
आपने अब तक तमाम देशों के नाम सुने होंगे, जिनकी अपनी पहचान, अपना झंडा,
अपनी करेंसी है. लेकिन कुछ देश ऐसे भी हैं, जिन्हें कोई नहीं जानता। ये
दुनिया में रहकर भी गुमशुदा ही हैं. इनका नाम-पता किसी को नहीं पता. ऐसे
देश अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक फैले हैं. ये बात और है कि इन्हें न
संयुक्त राष्ट्र मान्यता देता है, न ही दूसरे देश.
तो चलिए, सबसे पहले आपको बताते हैं, ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी
में भूगोल के प्रोफ़ेसर निक मिडेलटन के बारे में. उन्होंने एक क़िताब लिखी
है, 'ऐन एटलस ऑफ कंट्रीज़ दैट डोंट एक्ज़िस्ट'. इसमें ऐसे ही तमाम ऐसे
देशों का ज़िक्र है, जो अपनी पहचान की जंग लड़ रहे हैं. इन देशों ने तो
अपना अलग ही संयुक्त राष्ट्र संघ भी बना लिया है.
-दुनिया के सबसे ताक़तवर मुल्क़ अमेरिका में है 'लकोटा रिपब्लिक'. इसकी
जनसंख्या एक लाख है. ये लोग, जो लसोटा सिओक्स जनजाति के हैं, ख़ुद को अलग
देश का नागरिक मानते हैं.

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-ऐसा ही एक और देश अफ्रीका में है. इसका नाम है बरोत्सेलैंड, जिसकी
आबादी है, क़रीब पैंतीस लाख. अब इस इलाक़े के लोग ज़ाम्बिया से अलग होने की
लड़ाई लड़ रहे हैं.
-ओगोनीलैंड के लोग नाइज़ीरिया से अलग होना चाहते हैं. बरोत्सेलैंड और
ओगोनीलैंड, दोनों ने साल 2012 में ख़ुद को आज़ाद घोषित कर दिया था.
-ऑस्ट्रेलिया में तो एक परिवार ही अलग देश होने का दावा करता है. खेती
करने वाले इस परिवार ने अपने देश का नाम 'हट रिवर' रखा है. उन्होंने अचानक
ख़ुद के ऑस्ट्रेलिया से आज़ाद होने का एलान कर दिया. अपनी करेंसी बना ली.
मिडेलटन बताते हैं कि इस नन्हें से देश में स्टैम्प का कारोबार चमक उठा है.
ऑस्ट्रेलिया में ऐसा ही मुल्क़ है अटलांटियम. इसकी राजधानी कॉनकार्डिया
में इंसानों से ज़्यादा कंगारू रहते हैं. मगर, अटलांटियम की कोई सरहद नहीं.
मतलब, कहीं भी, कोई भी इसका नागरिक बन सकता है.
इन देशों के बारे में पढ़कर एक बात तो कह सकते हैं कि दुनिया तेजी से
बदल रही है. इन देशों ने एक नई तरह की बहस को जन्म दिया है. हो सकता है कि
आगे चलकर दुनिया के नक़्शे में चौंकाने वाले बदलाव हों. ये भी हो सकता है कि
भविष्य में ऐसे तमाम इलाक़े, देशों में तब्दील हो जाएं, जिनका हमने नाम तक
न सुना हो.
Article Source: BBC