इन अपराधियों के बच्चों ने अच्छी पढ़ाई कर के बदल दी हैं लोगों की धारणायें
हम में से अधिकतर लोग अपना समय दूसरों के बारे में सोचने में बर्बाद करते हैं लेकिन जो 'कुछ करने वाले' होते हैं वो अपने काम को बिना किसी परवाह के करते चले जाते हैं.
आतंकवादियों के बारे में यही धारणा रही है कि वो बहुत ही निर्मम होते हैं. ये जानने की कभी किसी की इच्छा ही नहीं होती कि उनका भी एक परिवार होता है, उनके दिलों में भी भावनाएं होती हैं. ये मानना एक टकसाली (स्टिरियोटाइप) बात ही है कि एक आतंकवादी का बेटा भी उसी राह पर चलेगा, जिस पर उसकी उम्र तमाम हुई है.
इस लेख में हम आपको ऐसे बच्चों के बारे में बतायेंगे जिनके घर में से कोई न कोई संगीन अपराध से जुड़ा रहा है, पर इन्होंने उस राह को ना थामकर एक मिसाल पैदा की है.
नालिनी मुरुगन की बेटी
राजीव गांधी की हत्या में दोषी पाई गई नालिनी मुरुगन की बेटी हरिथरा शरण का जन्म 1992 में वेल्लौर जेल में हुआ. पहले दो साल बच्ची को जेल में ही रखा गया.13 साल की उम्र में उसने अपने माता-पिता से उनका यह कदम (राजीव गांधी की हत्या) उठाने की वजह पूछी. हरिथरा शरण ने बाद में मेडिकल शिक्षा हासिल करने के लिए इंग्लैंड जाने की ठानी. हरिथरा का कहना है कि, 'उसने ताउम्र अपने स्कूल के किसी कार्यक्रम में शिरक्त इसीलिए नहीं की, क्योंकि उससे लोग हर बार ग़लत नज़रिये से देखते थे'.
Source: bbc
माओवादी गणेश का बेटा
माओवादी गणेश का बेटा Muppla Srinivasa Rao (Raju) फ़िलहाल शिकागो में रहता है. इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद राजू को अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर नौकरी मिली है. इससे पहले उन्होंने हैदराबाद में भी नौकरी की थी. फ़िलहाल वो सीबीएस कंपनी में उच्च पद पर तैनात हैं.

Source: pradesh18
वीरप्पन की बेटियां
चंदन तस्कर वीरप्पन को पुलिस ने एकाउंटर में मार दिया था. वीरप्पन की दो बेटियां हैं. पिता के कारनामों ने बेटियों का पीछा नहीं छोड़ा, इसी कारण उन्हें हरेक साल स्कूल बदलना पड़ता था. एक बेटी ने इंजिनियरिंग की पढ़ाई करके शादी कर ली और प्रभा ने अंग्रेज़ी साहित्य में एमए की पढ़ाई पूरी की है.

Source: thehindu
नक्सली का बेटा आईआईटी पासआउट
झारखंड के नक्सली अरविंद का बेटा अभिषेक रंजन आईआईटी कानपुर से
रसायनशास्त्र में तालीम हासिल करने के बाद कई मल्टीनेश्नल कंपनियों में काम
चुका है. फ़िलहाल किसी प्रतिष्ठित कंपनी में उच्च पद पर तैनात है.

Source: dnaindia
अफज़ल गुरू ने बदली सोच
हाल ही में अफज़ल गुरू के बेटे ग़ालिब गुरू ने दसवीं कक्षा में 95 प्रतिशत अंक प्राप्त कर लोगों की धारणा को बदलने का काम किया है.

Source: inkhabar
हैदर फ़िल्म में एक संवाद (डायलॉग) है, "इंतक़ाम से इंतक़ाम पैदा होता
है." शायद इन बच्चों ने इंतक़ाम लेने की न ठानकर अपने काम से लोगों की
ज़ुबानों पर ताले लगाने का काम किया है.नये रास्ते तलाशने वाले पहले भटकते हैं, चले-चलाये रास्ते पर तो दुनिया चलती है शायद ये भटकना ही कुछ नया करना है. कुछ ऐसा पा जाना है, जिसकी चाहत कई बरसों से कहीं न कहीं हालातों के तले दबी होती है, उस दबी चाह को निकालने की ज़हमत इन्होंने की है.