अमरीश पुरी के कई यादगार किरदारों और अभिनय को याद कर के पूरा भारत खुश होता है
1967 से ले कर 2005 तक 400 से भी ज़्यादा फ़िल्मों में काम कर चुके अमरीश पुरी अपने बड़े भाइयों मदन पुरी और चमन पुरी के नक़्शे-क़दमों पर चलते हुए मायानगरी मुंबई पहुंचे थे. एक्टिंग का कोई ज्ञान न होने की वजह से वो अपने पहले टेस्ट में नाकाम हो गए थे और यह मान बैठे थे कि एक्टिंग-वैक्टिंग उनके बस की बात नहीं है. रोज़ी-रोटी चलाने के उद्देश्य से वो Employees' State Insurance Corporation में एक आम इंसान की तरह नौकरी करने लगे थे, पर एक्टिंग की टीस अब भी उनके भीतर कहीं न कहीं मौजूद थी, जिसे पूरा करने के लिए वो 'पृथ्वी थिएटर' से जुड़े और लेखक 'सत्यदेव दुबे' के सानिध्य में एक्टिंग के गुर सीखने लगे.
बतौर एक एक्टर फिल्मों में आने के लिए अमरीश पुरी को मराठी सिनेमा का सहारा लेना पड़ा और 'शंततु! कोर्ट चालू आहे' से उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की. फिल्म 'रेशमा और शेरा' के रेहमत खान के रोल से बॉलीवुड में कदम रखने वाले अमरीश पुरी को ले कर निर्माता और निर्देशकों का कहना था कि उनका चेहरा सामान्य सा है, जिसकी वजह से वो हीरो नहीं बन सकते. पर अमरीश पुरी इन सब से हताश नहीं हुए और नकारात्मक किरदारों की तरफ अपना रुख किया. तब से ले कर अमरीश ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और बुलंदियों के शिखर पर पहुंचे.
उनके व्यक्तित्व के बारे में उनके बेटे राजीव पुरी कहते हैं कि "पर्दे पर कठोर से दिखने वाले पापा असल ज़िंदगी में बिलकुल इसके विपरीत थे. वो एक हिम्मती इंसान थे, जिन्हें अनुशासन में रह कर हर काम सही तरीके से करना पसंद था". बॉलीवुड के अलावा अमरीश पुरी मराठी, तमिल, पंजाबी, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम और हॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी एक्टिंग के जौहर दिखा चुके हैं.