भारत के 15 कुख्यात गैंगस्टर्स के बारे में ये अंजानी बातें जान कर आप हैरत में रह जायेंगे

70 से 90 के दशक में, भारत में गैंगस्टर कल्चर अपने चरम पर था. वो समय था, जब मुंबई की झोपड़ियों और चौलों में पनप रहे थे अपराध की दुनिया के सबसे बड़े नाम. इन सबकी शुरुआत छोटी-मोटी चोरियों से हुई थी, जैसे ब्लैक में फ़िल्म के टिकट बेचना वगैरा. लेकिन धीरे-धीरे इनकी महत्वाकांक्षाएं आकाश को छूने लगीं और ये बन गए, मुंबई अंडरवर्ल्ड के बेताज बादशाह. लेकिन कई बातें इन गैंगस्टर्स के बारे में आपको नहीं पता होंगी. उन पर नज़र डालते हैं.

1. दाऊद इब्राहिम

अगर आप भारतीय हैं तो दाऊद इब्राहिम का नाम ज़रूर सुना होगा. डी कंपनी शुरू करने के बाद, दाऊद जुर्म की दुनिया का इतना बड़ा नाम बन गए कि सबसे खतरनाक अपराधियों की लिस्ट में उनका नाम तीसरे नंबर पर है. सुना है कि दाऊद की पहुंच अल-क़ायदा तक है और ओसामा-बिन-लादेन से भी मिले हुए हैं. कुछ लोगों का मानना है कि दाऊद को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी, ISI, आसरा देती है और इसीलिए आज तक दाऊद पकड़ में नहीं आये हैं. 2008 के मुंबई ब्लास्ट में भी दाऊद का नाम है, साथ ही 1993 मुंबई बम धमाकों के पीछे भी उनका ही दिमाग था.
हाल ही में, पूर्व भारतीय क्रिकेटर, दिलीप वेंगसरकर ने खुलासा किया कि एक मैच के पहले दाऊद, इंडियन टीम के ड्रेसिंग रूम में आये और कहा कि अगर हमारी टीम, पाकिस्तानी टीम को बुरी तरह से हरा देगी तो वो सारे प्लेयर्स को एक आलिशान कार गिफ़्ट करेंगे.

Source: india

2. अबु सलेम

कहा जाता है कि अबु सलेम ने ही संजय दत्त को हथियार दिए थे. अबु सलेम का नाम बॉलीवुड की गलियों में दबी आवाज़ों में लिया जाता है क्योंकि सलेम, बॉलीवुड स्टार्स से रुपये ऐंठने में उस्ताद हैं. सुनने में आता है कि अबु सलेम के आदमियों ने ही मनीषा कोइराला के पर्सनल असिस्टेंट और टी-सीरीज़ के मालिक, गुलशन कुमार का क़त्ल किया था. उनकी लिस्ट में और भी सितारों के नाम हैं, जिनमें से सबसे जाने-माने हैं आमिर खान, आशुतोष गोवारिकर और राकेश रोशन.
अबु सलेम के पिता वकील थे. लेकिन सलेम ने गैंगस्टर बनने से पहले, टैक्सी ड्राइवर, डिलीवरी बॉय, सेल्समेन, रियल एस्टेट एजेंट का काम भी किया है. लेकिन जल्द ही उनका सामना हुआ दाऊद इब्राहिम से और वो बन गए दाऊद का दाहिना हाथ. अबु सलेम दाऊद के लिए हथियारों की डिलीवरी किया करते थे और 1993 मुंबई ब्लास्ट में उनका भी नाम था.

Source: ibnlive

3. टाइगर मेमन

टाइगर मेमन का नाम 'टाइगर' इसलिए पड़ा क्योंकि एक बार पुलिस उनका पीछा कर रही थी और टाइगर अपनी कार, 100 से ज़्यादा की रफ़्तार पर भगा रहे थे. स्वाभावित है कि पुलिस टाइगर को पकड़ नहीं पायी.
1993 मुंबई बम ब्लास्ट में टाइगर मेमन मुख्य आरोपी हैं. 1989 में उनके घर पर कस्टम अधिकारियों ने रेड करी जहां से 8 सोने के बिस्कुट मिले. इससे पहले की कस्टम अधिकारी उन्हें जब्त कर पाते, टाइगर ने फ़िल्मी अंदाज़ में कहा कि 'मेरा नाम टाइगर है और गलती से भी ये सोने के बिस्कुट लेना मत'. फिर क्या था, टाइगर ने अपना सर उस कस्टम अधिकारी की नाक पर दे मारा और वहां से भाग गए. इस वारदात के बाद से उनका नाम प्रसिद्ध हो गया.

Source: deccanchronicle

4. छोटा राजन

छोटा राजन दाऊद का पुराना साथी था और उसका बाहिना हाथ भी. लेकिन 1988 में छोटा राजन देश छोड़ कर चला गया और तब से दाऊद और छोटा राजन में छत्तीस का आंकड़ा है. छोटा राजन और दाऊद के अलग होने के बाद दोनों गुटों के बीच घमासान गोलीबारी भी हुई है. एक कहानी के अनुसार, बैंगकॉक में छोटा राजन ने दाऊद के एक गुर्गे को अपने होटल रूम में झांसा दे कर बुलाया और उसको तब तक टार्चर किया जब तक उसकी मौत नहीं हो गयी. 2002 में दाऊद ने बदला लेने के लिए राजन को ख़त्म करने की ठानी, लेकिन राजन एक कदम आगे निकला. उसने दाऊद के करीबी, शरद शेट्टी का ख़ात्मा कर दिया जिससे दाऊद को बड़ा झटका लगा. 2002 की मशहूर फ़िल्म 'कंपनी' में विवेक ओबेरॉय का किरदार, 'चंदू', छोटा राजन से मेल खाता है.

Source: mid-day

5. बड़ा राजन

70 और 80 के दशक में बड़ा राजन ने फ़िल्मों की टिकट ब्लैक करके खूब पैसा बनाया. दाऊद के गैंग में भर्ती होने के पहले छोटा राजन, बड़े राजन के लिए काम करता था और वहीं से उसे ये नाम मिला. असल में बड़ा राजन ने दाऊद को मुंबई अंडरवर्ल्ड का डॉन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी. मुंबई लोकल में सफ़र करते समय, दुश्मन गैंग के एक मेंबर ने बड़ा राजन पर चाकू से भी वार किया हुआ है. उस हमले से तो वो बच गए लेकिन अंत में एक ऑटो ड्राइवर, चंद्रशेखर सफालिका ने बड़ा राजन की 50 लाख की सुपारी लेकर उनकी हत्या कर दी. 1991 की मलयालम फ़िल्म, अभिमन्यु, बड़ा राजन के जीवन पर ही बनी है.


Source: desinema

6. हाजी मस्तान

हाजी मस्तान सिर्फ़ कुख्यात ही नहीं, भारत के सबसे खौफ़नाक गैंगस्टर भी थे. 20 साल तक हाजी मस्तान ने मुंबई पर एक तरफ़ा राज किया लेकिन उनकी कभी किसी से लड़ाई नहीं हुई. बॉलीवुड फिल्मों के शौक़ीन, हाजी मस्तान ने तस्करी का पैसा फ़िल्में बनाने में भी लगाया था. ज़ाहिर है कि उनकी दोस्ती बॉलीवुड के बड़े सितारों से भी हो गयी थी जैसे अमिताभ बच्चन, धर्मेन्द्र, दिलीप कुमार, राज कपूर, संजीव कुमार और फ़िरोज़ खान. 1975 की फ़िल्म दीवार और Once upon a time in Mumbai हाजी मस्तान की ज़िंदगी से प्रेरित है.

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7. रवि पुजारी

हाल ही में खबर थी कि रवि पुजारी शाहरुख़ खान की फ़िल्म हैप्पी न्यू ईयर के ओवरसीज़ राइट्स लेना चाह रहे थे. पुजारी काफ़ी चालाक गैंगस्टर हैं जो ज़्यादा नज़रों में नहीं आते. इनके बारे में ज़्यादा जानकारी किसी के पास नहीं है, बस खबर ये है कि एक समय में पुजारी छोटा राजन के लिए काम किया करते थे. अफ़वाह ये है भी है कि रवि पुजारी ने अपने आदमियों को महेश भट्ट का क़त्ल करने का हुक्म दिया था. इसके अलावा उसने शाहरुख़ खान के ऑफिस और फ़रहा खान के घर के बाहर गोलीबारी करने का भी आदेश दिया था.


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8. वरदाराजन मुदालियर

पुराने दिनों में, वरदाराजन मुदालियर ताकतवर और खौफ़नाक गैंगस्टर्स में से एक माने जाते थे. उन्होंने कुली के रूप में अपने जीवन की शुरुआत की थी, फिर हाजी मस्तान के साथ मिल कर डॉक पर सामान चुराने का काम करने लग गए. इसके बाद वो जुर्म की दुनिया की दलदल में धंसते ही चले गए. सुपारी लेने से लेकर ज़मीन खाली कराने तक और ड्रग्स की तस्करी जैसे अपराधों में मुदालियर का नाम था. दिलचस्प बात ये है कि वरदाराजन, गरीबों की बहुत सहायता करते थे और इसीलिए माटुंगा और धारावी की तमिल बस्तियों में रहने वाले लोग उन्हें भगवान से कम नहीं मानते.

Source: dnaindia

9. करीम लाला

ये वो शख़्स है जिसने 'इंडियन माफ़िया' की शुरुआत की थी. करीम लाला था मुंबई का असली डॉन. अफ़ग़ानिस्तान में जन्में करीम लाला के डर से लोग थर-थर कांपा करते थे, लेकिन लाला गरीबों और ज़रूरतमंदों की बहुत सहायता किया करते थे. करीम लाला वसूली, दारू और जुएं के अड्डे और हीरे-जवाहरातों की तस्करी के लिए मशहूर थे.

Source: indiaopines

10. अरुण गावली

गावली पहले माफ़िया सरगना हैं जिन्होनें राजनीति में भी कदम रखा. अपनी पार्टी, अखिल भारतीय सेना की आड़ में गावली ने लोगों का अपहरण किया, उन्हें टार्चर किया, उनसे पैसे लिए और फिर ख़त्म कर दिया. समय-समय पर पुलिस उनके ऑफिस और घर पर छापा मारती, उन्हें गिरफ़्तार करती लेकिन कुछ ही समय में गावली छूट जाते. आखिरकार 2012 में पुलिस ने उन्हें मर्डर के केस में गिरफ़्तार किया जिसके लिए उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा हुई.

Source: thehindu

11. अली बुदेश

बुदेश ऐसे गैंगस्टर रहे हैं जिन्होंने एक जेबकतरे की तरह शुरुआत की थी, लेकिन जल्द ही वो सबसे कुख्यात हफ़्ता वसूली किंग बन गए. कहा जाता है कि जिन लोगों ने बुदेश को हफ़्ता देने से मना किया था उनकी नृशंस तरीके से हत्या कर दी गयी थी. बुदेश ने बिल्डर्स और हीरे के व्यापारियों से लेकर फ़िल्म स्टार्स तक से हफ़्ता मांगा हुआ है.

Source: indiatoday

12. छोटा शकील

दाऊद इब्राहिम का करीबी, छोटा शकील इतना भी छोटा नहीं है. शकील अपनी बहादुरी की वजह से जाना जाता है. एक बार, कस्टम अधिकारी ने शकील को तस्करी के जुर्म में पकड़ा, लेकिन शकील ने समुद्र में छलांग लगा दी और बच निकले. लेकिन कहानी यहां ख़त्म नहीं होती है. बचने के बाद, वो अपने आदमियों के साथ उस कस्टम अधिकारी के पास फिर गए और उसे सामान वापस देने का हुक्म दिया, नहीं तो इस बार कस्टम अधिकारी की बारी थी समुद्र में जाने की.

Source: indiatvnews

13. शरद शेट्टी

शरद शेट्टी, दाऊद इब्राहिम के लिए उनका क्रिकेट बेटिंग का धंधा चलाते थे. जैसा पहले बताया था कि शरद शेट्टी का क़त्ल छोटा राजन के आदमी ने किया था जिसके लिए उसे 1 करोड़ रुपये भी मिले थे. लेकिन बाद में इस आदमी को पकड़ लिया गया और दुबई ले जा कर मार दिया था.

Source: lawnn

14. शब्बीर इब्राहिम कास्कर

ये थे दाऊद इब्राहिम के बड़े भाई, शब्बीर इब्राहिम कास्कर. दोनों भाइयों ने मिल कर 'डी कंपनी' की शुरुआत की थी. दुश्मन गैंग के हाथों शब्बीर की हत्या के बाद ऐसा भयावह गैंग-वॉर शुरू हुआ जो करीब 10 साल चला. इस गैंग-वॉर में 50 गैंगस्टर्स के साथ उनके परिवारवाले तक ख़त्म हो गए.

Source: name-list

15. एजाज़ लकड़ावाला

लकड़ावाला पहले दाऊद के गैंग का सदस्य था, लेकिन बाद में वो छोटा राजन गैंग में चला गया. दाऊद और छोटा राजन की रंजिश के समय, अफवाह थी कि लकड़ावाला मारा गया है लेकिन उसे 2004 में कनाडा में गिरफ़्तार किया गया.

Source: dnaindia

इन सभी गैंगस्टर्स की ज़िन्दगी बड़ी दिलचस्प गुज़री है. ताकत का पूरा दुरूपयोग इन्होनें किया है और ऐश-ओ-आराम का जीवन भी व्यतीत किया है. लेकिन बुरे काम का अंत बुरा ही होता है. इनमें से आधे मारे जा चुके हैं और बाकी फ़रार हैं. इनके जीवन से जो सीख हमें मिलती है वो ये है कि पेड़ चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए, जब कटता है तो ज़मीन पर ही गिरता है.

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