इनकी कौम इस्लाम है, ईमान पाक है, हाथों में तिरंगा है, और होंठों पर अपने मुल्क के लिए दुआ है!

मुझे तन चाहिए , ना धन चाहिएबस अमन से भरा यह वतन चाहिएजब तक ज़िन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिएऔर जब मरूं तो तिरंगा कफ़न चाहिए  (अज्ञात)

भारत में रहने वाले सभी देशवासियों की ख़्वाहिश कुछ इसी तरह की है. देश में बहुत से ऐसे लोग हैं जो ज़रूरत पड़ने पर देश के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं और किसी की जान ले भी सकते हैं. इस आर्टिकल को लिखने का मक़सद आपको अहसास करवाना है कि देश में रहने वाले सभी धर्म, संप्रदाय, समुदाय, समाज के लोग अपने देश से मोहब्बत करते हैं. लेकिन कई मौकों पर हम उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाते रहते हैं. हम ख़ुद ही तय कर लेते हैं कि कौन सबसे बड़ा देशभक्त है और कौन गद्दार? हमारा देश लोकतांत्रिक है, और यहां रह रहे सभी लोगों को समान अधिकार दिया गया है. उम्मीद है कि इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपकी सोच में थोड़ा बदलाव ज़रूर आएगा.

जब फहराया था मक्का में तिरंगा

इनकी कौम इस्लाम है, इनका ईमान पाक है, हाथों में तिरंगा है और होंठों पर देशवासियों के लिए दुआ है. इन्होंने अपने प्रयास से देश का नाम रौशन किया. विश्व के पवित्र शहर मक्का में शान से तिरंगा फहरा कर साबित कर दिया, कि उनके ईमान में ही कौम है.

बात 2013 की है

हर साल की तरह इस साल भी कई लोग हज यात्रा करने गए, जिनमें मध्य प्रदेश के मुबारक हुसैन, मुनव्वर हुसैन और मोहम्मद असलम भी गए हुए थे. लेकिन इस साल वे कुछ अलग करना चाहते थे.
Source: kohraam

हमारा ईमान है हिन्दुस्तान

इस हज यात्रा में शामिल यात्रियों का मक़सद देश की शांति के लिए ख़ुदा से दुआ मांगना था. इसके लिए इन्होंने पवित्र शहर मक्का में देश का झंडा फहराया.
Source: bhaskar

देशप्रेम के आगे प्रशासन ने भी मानी हार

देशप्रेम को एक जज़्बात के रूप में देखा जा सकता है. हाजी मुबारक हुसैन, मुनव्वर हुसैन और मोहम्मद असलम तिरंगा ले गए. सऊदी अरब पहुंचने के बाद उन्होंने स्थानीय प्रशासन से झंडा लहराने की अनुमति मांगी. लेकिन उन्होंने अनुमति देने से मना कर दिया.
Source: bhaskar

वे अड़ गए

प्रशासन के लाख मना करने के बावजूद वे अड़ गए और खुदा के दर पर तिरंगा लहरा कर दुआ मांगने की अपील की. उनकी देशभक्ति के आगे सऊदी प्रशासन को झुकना पड़ा और उन्होंने अनुमति दे दी.
Source: bheldailynews

मक्का में हाजियों ने फ़िर फहराया तिरंगा

मुल्क की तरक्की और अमन के लिए साल 2015 के अक्टूबर महीने में मध्य प्रदेश के ही हाजियों ने मक्का-मदीना में राष्ट्रीय ध्वज फहराया. ये सभी मध्यप्रदेश के झाबुआ के रहने वाले हैं. इनके इस प्रयास को राज्य सरकार ने भी काफ़ी सराहा.
Source: kohraam

इक़बाल दिवाली ने बढ़ाया देश का अभिमान

हाजी इक़बाल दिवाली ने हिंदुस्तान की शान में तिरंगा फहरा कर मक्का में मौजूद सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा. उनके इस प्रयास को अन्य लोगों ने सराहा और उनके साथ शामिल हो लिए.
Source: fastlivenews

इस साल भी हो रही है तैयारी

मक्का-मदीना में तिरंगा फहराना एक परंपरा-सी हो गई है. इस साल भी कई हज यात्री राष्ट्रीय झंडा फहराना चाहते हैं. इसके लिए वे केंद्र सरकार और सऊदी सरकार से परमीशन मांग रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, इस बार का राष्ट्रीय ध्वज सबसे बड़ा हो सकता है.
ख़ुदा के दर पर लोग अपने और अपने परिवार के लिए दुआ मांगते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं. यह हिन्दुस्तान जितना हिन्दुओं का है, उतना ही मुसलमानों का भी है और अन्य समुदायों का भी. अगर हम वास्तव में भारत की समृद्धि चाहते हैं, तो हमें अपनी सोच को बदलने की ज़रूरत है. बाकी हिन्दुस्तान सदियों से ज़िंदाबाद था, ज़िंदाबाद है और ज़िंदाबाद रहेगा.

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