वाघा बॉर्डर पर पाकिस्तान के पहले सिख सैनिक ने भारतीय सेना से 'हाथ' नहीं,'दिल' मिलाया
इस बार वाघा बॉर्डर पर हर शाम होने वाली बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी के लिए पाकिस्तान रेंजर्स की तरफ़ से 'अमरजीत सिंह' नाम के एक सिख युवक को शामिल किया गया. गुरुवार की शाम जब यह सिख जवान सेरेमनी के लिए आया तो दोनों मुल्कों के लोगों ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया. पाकिस्तान में इस सिख युवक को एक रोल मॉडल की तरह देखा जाता है. अमरजीत सिंह के बारे में कई और बातें हैं जिन्हें जान कर आप हैरान हो जाएंगे.
कौन हैं अमरजीत?
अमरजीत पाकिस्तानी फौज में शामिल हुए पहले सिख हैं. उनसे पहले कोई सिख पाकिस्तानी आर्मी में नहीं था.क्यों ख़ास रही बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी?
इतिहास में पहली बार हुआ जब पाकिस्तान रेंजर्स की ओर से किसी सिख युवक को ये मौका मिला.बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी क्या होती है?
वाघा बॉर्डर पर 1959 से बीटिंग द रिट्रीट की शुरुआत हुई थी. इस मौके पर दोनों देशों के हज़ारों लोग शामिल होते हैं. यह वाघा बार्डर पर हर शाम दोनों देशों के झंडे उतारने का प्रोग्राम होता है.अपने वतन की सेवा में हाजिर हैं
अमरजीत पाकिस्तान के गुरुनगरी ननकाना साहिब के रहने वाले हैं. उन्होंने कहा कि, "वे अपने वतन की सेवा में हाजिर हैं. ड्यूटी के दौरान अगर वे शहीद होते हैं, तो ये उनके लिए फ़क्र की बात होगी."अमरजीत ने हाथ नहीं 'दिल' मिलाया है
वाघा बोर्डर पर मौजूद दर्शक इस बात का इंतज़ार कर रहे थे कि अमरजीत कब भारतीय सैनिकों से हाथ मिलाएंगे. जैसे ही अमरजीत ने भारतीय सैनिकों से हाथ मिलाया, दोनों ओर से ज़ोरदार तालियां बजी. ऐसा लगने लगा कि दो दिल मिल रहे हैं.