पाकिस्तान में हिंदू त्यौहारों के नाम पर नहीं होती है कोई छुट्टी
भारत-पाक के विभाजन के 6 साल बाद की तस्वीर तारीक फ़तेह (जो एक स्तंभकार हैं) ने अपनी फेसबुक वॉल पर शेयर की, मसला ये था कि 1953 में पाकिस्तान में हिंदू त्यौहारों पर छुट्टियां मिलती थी. मोहम्मद अली जिन्ना के आश्वासन के चलते बहुतेरे लोग पाकिस्तान में बस गये थे, लेकिन आज उनके क्या हाल हैं, ये आप भी जानते हैं और हम भी.

इस्लामीकरण की नींव
मोहम्मद अली जिन्ना ने विभाजन के वक़्त हिंदुओं को धर्मनिरपेक्षता को
लेकर जो आश्वासन दिया था वो उनके मरते ही मर गया. पाकिस्तान का इस्लामीकरण
होने लगा. पाकिस्तान के छठे राष्ट्रपति जनरल ज़िया उल हक के राज में
अहमदिया मुस्लमानों पर अत्याचार हुआ. उन्हें मुस्लमान मानने से ही इंकार कर
दिया गया. हिंदुओं पर सितम किए गये, कल तक जो लोग एक साथ रहते थे, आज वो
अपनों पर ही ज़ुल्म ढाने लगे.

अब दूरियां गहरी होने लगी
पहली तस्वीर में जहां भारतीय त्यौहारों का ज़िक्र किया गया है वहीं
वर्तमान समय में पाकिस्तान कैलेंडर में भारतीय त्यौहारों को बिलकुल भी
मान्यता नहीं दी गई है. लगता है खान अब्दुल गफ्फार अली खान और जिन्ना के
आदर्शों को पाकिस्तान के हालिया वज़ीरेआज़म भूल चुके हैं. भले ही वो
अल्पसंख्यकों के हित की बात करते हो लेकिन तारीखें तो यही दिखा रही हैं कि
वहां अल्पसंख्यक नज़रअंदाज़ किए जा रहे हैं.Source: topyaps