यहां परंपरा के नाम पर मौत के घाट उतार दिए जाते हैं घर के बड़े-बुज़ुर्ग

अगर आपको भारत की परंपराओं और मान्याताओं पर गर्व है तो इस ख़बर को पढ़ने के बाद आपको थोड़ी नफ़रत ज़रूर हो जाएगी. हम किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते, लेकिन क्या करें ये ख़बर मुझे अपने देश की मान्यताओं और परंपराओं पर गुस्सा दिलाने के लिए काफ़ी हैं. शायद आपको भी गुस्सा आ जाए.





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मान्यताओं और परंपराओं के नाम पर अकसर हम इंसानियत की हदें पार कर जाते हैं. हम भूल जाते हैं कि किसी भी रूप में किसी को भी दुख देना किसी भी परंपरा और मान्यताओं का हिस्सा नहीं हो सकतीं.

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तमिलनाडू में एक परंपरा के तहत लोग अपने घर के बुज़ुर्गों को मार डालते हैं. जी हां, ये एक मान्यता है, जिसे तमिलनाडू में निभाया जाता है. इस परंपरा को सम्माजनक माना जाता है. इसके तहत जब बुज़ुर्ग की सेवा उसका परिवार नहीं कर पाता, या फ़िर बुज़ुर्ग खुद कोई काम नहीं कर पाते, तो उन्हें मौत दे दी जाती है.

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आप ये जान कर हैरान रह जाएंगे कि कई बार खुद बुज़ुर्ग मरने के लिए बोलते हैं. वैसे तो इस परंपरा को गैर कानूनी करार दिया गया है, पर गांव वाले इस बात का ध्यान रखते हैं कि पुलिस को इसकी भनक न लगे. इसे एक महोत्सव की तरह मनाया जाता है जिसमें पूरा गांव शामिल होता है.

बुज़ुर्गों को मौत देने के कारण कुछ ऐसे होते हैं.

1. किसी बुज़ुर्ग को लाइलाज बीमारी हो.
2. परिवार गरीबी के कारण उनका इलाज नहीं करवा सकता.
3. किसी के पास बुज़ुर्गों की देख-भाल का वक़्त न हो.
4. जब बुज़ुर्ग परिवार पर बोझ लगने लगें.

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अपने बड़ों को बोझ समझना किस परंपरा का हिस्सा हो सकता है! और इससे भी दुखद ये है कि अपने बुज़र्गों को मान्यता के नाम पर अलग-अलग तरीकों से मौत के घाट उतार दिया जाता है, जो की किसी भी रूप में सही नहीं है. ऐसी मान्यताओं और परंपराओं की मैं तो कड़े शब्दों में निंदा करता हूं. आप क्या कहते हैं? हमें Comment Box में ज़रूर लिख कर बताएं.
Source: jagran

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