एक ऐसी ऐतिहासिक जगह जहां नदी से निकलते हैं शिवलिंग

हमारे भारत में धर्म को बहुतेरे लोग मानते हैं. आस्था का ये पुल सदियों से बरकरार है. सावन के महीने में लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं. कहते हैं कि भगवान शिव सावन के महीने में मस्त-मलंग रहते हैं, वैसे ही उनके भक्तों को रहना चाहिए. आपने भगवान शिव से संबंधी देश भर में 12 शिवलिंगों के बारे में सुना होगा लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहां हैं हज़ारों शिवलिंग.

इस जगह को सह्स्त्रलिंगा के नाम से जाना जाता है अर्थात्, हज़ारों लिंग. ये ऐतिहासिक जगह कर्नाटक के उत्तर कन्नडा ज़िले में एक नदी पर स्थित है. इस नदी का नाम शामला है. चट्टान पर बने ये शिवलिंग नदी के घटते जलस्तर के साथ ही दिखने लगते हैं. पर्यटकों के साथ-साथ भगवान शिव पर आस्था रखने वाले भक्तों का यहां तांता लगा रहता है. यहां देखिए इसकी कुछ तस्वीरें.



















इतिहास तो बोलता है...

हर चीज़ के इतिहास की तरह इसका भी एक इतिहास है. सिरसी के राजा सदाएश्वर्य (1678-1718) ने इन शिवलिंगों का निर्माण करवाया था. तस्वीरों में आप शिवलिंग के अलावा कुछ अन्य निर्मित आकृत्तियां भी देख सकते हैं.

क्या सह्स्त्रलिंगा का है कंबोडिया से कोई नाता?

तस्वीरों में आपने अभी सहस्त्रलिंगा के शिवलिंगों को देखा अब ऐसे ही कुछ शिवलिंग दक्षिण एशियाई देश कंबोडिया में भी देखने को मिलते हैं. जिस प्रकार सहस्त्रलिंगा में चट्टानों पर शिवलिंग और कुछ अन्य कलाकृत्तियां निर्मित हैं. वैसा ही कुछ कंबोडिया के मशहूर मंदिर अंगकोर वाट से 25 किलोमीटर दूरी पर है. इस जगह को केब्ल स्पीन के नाम से जाना जाता है. जिसका मतलब होता है “मुंडों का पुल”.
 यहां की चट्टानों में पशुओं की भी आकृतियां निर्मित हैं. इस जगह के पास से जाता झरना इसकी खूबसूरती को चार चांद लगा देता है. यहां देखिए कंबोडिया के मंदिर की कुछ तस्वीरें.

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