आज पूरा देश जानना चाह रहा है कि भारत में पिछले 26 सालों में 135 हमले क्यों हुए?

भारत हमेशा से ही शांति प्रिय देश रहा है. इतिहास गवाह रहा है कि भारत ने कभी भी विदेशों में जाकर किसी दूसरे मुल्कों पर हमला नहीं किया है. लेकिन भारत पर विदेशी आक्रमण होते रहे हैं. वर्तमान में भारत एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्र है. फ़िर भी भारत में पड़ोसी मुल्कों द्वारा प्रायोजित हमले होते रहे हैं. इसकी सबसे प्रमुख वजह भारत को अशांत करना है. वैसे तो पड़ोसियों ने भारत को कई जख़्म दिए हैं, लेकिन पिछले 26 सालों में आतंकवादी गतिविधियां काफ़ी तेज़ हुई हैं. सरकारी आंकड़ों की मानें तो पिछले 26 सालों में भारत पर लगभग 136 चरमपंथी हमले हुए हैं.

1. चरमपंथी कौन होते हैं

इनसे जुड़े लोगों का एक ही मंसूबा होता है, किसी भी देश की शांति में खलल पैदा करना, विकास कार्यों को प्रभावित करना और देश की अखंडता को तोड़ना. अतिवादी, आतंकवादी, दिग्भ्रमित लोगों की टोली को चरमपंथी के रूप में समझा जा सकता है.

2. चरमपंथी और भारत में इसका प्रभाव

आज़ादी के बाद से ही भारत में चरमपंथियों ने अपनी दस्तक दे दी थी. स्थिति ऐसी है कि भारत के कई हिस्सों में अलग राज्य की मांग हो रही है. पाकिस्तान और चीन इस तरह के लोगों को खुलेआम आर्थिक मदद दे रहे हैं.

3. सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य

पंजाब ने देश में सबसे ज्यादा 34 आतंकी हमले झेले हैं. गृह मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक जम्मू कश्मीर और दिल्ली में इतने ही समय में 27 और 18 आतंकी हमले हुए हैं. इससे इस धारणा को बल मिलता है कि भारतीय सुरक्षा बल आतंकी हमलों से निपटने से पूरी तरह काबिल नहीं है.

4. भारत में वर्तमान में हमला

हाल ही में पंजाब के पठानकोट में एयरबेस पर हुए हमले में सात सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन ई कुमार भी शामिल हैं. पिछले 26 साल में पूरे भारत में 136 आतंकी हमले हुए हैं. इसमें पठानकोट का हमला भी शामिल है.

5. ज़्यादातर हमले निहत्थे नागरिकों पर हुए हैं. 135 हमलों में से 121 हमले आम नागरिकों पर हुए हैं और 14 हमले वीआईपी पर.

6. 2004 में सबसे ज़्यादा आतंकी हमले हुए हैं

सबसे ज़्यादा आतंकी हमले 2004 में हुए हैं. इस साल करीब 17 हमले हुए जिनमें 170 लोग मारे गए और 350 लोगों से ज़्यादा घायल हुए.

7. अहम सवाल- हमले को रोका क्यों नहीं जाता है?

यह एक ऐसा सवाल है जिसका हल वरिष्ठ सुरक्षाधिकारियों के वकत्वयों के द्वारा समझा जा सकता है.

- एमकेयू के चेयरमैन मनोज गुप्ता अपनी रिपोर्ट में कहते हैं- "ज्यादातर राज्यों में पुलिस बल के पास दंगा-रोधी सुरक्षा के लिए साजो-सामान मौजूद होते हैं, ना कि किसी चरमपंथी हमले का मुकाबला करने के लिए."
-पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह कहते हैं, "भारत में चरमपंथ से लड़ने की कई स्पष्ट नीति नहीं है." गृह मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक इन हमलों में 2000 से ज्यादा लोगों की जानें गईं और 6000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.
 Story Source: BBC HINDI 
Important Inputs: Home Ministery
Image Source: Google Image

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