दुनिया की सबसे कठिन जगह में भी रहते हैं ये जवान, करते हैं भारत की सुरक्षा

हम चैन की नींद इसलिए सोते हैं क्योंकि हमें पता है कि देश की सुरक्षा करने के लिए हमारे देश के जवान जाग रहें हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया की सबसे कठिन जगहों पर भी हमारी सेना पूरी मुस्तैदी से अपने फ़र्ज को अंजाम देती है. सियाचिन ऐसी ही एक सरहद है जहां कि तकलीफ़ें आपके रोंगटे खड़े कर देंगी. और जहां आप जाने की भी सोच नहीं सकते, वहां हमारे ये सिपाही रहते हैं. आईए आपको सियाचिन की उन तकलीफ़ों से रूबरू करवाते हैं जिनसे हमारे जवान रोज़ दो-चार होते हैं.

1. त्वचा की समस्या

सियाचिन में अगर आपकी स्किन ढकी ना हो तो वो ठण्ड से जल सकती है. और अगर आप ने किसी भी चीज़ को छुआ तो उससे आपकी स्किन चिपक जाएगी जिससे निकलना काफ़ी दर्द भरा हो होता है.

2. सांस की समस्या

सियाचिन में सामान्य जगह के हिसाब से सिर्फ़ 10 प्रतिशत ही ऑक्सिज़न होती है. इसी से आप वहां की समस्या समझ सकते हैं.

3. 54000 फ़ीट की ऊंचाई पर रहना

इंसान का शरीर इतनी ऊंचाई पर रहने के लिए नहीं बना. इतनी ऊंचाई पर रहने से नींद न आने, भूख न लगने जैसी बीमारियों से इंसानी शरीर ग्रस्त हो जाते हैं. इतना ही नहीं, बल्कि इतनी ऊंचाई पर रहने से आपको भूलने की बीमारी भी हो सकती है.

4. ठण्ड

इतनी ऊंचाई पर जहां बहता हुआ पानी भी जम जाता है, वहां हमारे ये जवान बड़ी मुस्तैदी से डटे रहते हैं.

5. बर्फ़ीला तूफ़ान

यहां बर्फ़ीला तूफ़ान आम है. हवा की रफ़्तार इन तूफ़ानों में 100 कि.मी. के करीब की हो जाती है.

6. Snowfall

बर्फ़ गिरना भी सियाचिन के लिए कुछ नया नहीं होता. और जब बर्फ़ 3 फ़ीट से ज़्यादा गिरे तब मुश्किलें और बढ़ जाती हैं.

7. सैलरी

हम अपनी सैलरी से कभी खुश नहीं होते. लेकिन ज़रा इन जवानों की सोचिए, ये सैलरी के लिए नहीं अपने देश के लिए काम करते हैं.

8. आराम कहां हैं?

वहां रहने वाले जवानों के लिए आराम कहां हैं... मस्ती के लिए जब वक़्त मिले तो ये लोग थोड़ा खेल लेते हैं.

9. खाना

ताजा खाना तो जैसे इन जवानों के लिए सपने जैसा है.

10. कैंप तक पहुंचने की कठिनाई

गस्त लगाना औऱ वापिस अपने कैंप तक आना भी अपने आप में जानलेवा हो सकता है.

11. मौसम से बड़ा दुश्मन कोई और नहीं

करीब 846 जवान वहां शहीद हो चुके हैं, जिसमें से ज़्यादातर जवानों की मरने की वजह मौसम बना है.

12. शहीदों की लिस्ट यहां बहुत लंबी है

नुबरा नदी के किनारे शहीद स्मारक एक लम्बी लिस्ट से भरी है. जिसमें वहां जान गंवाने वाले सैनिकों के नाम लिखे हैं.

13. दूर-दूर तक कुछ नहीं

सफ़ेद चादर से ढके सियाचिन में किसी इंसान को भी देखना एक अजूबा हो सकता है.

14. सैनिकों को तैयार करना

आर्मी की मानें तो यहां 80 प्रतिशत वक्त जवानों को इस कठिन माहौल में ढालने में लग जाता है.

15. चलना तक मुश्किल

3 से 4 फ़ीट या कभी कभी इससे भी ज़्यादा बर्फ़ में चलना और गश्त करने की मुश्किल हम सिर्फ़ सोच ही सकते हैं.

16. देश के लिए जीना

ये जवान हमारे कल के लिए अपना आज निछावर कर देतें हैं.

देश और हमारे लिए इतनी मुश्किलों को सहने वाले हमारे जवानों को ग़ज़ब पोस्ट सलाम करता है. और ये चाहता है कि आप इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें. ताकि हर किसी को पता हो उसके सुकून की नींद का श्रेय इन जवानों को जाता है.
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