
कहते
हैं न, जो परिवार रहे साथ और हंसे साथ, वो होता है सुखी परिवार. जो लोग
औद्योगिक परिवार से संबंध रखते हैं, वो जानते होंगे कि व्यापार को आगे
बढ़ाने के लिए परिजनों का कितना महत्वपूर्ण योगदान होता है. भारत में
मल्टीनेशनल कंपनियों के आने से पहले परिवारों ने उद्योगों की शुरुआत की और
अपना नाम सिर्फ़ भारत में ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनाया. आज हम
आपको भारत के कुछ ऐसे परिवारों के बारे में बताने वाले हैं जो पीड़ी-दर-पीड़ी
भारत के आर्थिक विकास में अपना योगदान देते आ रहे हैं.
1. बिरला समूह
1857 में सेठ शिवनारायण बिरला ने बिरला समूह की नींव रखी थी. आज बिरला
ग्रुप भारत की तीसरी सबसे बड़ी निजी कंपनी है जिसकी मौजूदगी दुनिया के 33
देशों में है. करीब 1,36,000 लोगों को रोज़गार देने वाले आदित्य बिरला समूह
की कुल सालाना आमदनी है 40 बिलियन डॉलर.
Source: VGC
2. किर्लोस्कर समूह
1888 में शुरू हुई हुए किर्लोस्कर ग्रुप का उस समय नाम किर्लोस्कर
ब्रदर्स लिमिटेड था. लक्ष्मणराव किर्लोस्कर के नेतृत्व में इस कंपनी को
भारी सफलता मिली. आज किर्लोस्कर ग्रुप पंप, इंजन, वाल्व और कंप्रेसर की
इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग करता है. इस कंपनी में करीब 28,000
कर्मचारी कार्यरत हैं और इनकी कुल आमदनी है 2.50 बिलियन डॉलर.
3. महिंद्रा समूह
जे.सी. महिंद्रा और के.सी. महिंद्रा भाइयों ने मलिक ग़ुलाम मोहम्मद के
साथ मिल कर 1945 में स्टील का व्यापार शुरू किया था. बाद में कंपनी का नाम
बदल कर महिंद्रा एंड महिंद्रा कर दिया गया. ऑटोमोबाइल से लेकर आईटी, रियल
एस्टेट वगेराह का व्यापार महिंद्रा समूह करता है. इनका सालाना रेवेन्यू है
15.9 बिलियन डॉलर और इन्होंने 1,55,000 लोगों को रोज़गार के अवसर प्रदान
किये हैं.
4. वाडिया समूह
ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1736 में सर लवजी वाडिया को पानी के जहाज और डॉक्स
बनाने का कार्यभार दिया था. तब हुआ वाडिया ग्रुप का गठन. आज इनकी मुख्यतः 5
कंपनियां हैं, जिनमें से बॉम्बे डाइंग, ब्रिटानिया इंडस्ट्री, बॉम्बे
रियल्टी, गो एयर और नेशनल पेरोक्साइड विशेष हैं. वाडिया ग्रुप के मौजूदा
चेयरमैन हैं नस्ली वाडिया.
5. डाबर समूह
1884 में डॉ. एस.के. बर्मन ने डाबर ग्रुप की नींव रखी थी. डाबर ग्रुप आज
भारत में आयुर्वेदिक दवाइयों का सबसे बड़ा उत्पादक है. अपने परिवार के
अलावा डाबर ग्रुप के बोर्ड में कई गैर-पारिवारिक लोग भी हैं. इस ग्रुप के
सीईओ भी परिवार से ताल्लुक नहीं रखते हैं.
6. गोदरेज समूह
तालों का उत्पादन करने के लिए आर्देशिर गोदरेज ने 1897 में गोदरेज समूह
की शुरुआत की थी. आज परिवार की चौथी पीड़ी गोदरेज समूह को चला रही है.
गोदरेज समूह फर्नीचर, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन,
आईटी और एफएमसीजी श्रेणियों में अपना व्यापार फैलाये हुए है. इस समूह के
वर्तमान में चेयरमैन हैं आदी गोदरेज और इनका सालाना रेवेन्यू है 3.5 बिलियन
डॉलर.
7. मुरुगप्पा समूह
मुरुगप्पा समूह को दक्षिण का टाटा भी कहा जाता है. इस समूह को 1900 में
शुरू किया था दीवान बहादुर ऐ.एम. मुरुगप्पा ने. इनके व्यापार की शुरुआत
बर्मा में बैंकिंग और ऋण सेवाओं से हुई थी. आज मुरुगप्पा समूह के अंतर्गत
28 कंपनियां हैं जिनकी कुल आमदनी है 225 बिलियन रुपये. मुरुगप्पा समूह में
32,000 लोग काम करते हैं और इन्होंने बीमा, फ़र्टिलाइज़र, साइकिल
मैन्युफैक्चरिंग वगेराह में अपने व्यापार को आगे बढ़ाया है.
8. मोदी समूह
राय बहादुर गुजरमल मोदी ने 1933 में मोदी ग्रुप की नींव रखी थी. तबसे इस
समूह ने अपने व्यापार को चाय और पेय पदार्थ, रेस्टोरेंट, शिक्षा,
एंटरटेनमेंट, हेल्थकेयर, हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाया है.
इनका सालाना रेवेन्यू है 2.8 बिलियन डॉलर और करीब 28,000 लोग मोदी समूह में
कार्यरत हैं. इनका मुख्यालय दिल्ली में है और वर्तमान चेयरमैन कृष्ण कुमार
मोदी हैं.
9. रेमंड समूह
1925 में रेमंड मिल को ठाणे में शुरू किया गया था जहां गर्म कंबल बनाये
जाते थे. आज रेमंड फैशन और फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में अग्रणी कंपनी है.
210 मिलियन डॉलर के रेवेन्यू वाले रेमंड समूह ने रेमंड, पार्क एवेन्यू,
पार्क्स, कलर प्लस जैसे कपड़ों के ब्रांड्स को जन्म दिया. रेमंड समूह के
वर्तमान चेयरमैन हैं गौतम सिंघानिया.
10. टाटा समूह
टाटा समूह की प्रसिद्धि सिर्फ़ भारत में नहीं, दुनिया के कई देशों में
है. 1868 में जमशेदजी टाटा द्वारा शुरू की गयी ये कंपनी दुनिया में भारतीय
उद्योग जगत का उभरता हुआ चेहरा है. टाटा समूह के अंतर्गत 32 कंपनियां आती
हैं जिनका कुल रेवेन्यू 6 ट्रिलियन डॉलर है. टाटा ग्रुप ने करीब 4,55,947
लोगों को रोज़गार दिया है. इनकी मुख्य कंपनियां हैं टाटा मोटर्स, टाटा
स्टील, टाटा पावर, ताज ग्रुप ऑफ़ होटल्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विस, टाइटन
इंडस्ट्री इत्यादि. व्यापार के अलावा टाटा समूह सामजिक कार्यों में भी आगे
रहता है.
इनके अलावा और भी कई पारिवारिक समूह हैं जो कि भारतीय उद्योग की बढ़ोतरी
में अपना योगदान दे रहे हैं. इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर
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