इन फैमिली फ़ोटोज़ से निकल कर आये हैं मज़ेदार नमूने खुद देख लो
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फ़ोटोज़ यादों को संभालने को अच्छा ज़रिया होती हैं और बात हो फैमिली फ़ोटोज़
की, तो इससे बहुत सारी यादें जुड़ी हुई होती हैं, जो कभी हंसी तो कभी
मस्तियों के पलों को खुद में कैद कर के रखती हैं. आज हम आपको ऐसी ही फैमिली फ़ोटोज़ दिखा रहे हैं, जो आपको दिल खोल कर हंसने पर मजबूर कर देंगी.
कहते हैं कि पैसे से ख़ुशी नहीं खरीदी जा सकती. मगर फ़िर भी, अमीर लोग हमेशा ख़ुश नज़र आते हैं. और ऐसा कौन होगा जो अमीर होना न चाहे? यदि आपके बैंक अकाउंट में करोड़ों रुपये पड़े हों तो आपके चेहरे से मुस्कान तो जाती ही नहीं. मगर ऐसा करने में जहां कई अपनी सारी ज़िंदगी परेशान रहते हैं, वहीं कई अप्रत्याशित रूप से सौभाग्यशाली हो जाते हैं. अब इन सौभाग्यशाली लोगों पर ही एक नज़र डालें. मेरा तात्पर्य यह कतई नहीं है कि मैं उनकी जी-तोड़ मेहनत को खारिज करूं. मगर अमीर होने के ये तौर-तरीके आपको दंग न कर दें तो कहना!!!
ट्रैवल का शौक़ उस हरेक इंसान को होता है जो स्वयं को जानने की इच्छा रखता है. गुरुनानक देवजी से ले कर महात्मा बुद्ध ने स्वयं को जानने का काम दुनिया देखने के साथ किया और अपने अंदर सुधार कर लोगों को संदेश दिया. जनाब, ये तो पौराणिक कथाओं की बात थी, लेकिन आधुनिक समय में ट्रैवल करने के मायने व्यक्तिगत होते जा रहे हैं, लगातार बदलते जा रहे हैं. आज इस लेख में हम आपको एक ऐसे परिवार के बारे में बताने जा रहे हैं, जो ट्रैवल का शौक़ मात्र अपने दिलों में नहीं पाले रखता, बल्कि रुख़ करता है रास्तों का.
कहा जाता है कि जंगल की आग से भी तेज़ कोई चीज़ फैलती है तो वो चीज़ अफवाह होती है. और जो बिना किसी सहारे के ही सैकड़ों, हज़ारों मीलों का सफ़र तय कर लेती है. हम हर रोज कोई न कोई नयी ख़बर सुनते हैं, जिनमें से कुछ सच और कुछ झूठ भी हुआ करती हैं. इससे जुड़ी ही एक बहुत पुरानी कहावत है जो हिटलर के प्रचार मंत्री ‘गोएबल्स’ से जुड़ती हैं. गोएबल्स कहता था कि किसी भी झूठ को 100 बार यदि जोर-जोर से बोला जाए तो वह अंतत: सच लगने लगता है. तो पेश हैं इंडिया के वे 10 ऐसे झूठ जिन्हें हम अब तक सच मानते रहे हैं. 1. 1960 रोम ओलम्पिक्स के 400 मीटर रेस के दौरान मिल्खा सिंह ने पीछे मुड़ कर देखा “फ्लाइंग सिक्ख” के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर, मिल्खा सिंह 1960 के रोम ओलम्पिक्स के 400 मीटर रेस में कभी भी सबसे आगे नहीं थे. और न ही उन्होंने उस रेस में कभी पीछे मुड़ कर देखा था. वे इस रेस में पांचवे नंबर पर थे और काफ़ी मेहनत-मशक्कत के बाद चौथा स्थान हासिल कर सके थे. Source: merepix 2. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु विमान दुर्घटना में हुई थी सन् 1999 में आई मुखर्जी रिपोर्ट बताती...