बच्चों की इन तस्वीरों ने देश-दुनिया के साथ-साथ हर एक की अंतरात्मा को झकझोर दिया

बचपन... एक मौसम, एक नादान मौसम, कुछ एक शरारतें, थोड़ी रुलाई और थोड़ी हंसी के रास्तों से निकलता है ज़िंदगी का ये पड़ाव. लेकिन ज़िंदगी की नांव कई बार बचपन के दौर में आंसुओं की गहराई में भी गोते लगाती है. कहते हैं कि बच्चे असहाय होते हैं. उनको प्यार, स्नेह और वात्सल्य के आंगन में पाला जाता है. पर ऐसे कई उदाहरण हैं जहां बच्चों को असहनीय पीड़ा सहनी पड़ती है. चाहे वो मानसिक रूप से हो, या शारीरिक रूप से.
आंतक की दुनिया में इन्हें Soft Target कहा जाता है. कई बार इन्हें हालातों के सितम, तो कई बार प्रकृति का कोप सहना पड़ता है. समय गवाह है जब-जब बचपन रोया, सारा ज़माना ही कुपित हुआ है.

1. जब उम्मीदों के रास्ते एक आईना आ गया


एक कैंसर पीड़ित बच्चा अपने अरमानों को आईने पर उकेर रहा है.

2. मेरा संगीत तुम्हें सदैव अमर रखेगा


एक ब्राज़िलियन बच्चा अपने आदर्श, अपने शिक्षक को श्रद्धांजलि दे रहा है.

3. बचपन जब ख्वाहिशें तलाशता है


ये तस्वीर नेपाल में मैला ढोने वाले दो बच्चों की है.

4. एक की आंख में सवाल, दूसरी है हालातों से लाचार


एक आठ साल का बच्चा अपने सैनिक पिता के सम्मान में झंडा लेने के लिए आया है. घर आने से कुछ दिन पहले ही इसके पिता की इराक में गोली लगने से मृत्यु हो गई थी.

5. निगाहों में जब ख़ौफ़ बसा हो तो वो कुछ ऐसी हो जाती हैं


ये तस्वीर अफ़गानिस्तान की एक बच्ची की है. इसके भाव को समझना लगभग नामुमकिन सा लगता है.
Source: nationalgeographic

6. लहरों के आगोष में समाया नादान

हाल ही में सीरिया से पलायन के दौरान समंदर आयलान कुर्दी और उसके परिवार को निगल गया.
Source: ibtimes

7. इन आंखों में दर्द दिखता है, दर्द बसता है और दर्द ही रिसता है

सन 1945 में जापान के हिरोशिमा में हुए परमाणु धमाकों की चश्मदीद गवाह हैं इस बच्ची की आंखें. हालांकि ये उसके बाद कुछ देख नहीं पाई लेकिन चीखें हमेशा ज़ेहन में ज़िंदा रहती हैं.

8. क्रब में भी बचपन खुली आंखों से सपने देखता है


भोपाल गैस त्रासदी के बाद बच्चे को दफ़नाते हुए एक तस्वीर.

9. एक भूख से मरता है और दूसरा उसके मरने का इंतज़ार करता है


भूख के कारण दक्षिण सुडान में ये बच्चा मृत्यु की राह पर है.
इस तस्वीर को कैप्चर करने वाले कैमरामैन को पुल्तिजर पुरस्कार से नवाज़ा गया लेकिन अपने अंदर चलती इस दास्तां को वो कभी भूला नहीं पाये और आख़िर उन्होंने आत्महत्या कर ली.

10. मैंने इन जागती आंखों में सदियों से न सोई हुई नींद देखी है


साइबिरिया के जंगलों में लगभग 11 दिनों तक लापता रहने के बाद ये बच्ची वापिस आई.

11. अब बच्चों को नादानी से नहीं, बल्कि संदिग्धता की नज़र से भी देखते हैं कुछ बाशिंदे


कैमरे को बंदूक समझने के बाद इस बच्ची ने आदतन अपने हाथ उठा लिये.

12. वक़्त के सितम से कुछ हाथों पर लकीरें भी धुंधली पड़ जाती हैं


ये तस्वीर अकाल में ज़िंदगी गुजारते एक बच्चे की है.

13. तुम जाते-जाते मेरे सलाम को अपना कुछ सामान समझते लेते जाना


एक सैनिक की क्रब पर उसे सम्मान सैल्यूट देता एक बच्चा.

14. जिन्हें किसी का सहारा नहीं होता उनकी बांहों में बहुत जगह होती है


चीन में भूकंप आने के बाद इस बच्चे का गांव तबाह हो गया था. दो तनहा दिलों को पनाह एक-दूजे की बांहों में मिल गई.

15. ज़ंजीरों से कदम को थमाया नहीं जा सकता


चीन में एक दंपत्ति अपने बच्चे का ध्यान नहीं रख सकता. इस बच्चे के माता-पिता के पास रहने को बहुत कम जगह है. थोड़े दिन पहले इसकी बहन भी लापता हो गई थी. इसी कारणवश इस बच्चे को ज़ंजीरों से बांध रखा है.

16. मैंने अपने आंगन में डरावने साये चलते देखे हैं लेकिन तुम्हें नहीं देखने दूंगी मेरी गुड़िया...


ग़ाज़ा की एक बच्ची अपनी गुड़िया को वो सब नहीं दिखाना चाहती जो वो देख रही है.
Source: pinterest

17. राह चलते भूख तुम ने देखी न होगी! लेकिन मेरे रास्ते वो अकसर काट देती है


1950 के दशक के दौरान बेल्जियम में एक ह्यूमन ज़ू में बच्चे को खाना देते लोग.
Source: popularresistance

18. धरती की नज़र से ही आसमान की कीमतें पता चलती हैं

इस बच्चे को Cerebral Pelsy (मस्तिष्क पक्षाघात) की बीमारी है. माता-पिता न होने के कारण इसकी दादी खिलौने बेचने जाने से पहले इसें ज़ंजीरों से बांध कर जाती हैं.

19. तबाही के मौसम में रोता बचपन


एक रोते हुए शिशु की तस्वीर.

20. कुछ कदमों के निशान रास्ते बताते नहीं बल्कि राहें भुला देते हैं


ख़ून से भरे ये कदम रावांड़ा में हुए जनसंहार के समय के हैं.
इतना सब कुछ देखने के बाद मेरे मन से बस इतना ही निकलता है...


जीने दो बचपन को
खुली हवा की बांहों में
चलने दो लड़खड़ाते से कदमों को
अनजान और बेबाक राहों में
मुस्कान दो तुम इन्हें
क्योंकि ख़ौफ़ तो बहुत है ज़माने में...


Popular posts from this blog

>> इन बेहूदा अफ़वाहों का सच जानने के बाद आप ख़ुद ही अपने बाल नोचेंगे

हर कोई करोड़पति बन सकता है, ये 8 लोग इसका जीता-जागता सबूत हैं

10 ऐसे बड़े झूठ जिन्होंने पूरे इंडिया को बेवक़ूफ़ बना दिया