
मशहूर
एक्टर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी हाल ही में चर्चा में थे. उनके अपार्टमेंट में
रहने वाली एक महिला ने आरोप लगाया था कि नवाज़ुद्दीन ने उनके साथ बदतमीज़ी की
और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया. बाद में नवाज़ुद्दीन मीडिया के सामने आये
और सच्ची बात बताई. महिला बिल्डिंग की पार्किंग को ले कर इन्हें अकसर
परेशान करती थी और एक दिन रोष में आकर उसने पुलिस से झूठी शिकायत कर दी कि
नवाज़ुद्दीन ने उसकी मां पर हाथ उठाया. उस महिला ने एक वीडियो भी जारी किया,
लेकिन उसमें सिद्दीकी कुछ भी करते नज़र नहीं आ रहे हैं. अब उन्होंने कोर्ट
का दरवाज़ा खटखटाया है और उस महिला पर मानहानि का दावा भी दाखिल करने का सोच
रहे हैं.
लेकिन ये हैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, मशहूर बॉलीवुड अभिनेता,
जिनकी आये दिन मीडिया में चर्चा होती है, जिनकी बात पुलिस सुनेगी, कोर्ट भी
तवज्जो देगा. आपका और मेरा क्या? अगर कभी हम पर झूठा रेप या शारारिक
उत्पीड़न का केस हो जाए तो? क्या हमारी बात कोई सुनेगा? जवाब है... हां. अगर
आप थोड़ी सी सावधानी बरतें तो... इस उल्लेख में आपको बताएंगे कि अगर किसी
पुरुष के ख़िलाफ़ झूठा केस हो तो कानूनन तरीके से उससे कैसे बचा जाए, लेकिन
पहले आपको बताते हैं कुछ चौंकाने वाले तथ्य.
भारत में महिलाओं के साथ रेप, वैवाहिक रेप और दहेज संबंधी जुर्म को ले
कर कानून ने बहुत सख़्त नियम बना दिए हैं. इसके कारण जहां इन जुर्मों की
शिकायतों में खासी बढ़ोतरी हुई है, वहीं
दिल्ली महिला कमीशन के आंकड़ों
के अनुसार इनमें से 53.2% मामले झूठे हैं! जी हां, अप्रैल 2013 से जुलाई
2014 के बीच दिल्ली में रेप के 2753 मामले दर्ज हुए जिनमें से 1464 मामले
झूठे थे.
यही नहीं, आईपीसी की धारा 498A महिलाओं को पति या पति के रिश्तेदारों
द्वारा दहेज संबंधी या शारीरिक उत्पीड़न के मामले में सज़ा का प्रावधान देती
है. एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार 2011 से 2013 के बीच इस धारा का
दुरूपयोग करते हुए, पुरुषों पर 31,292 झूठे मामले दर्ज हुए हैं. इनमें
वैवाहिक हिंसा और रेप के आरोप शामिल हैं. छानबीन करने पर सामने आता है कि
महिला ने प्रतिशोध लेने के लिए झूठा केस दाखिल किया था.
पहली बात, हमारे देश में महिलाओं पर किये गए अत्याचारों को नहीं नकारा
जा सकता है. ऐसे अत्याचारों के ख़िलाफ़ सख़्त-से-सख़्त क़ानून होने चाहिए जो
महिलाओं की हिफ़ाज़त कर सकें. लेकिन ऐसे झूठे और बेमानी मामलों से महिलाओं को
ही नुकसान होगा क्योंकि जब वास्त्विक केस सामने आएगा तब शायद उस पर
विश्वास करना मुश्किल हो.
अब ये सोचिये, जिस पुरुष पर ये झूठा केस किया गया है, उसका
जीवन तो पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जायेगा. समाज में अपमानित होने से ले
कर रोज़गार के अवसर तक बंद हो सकते हैं. एक बार ऐसा आरोप आप पर लग जाए तो
चाहे आप दोषमुक्त भी क्यों न हो जाएं, समाज सिर्फ़ आप पर लगे आरोप को याद
रखेगा. रोहतक की दो बहनों का मामला तो आपको याद ही होगा. एक दिन सशक्त
महिलाओं के रूप में उभरी बहनें अगले दिन ही पब्लिसिटी की भूखी चालबाज़
निकलीं. वो तो मीडिया में इस मामले को बहुत उछाला गया, इसलिए हमें उसके
बारे में पता है. कई ऐसे केस हैं, जिनकी हमें ख़बर ही नहीं मिलती. तो क्या
कोई उपाय है इस अन्याय के ख़िलाफ़? क्या पुरुषों की सुरक्षा के लिए कानून में
कोई प्रावधान है? एक पुरुष क्या करे जब उस पर ऐसा झूठा आरोप लग जाए? जानते
हैं.
1. झूठी शिकायत के खिलाफ आईपीसी के अंतर्गत शिकायतकर्ता, गवाह, पुलिस और वकील पर केस किया जा सकता है.
2. हर विषादपूर्ण शादी रेप की शिकायत में नहीं तब्दील हो सकती, ये खुद सुप्रीम कोर्ट ने कहा है.
3. अगर आपको लगता है कि जिस महिला के साथ आपके संबंध हैं, वो मानसिक तौर पर अशांत है तो सावधान रहें.
4. सबसे ज़रूरी है कि अपने Common Sense का उपयोग करें. एक केस में
महिला पुरुष पर रेप का आरोप लगाने की धमकी दे रही थी, लेकिन वो पुरुष उस
रिलेशनशिप से निकलने के बजाये और उलझता गया. ऐसे मामलों में कानून भी आपके
विरुद्ध हो जायेगा.
5. अगर आप पर झूठा केस होता है तो सबसे पहले ये याद रखें कि उसका विरोध
ज़रूर करें. कुछ पुरुष ये सोच कर घबरा जाते हैं कि पुलिस उनकी बात नहीं
सुनेगी.
6. कई बार पुलिस केस रफ़ा-दफ़ा करने के लिए आपको डराएगी और एफआईआर करने
की धमकी देगी. उनसे घबराइएगा नहीं, अपने वकील को बुलाएं और पुलिस को बताएं
कि आप पर झूठा केस दर्ज किया गया है और ऐसे बेमानी मामले को दर्ज करने के
लिए उनकी भी रिमांड लग सकती है.
7. याद रखें कि आप पर केस तभी हो सकता है जब पुख़्ता सबूत हों. सिर्फ़
'दुखभरी' कहानी बताने से ही मामला सच नहीं हो जाता. आज-कल ऐसा भी देखने में
आया है कि लड़की फेसबुक पर बात करती है, कुछ फ़ोनकॉल्स होते हैं, एक-आध
मुलाक़ात के बाद खबर मिलती है कि आप पर रेप का केस दर्ज हो गया है.
8. आये दिन न्यूज़ में जालसाज़ और झूठे रेप के मामले दर्ज करवाने वाले गैंग की खबर आती है. तो ज़रा सावधान रहें.
9. कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं जो आपकी झूठे रेप मामलों से रक्षा
करते हैं. ऐसे केस अगर कोर्ट में साबित होते हैं तो अभियुक्त को 7 साल तक
की सज़ा हो सकती है. इन कानूनों के बारे में आप विस्तार से नीचे दिए गए लिंक
में पढ़ सकते हैं.
10. अंत में ये कि जब तक आपको किसी पर पूरी तरह से विश्वास नहीं हो
जाता, सावधान रहें. अगर आपके कदम और कर्म सही रहेंगे तो आप सुरक्षित
रहेंगे.
भारत को एक पुरुष प्रधान समाज समझा जाता है, इसलिए ऐसी घटनाओं पर ज़्यादा
लोगों का ध्यान नहीं जाता. हम ये मानते हैं कि देश में महिलाओं के उत्थान
के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए, लेकिन समरूपता तब होगी जब कानून पुरुष
और महिलाओं, दोनों के अधिकारों को सुरक्षित रख सकेगा. इस आर्टिकल को ज़्यादा
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Feature Image Source: HuffPo