
भारत में कई गुरु हैं जिनके अनुयायी उनकी श्रद्धा में अपना सब कुछ
न्योछावर कर देते हैं. कुछ गुरु ऐसे भी हैं जिन्होनें जन-कल्याण के लिए
अलग-अलग तरह के व्यवसाय खोल दिए हैं. तरीका जो भी हो, एक बात तो सच है कि
इन गुरुओं के पास बहुत संपत्ति और पैसा है. अब वो इसका किस तरह से
उपयोग-दुरूपयोग करते हैं, आइये जानते हैं.
1. श्री सत्य साई बाबा
पुट्टपर्थी में श्री सत्य साई बाबा का आश्रम है जिसका एक कमरा खोलने पर
98 किलो सोना, 307 किलो चांदी और 11.56 करोड़ रूपए नकद पाया गया. इस सारे
सामान की कुल कीमत थी करीब 38 करोड़ रुपये.
2. बाबा रामदेव
राम कृष्ण यादव के नाम से जन्मे बाबा रामदेव की संपत्ति में शामिल है
पतंजलि योगपीठ, दिव्य योगी मंदिर ट्रस्ट, पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज, पतंजलि
चिकित्सालय, योग ग्राम, गौशाला और पतंजलि फ़ूड और हर्बल पार्क. गरीब परिवार
में पैदा हुए बाबा रामदेव ने, योग के ज्ञान की वजह से अपना साम्राज्य
स्थापित किया. आज बाबा रामदेव के पास करीब 1,100 करोड़ रुपये की संपत्ति है.
15 साल पहले जब बाबा रामदेव ने योग सिखाना शुरू किया था, तब वो हरिद्वार
में साइकिल चला कर मंदिर और लोगों के घर योग सिखाने जाया करते थे. 90 के
मध्य में रामदेव ने आचार्य कर्मवीर के साथ हरिद्वार में योग मंदिर ट्रस्ट
की स्थापना की. उन्हें प्रसिद्धि तब मिली, जब उनके योगा के प्रोग्राम टीवी
पर दिखाए जाने लगे.
3. श्री श्री रवि शंकर
"आर्ट ऑफ़ लिविंग" के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर के 151 देशों में 300
मिलियन अनुयायी हैं. उनकी संपत्ति में शामिल है आर्ट ऑफ़ लिविंग सेंटर, श्री
श्री शंकर विद्या मंदिर ट्रस्ट, पीयू कॉलेज, श्री श्री सेंटर फॉर मीडिया
स्टडीज़, श्री श्री यूनिवर्सिटी, आर्ट ऑफ़ लिविंग हेल्थ और एजुकेशनल ट्रस्ट
आदि. 1956 में जन्मे रवि शंकर ने 6 वर्ष की उम्र से ही वेदों को पढ़ना शुरू
कर दिया था. 17 साल की उम्र में उन्होंने वैदिक साहित्य और विज्ञान की पढ़ाई
पूरी की और 1982 में "आर्ट ऑफ़ लिविंग" की स्थापना की. अनुमान है कि श्री
श्री रवि शंकर की कुल संपत्ति हज़ारों करोड़ों में है.
4. संत श्री आसाराम बापू
आसाराम बापू शायद भारत के सबसे विवादस्पद गुरु हैं. उन पर अनाधिकृत
तरीके से ज़मीन पर कब्ज़ा करने के कई आरोप लगे हैं. इसके बावजूद भी आसाराम
बापू के भारत और विदेश में 350 आश्रम हैं और 17,000 बाल संस्कार केंद्र भी.
आसाराम बापू का मुख्य कार्यालय अहमदाबाद, मोटेरा में है. 2009 में नरेंद्र
मोदी सरकार ने आसाराम बापू पर 67,000 वर्ग मीटर ज़मीन पर अतिक्रमण करने का
भी इलज़ाम लगाया है, लेकिन ये आरोप कभी सिद्ध नहीं हुए हैं.
5. गुरमीत राम रहीम सिंह इंसान
डेरा सच्चा सौदा की स्थापना 1948 में बलूचिस्तान से आये शाह मस्ताना जी
ने सिरसा में की थी. आज डेरा सच्चा सौदा के पास सिरसा में 700 एकड़ कृषि
भूमि है, गंगानगर में अस्पताल है, कई पेट्रोल पंप, दुकानें और दुनियाभर में
250 आश्रम भी हैं. लेकिन सबसे ज़्यादा प्रसिद्धि या कहें कुप्रसिद्धि डेरा
सच्चा सौदा को अपने मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह इंसान की वजह से मिली है.
उन पर ख़ून, बलात्कार, यौन उत्पीड़न जैसे संगीन इलज़ाम लगे हुए हैं. सीबीआई इन
मामलों में तफ़्तीश कर रही है इसीलिए अभी राम रहीम बेल पर बाहर हैं.
6. माता अमृतानंदमयी
माता अमृतानंदमयी के अनुयायी उन्हें प्यार से "अम्मा" बुलाते हैं. ये
शायद भारत की सबसे अमीर महिला योगिनी होंगी. अम्मा की संपत्ति 1000 करोड़
रुपये से ज़्यादा है. अम्मा का आश्रम उनके गांव, वल्लिकावु में है जो एक
आलिशान पांच मंज़िला इमारत है. अम्मा की ज़्यादातर आय उनके द्वारा शुरू किये
गए शिक्षा संस्थानों से आती है. उन्होंने अमृता विश्व विद्यापीठम कॉलेज,
अमृता इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस और अमृता स्कूल की स्थापना की है. इसके
अलावा उनका एक टीवी चैनल भी है. अम्मा के अनुयायी भी दिल खोल कर दान देते
हैं. लेकिन अमृता ट्रस्ट के स्कूल और कॉलेज की फीस किसी भी प्राइवेट स्कूल
जितनी ही है, जिसमें छात्रों को इंजीनियरिंग, बिज़नेस, बायो-टेक्नोलॉजी और
कम्युनिकेशन की शिक्षा मिलती है. उनके कॉलेज के कैंपस कोल्लम, कोच्ची,
कोयंबटूर, मैसूर और बेंगलुरु में हैं.
7. महर्षि महेश योगी
महेश प्रसाद वर्मा के नाम से जबलपुर में जन्मे महर्षि महेश योगी को 70
के दशक में बहुत प्रसिद्धि मिली जब वो रॉक बैंड "Beatles" के आध्यात्मिक
सलाहकार बने. उन्होंने एक सिद्धि प्रोग्राम की स्थापना की थी जिसमें लोगों
को हवा में तैरना और "विश्व शांति" के बारे में बताया जाता था. 5 फरवरी,
2008 में उनकी मृत्यु के समय उनकी कुल संपत्ति 2 बिलियन से 5 बिलियन डॉलर
के बीच आंकी गयी थी. उनकी अचल संपत्ति भी करीब 5 बिलियन डॉलर की है.
8. ओशो
मध्य प्रदेश में जन्म लेने वाले चन्द्र मोहन जैन को लोग ओशो के नाम से
बेहतर जानते हैं. इनका करोड़ों का साम्राज्य दुनियाभर में फैला हुआ है.
स्पष्टवादी ओशो समाजवाद, गांधीवाद और संस्थागत धर्म की कड़ी निंदा करते थे.
सेक्स के प्रति भी उनके विचारों ने ओशो या भगवान श्री रजनीश को देश का सबसे
विवादित गुरु बना दिया था. 1981 में वो अमेरिका चले गए थे जहां उन्होंने
रजनीशपुरम की स्थापना की. 4 साल बाद वो वापस भारत आ गए. पुणे के ओशो आश्रम
में हर साल दुनियाभर से करीब 2 लाख लोग आते हैं.
इन सब तथ्यों से संबंधित मेरे पास आप सभी के लिए एक प्रश्न है. क्या
आपको लगता है कि ये सारे गुरु, अपनी संस्थानों के ज़रिये, समाज कल्याण में
वास्तविक योगदान दे रहे हैं या नहीं? कमेंट करके ज़रूर बताइयेगा.
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