
अंधेरी
रात है, पूरा परिवार नींद की चादर ओढ़े सो रहा है. तभी, कहीं से, एक बच्चे
की हंसने की आवाज़ आती है. लेकिन आश्चर्य की बात तो ये है कि उस घर में कोई
बच्चा है ही नहीं.
ये किसी फ़िल्म की कहानी नहीं, उडुपी जिले की सत्य घटना है. गोविंदा और
उसका परिवार उस समय चकित रह गया जब उनके घर के नारियल के पेड़ से किसी
बच्चे के हंसने की आवाज़ आने लगी.
घबराकर वो एक ज्योतिष के पास गए जिसने बताया कि एक बुरी आत्मा उनके
परिवार को परेशान कर रही है और मंत्र-जाप से वो भाग जायेगी. मरता क्या न
करता, गोविंदा ने उस ज्योतिष को आत्मा भगाने के लिए कह दिया. लेकिन पूजा के
बाद भी उस बच्चे की हंसी उस पेड़ से आती रही.
फिर एक दिन, नारियल के पेड़ पर चढ़ने वाला व्यक्ति, सीना पुजारी उनके घर
आया. उसने बताया कि एक मर्तबा नारियल काटते वक़्त उसने अपने मोबाइल फ़ोन को
प्लास्टिक में लपेट कर पेड़ पर रख दिया था. फिर जल्दीबाज़ी में वो उसे ले
जाना भूल गया. शाम को घर पहुंच कर उसे एहसास हुआ कि उसका फ़ोन खो गया है. तब
से वो हर दिन किसी न किसी के फ़ोन से अपने मोबाइल पर कॉल करने लगा और बच्चे
की हंसी उसकी रिंगटोन है!
जैसे ही पुजारी ने अपना फ़ोन पेड़ से उतारा, गोविंदा के परिवार को डराने
वाला भूत भी गायब हो गया. अचरज की बात तो ये है कि लॉजिक से काम लेने की
बजाये, गोविंदा ने ज्योतिष पर ज़्यादा विश्वास किया. सेनोरीटा, बड़े-बड़े
देशों में ऐसी छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं.
*लेखक अब शनिवार एन्जॉय करने जा रहा है. टाटा*