीं करेंगे, लेकिन यह सच है। यह सच्चाई है अपने देश भारत की, जहां एक तरफ तो कुछ लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो रही, वहीं दूसरी तरफ करोड़पति मजदूर, चपरासी, सिक्योरिटी गार्ड्स की नौकरी कर रहे हैं।

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अहमदाबाद के साणंद में मजदूर, चपरासी, सिक्योरिटी गार्ड्स की नौकरी करने वाले करोड़पति हैं। फैक्ट्रियों में इन्हें वेतन तो मामूली ही मिलता है। इनके मालामाल होने की वजह दूसरी है। दरअसल कुछ साल पहले गुजरात सरकार ने साणंद की चार हजार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया है। इसके बदले जमीन के मालिकों को करोड़ों रुपए का मुआवज़ा मिला। अचानक किस्मत के सितारे बुलंद होने के बावजूद भी इनमें से कई लोग फैक्ट्रियों में मशीन ऑपरेटर्स, फ्लोर सुपरवाइजर्स, सिक्यॉरिटी गार्ड और यहां तक कि चपरासी का काम भी कर रहे हैं।
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वहीं, जिन लोगों को भूमि अधिग्रहण के बदले में मोटी रकम मिली है उन्होंने इस धनराशि को सोना, बैंक डिपॉजिट्स आदि में निवेश कर रखा है। टाटा का प्लांट आने से पहले यहां सिर्फ दो बैंकों की नौ शाखाएं ही थीं, जिनमें करीब 104 करोड़ रुपए जमा रहता था। अब बीते कुछ सालों से यहां 25 बैंकों की 56 शाखाएं हैं, जिनमें कुल तीन हजार करोड़ रुपए जमा है।
साणंद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सेक्रटरी शैलेष कहते हैं कि रातों-रात करोड़पति होने के बाद कई कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ना शुरू कर दिया था। जैसे-तैसे कई कर्मचारियों को वापस लाया गया, जिससे काम शुरू हो सका है।
एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक रविराज फोइल्‍स लिमिटेड कंपनी में काम करने वाले 300 कर्मचारियों में से करीब 150 कर्मचारियों का बैंक बैलेंस एक करोड़ रुपए या उससे ज्यादा है। इसके बावजूद ये करोड़पति लोग नौ हजार से 20 हजार रुपए मासिक की नौकरी कर रहे हैं।हालांकि, कंपनियों में इन कर्मचारियों को रोके रखना एक बड़ी चुनौती है, क्‍योंकि अब उनकी आय का एक मात्र साधन नौकरी नहीं है। दरअसल 2008 में पश्चिम बंगाल के सिंगूर से जब टाटा मोटर्स ने यहां अपना प्‍लांट लगाया था तब से साणंद औद्योगीकरण का बड़ा हब बनकर उभरा है। जीआईडीसी के तहत यहां 200 छोटी, बड़ी कंपनियों के यूनिट स्थापित किए गए हैं। 
वहीं, जिन लोगों को भूमि अधिग्रहण के बदले में मोटी रकम मिली है उन्होंने इस धनराशि को सोना, बैंक डिपॉजिट्स आदि में निवेश कर रखा है। टाटा का प्लांट आने से पहले यहां सिर्फ दो बैंकों की नौ शाखाएं ही थीं, जिनमें करीब 104 करोड़ रुपए जमा रहता था। अब बीते कुछ सालों से यहां 25 बैंकों की 56 शाखाएं हैं, जिनमें कुल तीन हजार करोड़ रुपए जमा है।
साणंद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सेक्रटरी शैलेष कहते हैं कि रातों-रात करोड़पति होने के बाद कई कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ना शुरू कर दिया था। जैसे-तैसे कई कर्मचारियों को वापस लाया गया, जिससे काम शुरू हो सका है।
 

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