राजस्थान में महज एक खत की वजह से आई थी पहली रेल
सर हैनरी लॉरेंस राजस्थान के लिए रेल चाहते थे
जिस समय भारत में रेल चली उसी वक़्त सर हैनरी लॉरेंस राजस्थान में गवर्नर के एजेंट पद पर नियुक्त थे. वो चाहते थे कि राजपूताना (राजस्थान) में भी रेल सुविधा शुरू हो. उन्होंने अपनी इस मांग को एक पत्र के जरिए देश के गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी तक पहुंचाया.समृद्ध है राजपूताना
सर लॉरेंस ने जो खत डलहौजी को लिखा था, उसमें राजपूताना में रेल चलाने से संबंधित बात करने के साथ-साथ राजपूताना की समृद्ध ज़मीन के कसीदे कहे और अंग्रेजी हुक़ूमत को यहां रेल लाने के प्रस्ताव के लिए प्रेरित किया.रियास्तों से समझौते
हालांकि 1853 में रेल चल गई थी लेकिन उसे राजस्थान तक आते-आते दो दशकों का समय लग गया. कई रियास्तों से बातचीत करने के बाद आख़िरकार 1879 में राजस्थान में रेल चली.प्रथम प्रयास आख़िर क्यों रहा नाकाम?
1863 में ही मध्य भारत और राजपूताना के बीच रेलवे लाइन बिछाने को लेकर कुछ प्रस्ताव पास किए गये लेकिन राह में रोड़ा पड़ी कई रियास्तों से हुकूमत के लिए समझौता करना मुश्किल हो गया. कई बार बातचीत नाकाम हुई, लेकिन 1879 तक जाकर आखिर रेल चल ही पड़ी.तो देखा आपने, सर लॉरेंस के एक खत के कारण लॉर्ड डलहौजी का ध्यान प्रदेश (राजस्थान) की ओर आकर्षित हुआ और देर से ही सही लेकिन रेल तो आ ही गई.
Source: Bhaskar