200 कैदियों ने 40,000 रुपये इकठ्ठा कर के करवाई कैदी दोस्त की बहन की शादी

हर अपराधी बचपन से अपराधी नहीं होता है. समय या विषम परिस्थितियों की वजह से उसे अपराध करने पर मजबूर होना पड़ता है. अब ये हमारे उपर निर्भर करता है कि हम अपराधियों को किस नज़रिए से देखते हैं? उनके सीने में भी दिल होता है, उन्हें भी दर्द होता है और हां उन्हें भी अपने परिजनों से प्यार होता है और ये बात साबित की है रीवा के चंद कैदियों ने.
दरअसल, केंद्रीय जेल में मुन्नालाल नाम के एक क़ैदी की बहन की शादी होने वाली थी, ऐसे में उन्हें पैसे की जरूरत थी, जब यह बात जेल के अन्य कैदियों को पता चली तो कैदियों ने आपस में चंदा इकठ्ठा कर करीब 40 हजार रुपए जुटाए, और अपने दोस्त की बहन की शादी के लिए दान में दे दिया.

कोई अनिवार्यता नहीं है

अगर कानून की बात की जाए तो इस मदद के लिए न तो कोई कानून है, न ही कोई अनिवार्यता. फ़िर भी क़ैदी दोस्त और स्टाफ ने पैसे इकठ्ठे किए.

Source: deccanchronicle

ज़ेल प्रशासन खुश है

कैदियों का ऐसा रूप देख कर केंद्रीय जेल के अधिकारी काफ़ी खुश हुए. प्रशासन का मानना है कि आने वाले दिनों में जब यह क़ैदी सजा पूरी कर जेल से बाहर निकलेंगे तो इनका जीवन विकास के रास्ते पर एक सामान्य व्यक्ति की तरह दौड़ने लगेगा.

Source: worldbulletin

बूंद-बूंद से घड़ा भरा

जब क़ैदी मुन्नालाल ने अपनी दिल की बात अन्य दोस्तों को बताई तो सभी लोगों ने तय किया कि उन्हें मिलने वाला पारिश्रमिक का 50 प्रतिशत हिस्सा उनकी बहन की शादी में देंगे. इस तरह से कुल 200 कैदियों ने 40 हज़ार रूपए इकठ्ठा कर लिए.

Source: indianexpress

50 रुपए है मजदूरी

नियम के अनुसार क़ैदियों की प्रतिदिन की मज़दूरी 50 रुपए है. इसके लिए उन्हें 6 घंटे का श्रम करना करना पड़ता है.

Source: thenational
News Source: naidunia

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