देखिये कि कैसे भारत में तय होते हैं पेट्रोल के रेट

भारत में हर परिवार, जिनके पास कार है, उनके बजट में डीज़ल या पेट्रोल के लिए मासिक खर्च अलग रखा जाता है. औसतन एक परिवार महीने में कम-से-कम 5 से 8,000 रुपये तेल डलवाने में लगाता है. पेट्रोल या डीज़ल के रेट बढ़ने और कम होने से देश में हलचल मच जाती है. इस ईंधन की वजह से सरकारें तक गिर जाती हैं. लेकिन आपने कभी सोचा है कि पेट्रोल के रेट कैसे तय किये जाते हैं? कई बार तर्क दिए जाते हैं कि जब 1 बैरल का रेट इतना कम है तो उपभोक्ताओं तक पहुंचने के बाद पेट्रोल के रेट इतने क्यों बढ़ जाते हैं? Factly द्वारा बनाये गए इन इन्फोग्राफिक्स के ज़रिये हम आपको बताएंगे इसका राज़.

1. सरकार कच्चे तेल के बैरल खरीदती है. 1 बैरल में 159 लीटर तेल आता है जिसके 1 लीटर का मूल्य होता है ₹11.21.


2. इस मूल्य में ओशन फ्रेट शुल्क और ट्रांसपोर्ट चार्जेज़ जोड़े जाते हैं और 1 लीटर का मूल्य हो जाता है ₹19.22.


3. ये जहाज भारतीय पोर्ट तक पहुंचते हैं, जिनमें रिफ़ाइनरी ट्रांसफर शुल्क जोड़ा जाता है. इससे 1 लीटर तेल का मूल्य हो जाता है ₹19.70.


4. पेट्रोल पंप के मालिकों को बढ़े हुए रेट पर ये बैरल बेचे जाते हैं. इससे 1 लीटर तेल का मूल्य हो जाता है ₹23.47.


5. इस शुल्क में केंद्रीय सरकार एक्साइज़ ड्यूटी जोड़ती है और 1 लीटर तेल का मूल्य हो जाता है ₹44.95.


6. इस मूल्य में डीलर कमीशन भी जोड़ा जाता है जिससे 1 लीटर तेल का मूल्य हो जाता है ₹47.20.


7. कहानी यहां ख़त्म नहीं होती, इस मूल्य में हर राज्य की सरकार VAT या Value Added Tax जोड़ती है. दिल्ली में 27% VAT लगता है और तेलंगाना में 35.2%. इसे जोड़ने के बाद तेल का मूल्य हो जाता है ₹59.95.


ये सारे आंकड़े 1 फरवरी, 2016 के आधार पर लिए गए हैं. इसलिए आपको समझ आया कि 1 लीटर पेट्रोल के लिए आपको ₹59.95 क्यों देने पड़ते हैं.


Source: Factly

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