भारत के इतिहास को खुद में संजोए इन सुंदर स्मारकों को नहीं देखा तो क्या देखा!
1. सलीम सिंह की हवेली
जैसलमेर में स्थित इस खूबसूरत इमारत को सलीम सिंह ने 1815 ई0 में बनवाया था. इसे जहाजमहल भी कहा जाता है क्योंकि इसके सामने का हिस्सा एक जहाज की तरह दिखता है. इस इमारत में 38 बाल्कनी हैं जिनका डिजाइन एक दूसरे से पूरी तरह अलग है.2. बड़ा बाग
ये विशाल पार्क अपने शाही स्मारकों या छतरियों के लिए पहचाना जाता है यह जगह जैसलमेर शहर से 6 किलोमीटर दूर है. पार्क के अंदर स्मारकों के अलावा, पर्यटक जैतसार टंकी, जैत बांध और एक गोवर्धन स्तंभ को भी देख सकते हैं.3.मकबरा मखदूम याह्या मनेरी
यह मकबरा एक सूफी संत मखदूम याह्या मनेरी की याद में बनवाया गया था. इतिहासकारों कि मानें तो इस मकबरे का निरामं 13वीं शताब्दी में हुआ था. कहा जाता है कि संत के अंदर दिव्या शक्ति थी और इनके पास आने वाला कोई भी फरियादी खाली हाथ नहीं जाता था.4. चीनी का रौजा
चीनी का रौजा महान विद्वान व कवि और मुगल बादशाह शाहजहां के प्रधानमंत्री मुल्लाह शुकरुल्लाह शिराजी की कल्पना का परिणाम है. 1935 में निर्मित यह मकबरा युमना नदी के किनारे पर है. भारत में यह अपने तरह का पहला निर्माण था, जिसमें विस्तृत रूप से चमकदार कांच के टाइल्स का प्रयोग किया गया था.5. कांच महल
यह महल मुगल वास्तुशिल्प की विशेषताओं का जीता-जागता उदाहरण है. इसके निर्माण में टाइल्स का भरपूर स्तेमाल हुआ है, इसलिए इसे कांच महल कहा जाता है. कांच महल का निर्माण पहले शाही औरतों के हरम के तौर पर किया गया था. बताया जाता है कि बाद में इस जगह का इस्तेमाल जहांगीर ने अपनी शिकार गाह के रूप में किया.6. एतमादुद दौला का मकबरा
एतमादुद दौला और उनकी पत्नी अस्मत जहां का यह मकबरा 1622 से 1628 के बीच उनकी बेटी नूरजहां ने बनवाया था. इस मकबरे की देखकर ऐसा लगता है कि यह ताजमहल की पूर्ववर्ती रचना या ड्राफ्ट हो. इसी कारण इसे बेबी ताज और ज्वेल बॉक्स भी कहा जाता है.7. मार्बल पैलेस
मार्बल पैलेस का निर्माण राजा राजेंद्र मलिक द्वारा कोलकाता में करवाया गया था. इस स्थान की ख़ास बात ये है कि यहाँ आने के बाद आपको ओरिजिनल बंगाली वास्तुकला के दर्शन होंगे. यदि आप इस महल को देखने आएँगे तो आपको मिलेगा कि महल के सामने एक सुंदर गार्डन का निर्माण किया गया है.8. बोलगट्टी पैलेस
केरल के कोच्ची स्थित बोलगट्टी पैलेस भारत का एकमात्र ऐसा महल है जिसका निर्माण किसी भारतीय राजा ने नहीं कराया था. कहा जाता है कि इसका निर्माण 1744 में डचों द्वारा कराया गया था. आज इस महल में गार्डन स्विमिंग पूल और आयुर्वेद सेंटर भी हैं.यदि आप प्रकृति के साये में फुर्सत के कुछ पल बिताना चाहते हैं तो ये आपके लिए यह स्मारक एक परफेक्ट जगह हैं.
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