ट्रैवल का शौक़ उस हरेक इंसान को होता है जो स्वयं को जानने की इच्छा रखता है. गुरुनानक देवजी से ले कर महात्मा बुद्ध ने स्वयं को जानने का काम दुनिया देखने के साथ किया और अपने अंदर सुधार कर लोगों को संदेश दिया. जनाब, ये तो पौराणिक कथाओं की बात थी, लेकिन आधुनिक समय में ट्रैवल करने के मायने व्यक्तिगत होते जा रहे हैं, लगातार बदलते जा रहे हैं. आज इस लेख में हम आपको एक ऐसे परिवार के बारे में बताने जा रहे हैं, जो ट्रैवल का शौक़ मात्र अपने दिलों में नहीं पाले रखता, बल्कि रुख़ करता है रास्तों का.