65,000 की नौकरी छोड़ बना टैक्सी ड्राइवर. कारण जानने के बाद आप भी इसे सलाम करेंगे!

अगर एक आम इंसान की बात करें तो उसका लक्ष्य यही होता है कि वो पढ़ाई के बाद एक ऐसी नौकरी पकड़े जिससे वो ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कमा कर अपने परिवार को बेहतर ज़िंदगी दे सके. लेकिन मुंबई के विजय ठाकुर इस तरह की सोच रखने वालों से बिलकुल विपरीत हैं. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद विजय ठाकुर 65,000 की नौकरी कर रहे थे, लेकिन उनके साथ एक ऐसी घटना घटी कि उन्होंने अपनी 65,000 की नौकरी छोड़कर एक टैक्सी ड्राइवर बनना ज़्यादा बेहतर समझा. भले ही वो अब टैक्सी चलाकर 10,000 रुपये
महीना कमाते हों, लेकिन वो इससे संतुष्ट हैं. उनके परिवार वालों को विजय का टैक्सी चलाना बिलकुल पसंद नहीं, लेकिन जब आप इस व्यक्ति की टैक्सी चालक बनने की कहानी जानेंगे तो यकीनन आप भी उसे सलाम करेंगे.

Source: timesofindia 
पेशे से इंजीनीयर रह चुके 74 वर्षीय विजय ठाकुर टैक्सी चलाने के साथ-साथ मरीजों को मुफ़्त सेवा भी प्रदान कर रहे हैं. उनका कहना है कि 1984 में उनकी पत्नी का गर्भपात हुआ था, जिसके चलते उन्हें रात के 2 बजे अस्पताल ले जाना पड़ा. पर कोई भी टैक्सी या रिक्शा चालक उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ. ऐसे में विजय ने तय किया कि वो अंत तक कोशिश करेंगे जरूरतमंदों को वक़्त पर अस्पताल पहुंचाने की.

Source: ndtv 
अपने इस पेशे से वो सिर्फ़ 10,000 रुपये महीना कमाते हैं और साथ ही वो ज़रूरतमंद लोगों को फ्री में अस्पताल भी पहुंचाते हैं. वे हमेशा सवारियों को अपना कार्ड भी देते हैं जो उन्हें ज़रूरत पड़ने पर सुबह के 3 बजे भी कॉल कर सकते हैं.

Source: indianexpress 
वे कुछ महीनों पहले हुए एक वाकये का ज़िक्र करते हुए बताते हैं कि सुबह के 2 बजे, उन्होंने दो व्यक्तियों को टैक्सी रोकने का असफ़ल प्रयास करते देखा तो वे उनके पास गये, उनकी नज़र व्यक्तियों के साथ खड़ी एक महिला पर पड़ी जो 75 प्रतिशत जल चुकी थी. यही कारण था कि कई टैक्सी ड्राइवर उस महिला को अपनी टैक्सी में बैठाने सा कतरा रहे थे. लेकिन उन्होंने उस महिला को अपनी कार में बैठाया और टैक्सी में पड़ा एक कंबल भी उसे दिया और उसे खुद को पुरी तरह से ढकने को कहा. इसके बाद वे उन्हें पास के अस्पताल ले गए. वे लगातार ये जानने का भी प्रयास करते रहे कि वो महिला जीवित है या नहीं. अब वो महिला उनकी अच्छी दोस्त बन गई है और आज भी वो उन्हें उस रात के लिए धन्यवाद कहती है. 

Source: ndtv 
“26 जुलाई में आई बाढ़ और 26/11 के हमलों के दौरान भी मेरी यही कोशिश रही थी कि मैं उन लोगों तक पहुंच पाऊं जिन्हें मेरी ज़रूरत है. अब मैं 74 साल का हूं और 11 भाषाएं बोल लेता हूं. आज तक मैंने 500 से ज़्यादा ज़रूरतमंदो को अस्पताल पहुंचाया है. जब भी कोई मुझे टैक्सी ड्राइवर कहता है तो मुझे खुद पर गर्व ही होता है”. 
Source: Humans of Bombay

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