>> ये हैं वो मंदिर और दरगाहें जहां होता है झाड़-फूंक और भगाई जाती हैं बुरी आत्माएं

अंग्रेजी का एक शब्द है exorcism, जिसका अर्थ है झाड़-फूंक या जादू-टोना. अगर और गहराई में जाएं तो एक्सिर्सिस्म तब किया जाता है जब किसी इंसान पर जब बुरी आत्मा या भूत-प्रेत का साया पड़ जाता है. विज्ञान के हिसाब से जो लोग exorcism का सहारा लेते हैं वो मानसिक रूप से बीमार होते हैं. लेकिन
फिर भी कई लोग, डॉक्टर के पास नहीं, इन मंदिरों और दरगाहों पर जाते हैं. और वहां जिस अजीब तरीके की हरकतें होती हैं, उसको देख कर किसी का दिल भी दहल सकता है. तो आज नज़र डालते हैं उन मंदिरों और दरगाहों पर जहां भगाई जाती हैं ये बुरी आत्माएं.

1. दत्तात्रेय मंदिर, गाणगापुर

काली घनी रात में चांद की रौशनी हमें शांति और सुरक्षा का एहसास दिलाती है, लेकिन गुलबर्गा जिले के गाणगापूर शहर के लोगों को सुनाई देती है चीखें, रोने की आवाज़ और एक दर्द भरी खामोशी. हर अमावस्या और पूर्णिमा की रात, भारत के कई राज्यों से लोग अपने सगे-संबंधियों को दत्तात्रेय मंदिर ले कर आते हैं. कहते हैं कि अमावस्या और पूर्णिमा की रात दत्तात्रेय मंदिर में exorcism होता है और श्री नरसिम्हा सरस्वती (जिन्हें भगवान दत्तात्रेय का अवतार मानते हैं) के आशीर्वाद से पीड़ित इंसान के शरीर से बुरी आत्मा को भगाया जाता है.

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मनोरोग विशेषज्ञ इसे गलत मानते हैं लेकिन इसके बावजूद भी लोग यहां आते हैं. सुबह 11:30 बजे यहां महामंगल आरती शुरू होती है और जो पीड़ित होते हैं वो चीखना, चिल्लाना, रोना, अजीब-अजीब आवाज़ें निकालना शुरू कर देते हैं. कुछ लोग तो ज़मीन पर लोटने लगते हैं और कुछ लोग दत्तात्रेय भगवान को अपशब्द कहना शुरू कर देते हैं. ऐसा माना जाता है कि जिस आत्मा को पीड़ित के शरीर से निकालने की कोशिश हो रही है वो ही ऐसा करवाती है.

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पीड़ित लोग यहां लगे खम्बों पर भी चढ़ जाते हैं और अजीब हरकतें करते हैं. कुछ ही देर बाद ये लोग मंदिर के द्वार पर आधे बेहोश हो कर गिर जाते हैं. फिर सामान्य होने में उन्हें 15-20 मिनट लगते हैं. डॉक्टरों का दृष्टिकोण ये है कि पीड़ित लोगों को पहले मेडिकल जांच करवानी चाहिए फिर इस मंदिर में दर्शन के लिए आना चाहिए. वो ये भी मानते हैं कि मंदिर के अधिकारियों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो पीड़ित लोगों को पहले डॉक्टर के पास जाने की सलाह दें.

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2. निज़ामुद्दीन दरगाह, दिल्ली

टूरिस्ट्स के लिए निज़ामुद्दीन दरगाह एक दर्शनीय स्थान है. यहां हर गुरूवार मन मोह देने वाली क़व्वाली होती है. वातावरण सूफ़ी धुनों से सराबोर हो जाता है. यहां जो भी आता है वो क़व्वाली सुन कर ज़रूर मंत्रमुग्ध हो जाता है. लेकिन इन मोहक धुनों के बीच सुनाई देती है दर्दभरी चीखें. अगर आपकी नज़र जायेगी नमाज़गाह के पास एक कमरे में तो वहां कुछ लोग आपको चीखते, चिल्लाते, इधर-उधर भागते नज़र आएंगे.

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निज़ामुद्दीन दरगाह में ये अजीब सा नज़ारा देखने को मिलता है जहां एक तरफ अल्लाह की इनायत में कव्वालियां गायी जा रही होती हैं, वहीं दूसरी तरफ पीड़ित लोगों के शरीर से शैतान को भगाने के लिए अलग प्रथा चल रही होती है. जो लोग इस दृश्य को देखने की कोशिश करते हैं, दरगाह के बड़े-बूढ़े उन्हें वहां से जाने को बोलते हैं.

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3. देवजी महाराज मंदिर, मलाजपुर

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में, मलाजपुर गांव है जहां देवजी महाराज मंदिर है. यहां हर साल 'भूत मेला' होता है और लोग अपने परिजनों को exorcism के लिए ले कर आते हैं.

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दत्तात्रेय मंदिर की तरह ही यहां भी सबसे ज़्यादा लोग पूर्णिमा की रात को आते हैं. यहां की प्रथा के अनुसार पीड़ित लोग मंदिर के आंगन में इधर-उधर भागते हैं और पुजारी झाड़ू से मार कर इनके शरीर से बुरी आत्मा को निकालने की कोशिश करते हैं.

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4. हज़रत सैय्यद अली मीरा दातार दरगाह, गुजरात

इस दरगाह की तरफ जब आप चलते हुए जाएंगे तो बाहर से ही लोगों की चीखें आपके कानों में पड़ेंगी. हज़रत सैय्यद अली मीरा दातार दरगाह में परिवार अपने उन परिजनों को ले कर आते हैं जिन पर किसी आत्मा का साया है. यहां गांव और शहर से गरीब-अमीर, अनपढ़, पढ़े-लिखे, लोग exorcism के लिए आते हैं. लोगों की मान्यता है कि यहां अपने पीड़ित परिजनों को लाने से उनकी मुसीबतें ख़त्म हो जाएंगी. कई लोग तो यहां तब आये हैं जब डॉक्टरों से भी उनका इलाज नहीं हो पाया.

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जो पीड़ित लोग गंभीर तरीके से ग्रस्त हैं उनके लिए यहां कमरे भी हैं जो सिर्फ़ 800 रुपये महीने के मूल्य पर मिल सकते हैं. और जो पीड़ित हिंसक हो जाते हैं उन्हें बेड़ियों से बांधा जाता है.

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यहां हिंदू-मुस्लिम, हर धर्म के लोगों का आना लगा रहता है. इस्लाम में लिखा है कि दुनिया में अलग-अलग तरीके के जिन्न होते हैं, कुछ अच्छे होते हैं और कुछ बुरे. जो पीड़ित इस दरगाह में मदद के लिए आते हैं उन पर बुरे जिन्नों का कब्ज़ा होता है. लेकिन नए ज़माने के मौलवियों का मानना है कि ये पीड़ित किसी न किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त होते हैं जिसे ये मान लेते हैं कि जिन्न ने इन पर कब्ज़ा कर लिया है.

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लेकिन फिर भी हज़रत सैय्यद अली मीरा दातार दरगाह में आप लोगों को अपना सर पीटते हुए, फ़र्श को मारते हुए, ज़मीन पर लोटते हुए देख सकते हैं. कुछ लोगों की कलाइयों, गले और एड़ियों पर ताले भी बंधे होते हैं.
इस दरगाह के दूसरे तल एक गुम्बद है जिसे 'दादी अम्मा की चक्की' कहते हैं. इस गुम्बद के चारों ओर पीड़ित लोग परिक्रमा करते हैं और अगर आप इनके बीच में गलती से आ जाओ तो ये हिंसक भी हो सकते हैं. लेकिन exorcism ख़त्म हो जाने के बाद ये एक सामान्य इंसान की तरह ही बर्ताव करेंगे.

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5. मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, राजस्थान

कहते हैं कि जिन लोगों को भूतों पर विश्वास नहीं है वो एक बार मेहंदीपुर बालाजी ज़रूर हो कर आएं. यहां हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं जिन्हें अपने या अपने किसी परिजन के ऊपर से बुरा साया भगाना होता है.

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इस मंदिर के दृश्य कई दिनों तक आपकी नींद उड़ा सकते हैं. जैसे कुछ लोग अपने ऊपर खौलता हुआ पानी डाल लेते हैं और फिर भी उन्हें कुछ नहीं होता. यहां पीड़ितों के ऊपर पत्थर बरसाए जाते हैं और उन्हें जानवरों की तरह बेड़ियों में बांधा जाता है. कई लोगों को अंधा विश्वास होता है कि ये सब करने से उनके परिजनों की सारी मुसीबतें ख़त्म हो जाएंगी.

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मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में रस्मों को बड़ी गंभीरता से लिया जाता है और पीड़ितों को बिना कोई गलती किये हुए इन्हें निभाना होता है. सबसे पहले तीनों भगवानों को लड्डुओं का भोग चढ़ाया जाता है और बाकी बचे हुए लड्डू फ़ेंक दिए जाते हैं. फेंके हुए लड्डुओं को मंदिर के कर्मचारी एक पैकेट में इकठ्ठा कर लेते हैं. फिर पीड़ित इंसान को 2 लड्डू खाने होते हैं. पूजा करते समय पीछे देखना एकदम मना है और बिना पीछे देखे मंदिर के बाहर निकलना होता है. ऐसा मानना है कि पीछे देखने से बुरी आत्माएं आपके पीछे पड़ जाएंगी और इसीलिए मंदिर से निकलने के बाद आपका शहर में कहीं और भोजन करना भी मना है. एक और शर्त ये होती है कि इस मंदिर में आप जो भी मन्नत मांगो, पूरी होने पर आपका यहां एक बार फिर आना बहुत ज़रूरी है.

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ये थे कुछ मंदिर और दरगाहें जहां exorcism होता है. आज-कल के समय में जब विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है, कुछ ऐसी प्रथाएं और मान्यताएं हैं जो हमें अचंभित कर देती हैं. दिल और दिमाग सोचने पर मजबूर हो जाता है कि क्या ऐसा भी हो सकता है? आपने भी कभी अगर इस तरह का जादू-टोना, झाड़-फूंक देखा हो तो कमेंट कर के बताएं. इस तरह की और भी जगहों पर आप गए हैं जहां exorcism होता है तो वो भी बताएं. और हां, इस आर्टिकल को शेयर करना मत भूलियेगा.
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