भगवान शिव ने अपने खड्ग से काटा था ब्रह्मा का सर, लेकिन क्यों?

अब बात ज़रा आगे बढ़ाते हैं. कुछ सवाल हैं जिनके जवाब तलाशने होंगे. सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का पांचवा शीश भगवान शिवजी ने क्यों काटा?
हम जानते हैं कि धर्मग्रंथों में बहुत से मत मिलते हैं, जिनको तो नहीं जोड़ा जा सकता, लेकिन निषकर्ष निकालने के लिए कई मतों का होना भी ज़रूरी है.



भगवान भैरव ने काटा था शीश

धर्म ग्रंथों के अनुसार भैरव भगवान शिव का ही एक अवतार हैं. भैरव के स्वभाव में क्रोध है, तामसिक भाव है. इस अवतार का मूल उद्देश्य सारी बुराईयों को समावेश करने के पश्चात भी अपने अंदर धर्म को स्थापित करना है. शिव पुराण में भगवान शंकर के इस रूप के संदर्भ में लिखा गया है कि एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु स्वयं को शकंर जी से श्रेष्ठ मानने लगे थे. इस विषय पर जब साधु-संतों से पूछा गया तो उन्होंने भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु की बात को नकार दिया. उसी वक़्त वहां भगवान शंकर प्रकट हुए और ब्रह्मा जी ने कहा कि “तुम मेरे पुत्र हो चद्रशेखर”, मेरी शरण में आओ. इतनी बात सुनने के बाद भगवान शंकर को क्रोध आ गया और उन्होंने वहीं कालभैरव का रूप धारण कर अपनी उंगली के नाख़ून से ब्रह्मा का सर काट दिया.

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पांचवा शीश कटने की दास्तां

जब सृष्टि (सतरूपा) का निर्माण करने के बाद भगवान ब्रह्मा उसके पीछे-पीछे जाने लगे तो उनके चार सिर निकल आये थे लेकिन जब पांचवा शीश निकला तो देवताओं ने शिवजी से इसे मिटाने की गुहार लगाई. भगवान शिव ने अपना खड्ग उठाया और भगवान ब्रह्मा का पांचवे सर को काट दिया. भगवान शिव के कहा कि ये पांचवा सर मानव के अंहकार का प्रतीत है जिसे समय-समय पर काट देना चाहिए.

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अगर इसके अलावा कोई अन्य मान्यता हो तो हमें बताएं. अगली कड़ी में पढ़ें और रोचक धार्मिक कहानियां. इसके अलावा हमें अपनी प्रतिक्रिया देते रहें ताकि हम लिखते रहें.
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