प्राकृतिक आपदाओं पर की गई 10 भविष्यवाणियां, जिन्हें हम कभी सच होते नहीं देखना चाहेंगे
हमारी दुनिया की बनावट कुछ ऐसी है कि इसके सारे इलाके समतल मैदान,
पर्वत, समंदर, नदियों और जंगलों के बीच बंटे हुए हैं. और इनकी बनावट की वजह
से ही इन्हें अलग-अलग मौसमों और आपदाओं का सामना करना पड़ता है. इन पर काम
करने वाले पर्यावरणविद् बताते हैं कि प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से 21वीं
सदी सभी को चौंका देगी, जहां दुनिया के विभिन्न इलाकों में लोगों को काफ़ी
कुछ देखना और सहना पड़ सकता है. तो पेश हैं 21वीं सदी की 10 सम्भावित और
त्रासद भविष्यवाणियां जो आपकी रातों की नींद चुरा लेंगी.

अगस्त 2014 में आइसलैंड मौसम विज्ञान ऑफिस द्वारा जारी किए गए विशेष एलर्ट के कुछ दिनों के भीतर ही यह ज्वालामुखी फट पड़ा. इस ज्वालामुखी के आस-पास आने वाले भूकम्पों की वजह से इसका पूरा अंदेशा था कि यह जल्द ही फटेगा जो सच भी साबित हुआ, जिस पर वैज्ञानिकों और लोगों का कहना था कि यह विस्फोट आस-पास की बर्फ को पिघला देगी, जिससे वातावरणीय बैलेंस बिगड़ सकता है.

Source: volcanocafe



2012 में वर्जिनिया इंस्टिट्यूट ऑफ मरीन साइंस के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर जॉन बून ने एक विस्तृत रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि समंदर का लेवल प्रति वर्ष 0.3 मिलीमीटर बढ़ता है. अब आप ख़ुद ही सोचें कि ये समंदर का बढ़ता जलस्तर क्या-क्या तबाह कर सकता है.



सोलर स्टॉर्म से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणें पृथ्वी के पूरे वातावरण को तबाह करने की क्षमता रखती हैं. 2012 में एक सोलर स्टॉर्म उठा था जो पृथ्वी से टकराने के बजाय अंतरिक्ष में चला गया था. मगर यह ज़रूरी नहीं है कि हम हर बार इतने ही भाग्यशाली साबित हों. अब हम-आप तो बस ईश्वर पर ही विश्वास रख सकते हैं कि वही चीज़ों को बदल दे.

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1. जंगली आग, यूनाइटेड स्टेट्स, 2015-2050
हारवर्ड स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड अप्लाइड साइसेंस (SEAS) में कार्यरत वातावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि 2050 तक अमरीका के जंगलों में लगने वाली आग की मियाद तीन सप्ताह तक हो सकती है. और बात यहीं नहीं रुकने वाली कि इस आग से अमरीकी जंगलों का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो जाएगा. इस आग से उठने वाला धुंआ वातावरणीय संतुलन को बिलकुल ही ख़राब कर सकता है.2. बरदरबंगा ज्वालामुखी, आइसलैंड, 2014
यह भविष्यवाणी इसकी घोषणा के कुछ सप्ताहों के भीतर ही सच साबित हो गई.अगस्त 2014 में आइसलैंड मौसम विज्ञान ऑफिस द्वारा जारी किए गए विशेष एलर्ट के कुछ दिनों के भीतर ही यह ज्वालामुखी फट पड़ा. इस ज्वालामुखी के आस-पास आने वाले भूकम्पों की वजह से इसका पूरा अंदेशा था कि यह जल्द ही फटेगा जो सच भी साबित हुआ, जिस पर वैज्ञानिकों और लोगों का कहना था कि यह विस्फोट आस-पास की बर्फ को पिघला देगी, जिससे वातावरणीय बैलेंस बिगड़ सकता है.
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3. मेगाथ्रस्ट भूकम्प, चिली, 2015-2065
2014 अप्रैल में चिली गणराज्य के भीतर आए 8.2 मैग्निट्यूड के भूकम्प ने कुछ ऐसी दरारें पैदा कर दी हैं कि, भविष्य में 8.5 मैग्निट्यूड के भूकम्प की सम्भावना जताई गयी है. आपको ये भी बताते चलें कि पिछले भूकम्प की वजह से चिली भूस्खलन और सुनामी जैसी भयावह त्रासदियों की चपेट में आ गया था.4. दोहरा भूकम्प, जापान, 2017
डॉक्टर मसाकी किमूरा, जो कि जापान के रेयूकिस यूनिवर्सिटी के अवकाशमुक्त प्रोफेसर हैं, कहते हैं कि जैसा भूकम्प जापान ने सन् 2011 में झेला था ठीक वैसा ही भूकम्प सन् 2017 में सम्भावित है. पिछले भूकम्प की तीव्रता 9 मैग्निट्यूड थी और सम्भावित भूकम्प की तीव्रता भी 9 मैग्निट्यूड रहने की आशंका है. डॉक्टर किमूरा यह भी बताते हैं कि उन्होंने पिछले भूकम्प से चार साल पहले ही उस भूकम्प की भविष्यवाणी कर दी थी. अब सोच लीजिए कि फ़िर से कितनी बड़ी तबाही इस राष्ट्र को अपने आगोश में लेने के लिए बेताब है.5. माउंट फूजी ज्वालामुखी, जापान, 2015-2053
जापान जिसे भूकम्प और ज्वालामुखी के राष्ट्र के तौर पर जानते हैं, ने जब 2011 में भूकम्प की विभिषिका को झेला था, तब इसके कारण कई ज्वालामुखियों में हलचल पैदा हो गयी थी. जापान में 110 ज्वालामुखी हैं और इनमें से 47 सक्रिय हैं, जिसे लेकर वैज्ञानिकों ने सम्भावना जताई है कि माउंट फूजी नामक इस ज्वालामुखी के फटने की प्रबल सम्भावना है.6. भूकम्प और सुनामी स्पलिट, ऑरेगान, 2015-2065
ऑरेगान सिज़मिक सेफ्टी पॉलिसी ऐडवाइजरी कमीशन के लिए दिन-रात काम करने वाले 150 वॉलंटियर बताते हैं कि 8 से 9 मैग्निट्यूड के भूकम्प और उसके बाद आने वाले सुनामी की वजह से अगले पचास वर्षों के भीतर भारी तबाही सम्भावित है. इस तबाही में हजारों लोगों की जान जा सकती है. कसम से इसे पढ़ कर ही रूह कांप जा रही है.7. पूर्वी तट का डूब जाना, अमरीका, 2050-2100
2012 के अक्टूबर में आने वाले हरिकेन सैंडी ने कई शहरों को पानी से पाट दिया था. हालांकि फिलवक्त के समुद्री ट्रेंड से यह ज़ाहिर होता है कि, यदि यही हाल रहा तो 2050 तक कई शहर पानी में समा जाएंगे.2012 में वर्जिनिया इंस्टिट्यूट ऑफ मरीन साइंस के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर जॉन बून ने एक विस्तृत रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि समंदर का लेवल प्रति वर्ष 0.3 मिलीमीटर बढ़ता है. अब आप ख़ुद ही सोचें कि ये समंदर का बढ़ता जलस्तर क्या-क्या तबाह कर सकता है.
8. अब तक की सबसे बड़ा सुनामी, कैरिबियाई, अज्ञात
यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के डॉक्टर सिमोन डे और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के डॉक्टर स्टीवेन वार्ड इस बात की भविष्यवाणी करते हैं कि, कैनरी द्वीप के ‘कंबर विजा ज्वालामुखी’ के फटने की वजह से अब तक के इतिहास की सबसे बड़ी सुनामी आ सकती है. जिसकी वजह से भारी भूस्खलन होने की सम्भावना है और भारी मालोअसबाब की तबाही होगी.9. “द बिग वन” कैलिफोर्निया, 2015-2045
अमरीकी जियोलॉजिकल सर्वे ने इस बात को जगजाहिर किया है कि अगले एक दशक में इस बात की प्रबल सम्भावना है कि 8.0 या फ़िर उससे अधिक मैग्निट्यूड का भूकम्प कैलिफोर्निया को इसके आगोश में ले सकता है, जिसका पूरे कैलिफोर्नियावासी सांस रोके प्रतिक्षा कर रहे हैं. कहा तो यह भी जा रहा है कि यह भूकम्प पूरे कैलिफोर्निया को नेस्तोनाबूत कर देगा.10. मेजर सोलर स्टॉर्म
पृथ्वी को बुरी तरह तबाह कर देने की क्षमता रखने वाला हमला पृथ्वी के भीतर से नहीं बल्कि सूरज की तरफ़ से आएगा. ऐसा विशेषज्ञों का कहना है.सोलर स्टॉर्म से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणें पृथ्वी के पूरे वातावरण को तबाह करने की क्षमता रखती हैं. 2012 में एक सोलर स्टॉर्म उठा था जो पृथ्वी से टकराने के बजाय अंतरिक्ष में चला गया था. मगर यह ज़रूरी नहीं है कि हम हर बार इतने ही भाग्यशाली साबित हों. अब हम-आप तो बस ईश्वर पर ही विश्वास रख सकते हैं कि वही चीज़ों को बदल दे.
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